स्वास्थ्य डेस्क | झारखंड में इन दिनों ब्रेन मलेरिया (सेरेब्रल मलेरिया) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इस बीमारी के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। कई मरीजों को गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि कुछ लोगों की मौत की भी पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी, जांच अभियान और जागरूकता कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेन मलेरिया सामान्य मलेरिया का ही एक गंभीर रूप है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता है। बरसात के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने के कारण इस बीमारी का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी जा रही है।
क्या है ब्रेन मलेरिया?
ब्रेन मलेरिया, मलेरिया का सबसे गंभीर रूप है, जो मुख्य रूप से प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium falciparum) नामक परजीवी के संक्रमण से होता है। यह संक्रमण संक्रमित मादा एनोफिलीज़ (Anopheles) मच्छर के काटने से फैलता है। सामान्य मलेरिया में बुखार, ठंड लगना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन जब संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंच जाता है, तब इसे ब्रेन मलेरिया कहा जाता है। यह स्थिति मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है और तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है।

झारखंड में क्या है मौजूदा स्थिति?
पूर्वी सिंहभूम के पोटका क्षेत्र सहित कई ग्रामीण इलाकों में लगातार तेज बुखार के मरीज सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच अभियान तेज कर दिया है। गांव-गांव मेडिकल टीमें भेजी जा रही हैं, जहां रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) के जरिए लोगों की जांच की जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में दवाइयों का वितरण, फॉगिंग, कीटनाशकों का छिड़काव और मच्छरदानियों का वितरण भी किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार के साथ बेहोशी, दौरे, मानसिक भ्रम या लगातार उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल पहुंचें। समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
कैसे करता है शरीर को प्रभावित?
ब्रेन मलेरिया में परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं में प्रवेश कर तेजी से बढ़ते हैं। संक्रमित कोशिकाएं मस्तिष्क की छोटी रक्त वाहिकाओं में जमा होने लगती हैं, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। इसके कारण मस्तिष्क में सूजन, ऑक्सीजन की कमी और तंत्रिका तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। यही वजह है कि मरीज को बेहोशी, दौरे और मानसिक भ्रम जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
ब्रेन मलेरिया के प्रमुख लक्षण
ब्रेन मलेरिया के शुरुआती लक्षण सामान्य मलेरिया जैसे हो सकते हैं, लेकिन कुछ संकेत बेहद गंभीर होते हैं—
- तेज़ बुखार और ठंड लगना
- लगातार सिरदर्द
- शरीर में तेज दर्द और अत्यधिक कमजोरी
- मतली और बार-बार उल्टी
- चक्कर आना
- मानसिक भ्रम या असामान्य व्यवहार
- बोलने या समझने में कठिनाई
- बार-बार दौरे (Seizures)
- बेहोशी या कोमा की स्थिति
- बच्चों में सुस्ती, लगातार रोना या दूध न पीना
यदि इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।

किन लोगों को अधिक खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार निम्न वर्ग के लोगों में ब्रेन मलेरिया का खतरा अधिक रहता है—
- पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे
- गर्भवती महिलाएं
- बुजुर्ग
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग
- मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले या वहां से लौटे लोग
बचाव के प्रभावी उपाय
ब्रेन मलेरिया से बचने के लिए मच्छरों के प्रजनन को रोकना और खुद को मच्छरों के काटने से बचाना सबसे जरूरी है।
- घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
- कूलर, गमले, टायर और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करें।
- रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।
- पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
- मच्छर भगाने वाली क्रीम, स्प्रे या वेपराइज़र का इस्तेमाल करें।
- खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाएं।
- तेज बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से तुरंत जांच करवाएं।
समय पर इलाज ही बचा सकता है जान
चिकित्सकों के अनुसार ब्रेन मलेरिया का इलाज जितनी जल्दी शुरू किया जाए, मरीज के स्वस्थ होने की संभावना उतनी अधिक रहती है। इलाज में देरी होने पर मस्तिष्क, किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार के तेज बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से बरसात के मौसम में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखने, पानी जमा न होने देने और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, बुखार के लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की सलाह दी गई है।
निष्कर्ष
झारखंड में बढ़ते ब्रेन मलेरिया के मामले चिंता का विषय हैं, लेकिन समय पर पहचान, सही उपचार और सावधानी बरतकर इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि तेज बुखार के साथ बेहोशी, दौरे या मानसिक भ्रम जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय सहायता लें। बरसात के मौसम में थोड़ी-सी सावधानी आपके और आपके परिवार के जीवन की रक्षा कर सकती है।













