Jantar Mantar Protest : जंतर-मंतर पर वायरल वीडियो के बाद पुलिस का एक्शन, प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने और लोक शांति भंग करने की मंशा का आरोप; मामले पर CJP प्रवक्ता ने भी जताई आपत्ति।
Jantar Mantar Protest : जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में युवती रुचिका सिंह के खिलाफ नोएडा एक्सप्रेसवे थाने में जीरो FIR दर्ज की गई है। जानिए पूरा मामला, पुलिस की कार्रवाई और CJP प्रवक्ता की प्रतिक्रिया।
Jantar Mantar Protest : जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में युवती रुचिका सिंह के खिलाफ उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित एक्सप्रेसवे थाने में जीरो FIR दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के आधार पर दर्ज इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी बहस को तेज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में एक युवती, जिसकी पहचान रुचिका सिंह के रूप में बताई जा रही है, प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित रूप से अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणियां करती हुई दिखाई दे रही है।
वीडियो वायरल होने के बाद इस पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंची और कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
पुलिस के अनुसार, युवती नोएडा की रहने वाली बताई गई है। इसी आधार पर ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के एक्सप्रेसवे थाने में जीरो FIR दर्ज की गई। जीरो FIR ऐसी स्थिति में दर्ज की जाती है जब अपराध किसी अन्य क्षेत्राधिकार में हुआ हो, लेकिन शिकायत किसी भी थाने में स्वीकार कर आगे संबंधित थाने को भेजी जा सकती है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच आगे संबंधित क्षेत्राधिकार वाली एजेंसी द्वारा की जाएगी।
दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान दिए गए कथित बयान से प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि इस प्रकार की टिप्पणी जानबूझकर सामाजिक विद्वेष फैलाने तथा लोक शांति भंग करने की मंशा से की गई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है—
- धारा 352
- धारा 353(1)
- धारा 356(1)
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मामले में Citizens for Justice and Peace (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास का भी बयान सामने आया है। उन्होंने FIR दर्ज किए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह गैर-कानूनी बताया।
सौरव दास ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया है जो किसी को अपमानजनक लगती है, तो संबंधित पक्ष सिविल या आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करा सकता है। लेकिन केवल आपत्तिजनक भाषा के आधार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक कानून का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता।
सौरव दास ने कहा कि वह इस बात का समर्थन नहीं कर रहे कि अभद्र भाषा का प्रयोग उचित है। उनके अनुसार, किसी भी सार्वजनिक मंच पर संयमित भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल ऐसे बयानों के आधार पर आपराधिक तंत्र का इस्तेमाल करना लोगों में भय का माहौल पैदा कर सकता है। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करने और कानून के संतुलित उपयोग के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
अपने बयान में सौरव दास ने युवाओं से सार्वजनिक जीवन में शब्दों के चयन को लेकर सावधानी बरतने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति, संस्था या संवैधानिक पद के बारे में टिप्पणी करते समय मर्यादा और जिम्मेदारी बनाए रखना जरूरी है।
साथ ही उन्होंने पुलिस से भी निष्पक्ष तरीके से कानून का पालन करने और किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव या उद्देश्य से अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न करने की अपील की।
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। एक पक्ष जहां प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा बनाए रखने और कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोध प्रदर्शन के अधिकार और आपराधिक कानून के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठा रहा है।
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
जीरो FIR दर्ज होने के बाद मामला संबंधित क्षेत्राधिकार वाले थाने या जांच एजेंसी को स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद पुलिस वीडियो की सत्यता, घटना के परिस्थितिजन्य साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित कार्रवाई तय होगी।
मामले को लेकर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

















