Jharkhand News : झारखंड की लाल मिट्टी से निकलकर रुंगटा परिवार ने राष्ट्रीय औद्योगिक जगत में बनाई बड़ी पहचान, खनन से लेकर स्टील उत्पादन तक फैला कारोबार
Jharkhand News : चाईबासा के रुंगटा परिवार ने कारोबारी दुनिया में नया मुकाम हासिल किया है। रुंगटा माइंस लिमिटेड के नंदलाल रुंगटा और मुकुंद रुंगटा पहली बार फार्च्यून इंडिया की देश के शीर्ष 100 अमीरों की सूची में शामिल हुए हैं। करीब 40 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति के साथ दोनों को सूची में 61वां स्थान मिला है।
Jharkhand News : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले की खनिज संपदा से निकलकर राष्ट्रीय औद्योगिक पटल पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले रुंगटा परिवार ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चाईबासा के रहने वाले नंदलाल रुंगटा और मुकुंद रुंगटा पहली बार देश के शीर्ष 100 अमीरों की सूची में शामिल हुए हैं। फार्च्यून इंडिया की प्रतिष्ठित सूची में दोनों भाइयों को करीब 40 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित कुल संपत्ति के साथ 61वें पायदान पर जगह मिली है।
यह उपलब्धि सिर्फ रुंगटा परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि झारखंड के कारोबारी इतिहास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय से लौह अयस्क, खनन और स्टील कारोबार में सक्रिय रुंगटा परिवार ने क्षेत्रीय कारोबारी पहचान से निकलकर अब देश के सबसे बड़े धनकुबेरों के क्लब में अपनी जगह बनाई है।
फार्च्यून इंडिया की अमीरों की सूची में देश के कई बड़े उद्योगपति शामिल हैं। सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी पहले स्थान पर हैं, जबकि अडाणी समूह के गौतम अदाणी दूसरे पायदान पर हैं। इनके अलावा शिव नादर, सावित्री जिंदल और शापूर मिस्त्री जैसे बड़े कारोबारी भी शीर्ष पांच में शामिल हैं।
इसी सूची में चाईबासा के नंदलाल और मुकुंद रुंगटा ने 61वां स्थान हासिल किया है। दोनों की कुल अनुमानित संपत्ति लगभग 40 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। इस उपलब्धि के साथ रुंगटा परिवार देश के उन चुनिंदा कारोबारी घरानों में शामिल हो गया है, जिनका कारोबार प्राकृतिक संसाधनों और स्टील उद्योग से जुड़ा है।
वहीं, जुबिलेंट समूह के श्याम और हरि भरतिया ने भी अपनी संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करते हुए सूची में 67वां स्थान हासिल किया है।
खनन और प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में रुंगटा माइंस की सीधी प्रतिस्पर्धा बड़े कारोबारी समूहों से होती रही है। इनमें वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल प्रमुख नाम हैं।
अनिल अग्रवाल की संपत्ति रुंगटा बंधुओं से अधिक बताई गई है और वह करीब 59,244 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सूची में आगे हैं। हालांकि, कारोबार के स्तर पर खनिज संपदा से जुड़े राज्यों में रुंगटा माइंस और वेदांता के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती रही है।
विशेषकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे खनिज बहुल राज्यों में लौह अयस्क खदानों की नीलामी के दौरान दोनों कंपनियों के बीच कड़ी कारोबारी टक्कर चर्चा में रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रुंगटा समूह ने खनन क्षेत्र में कितनी मजबूत स्थिति बनाई है।
रुंगटा परिवार के कारोबारी सफर की शुरुआत करीब छह दशक पहले हुई थी। वर्ष 1962 में एसआर रुंगटा ने इस कारोबारी साम्राज्य की नींव रखी थी। शुरुआती दौर में समूह का कारोबार मुख्य रूप से लौह अयस्क और मैगनीज खनन तक सीमित था।
समय के साथ कारोबार का विस्तार हुआ और परिवार की अगली पीढ़ी ने इसकी कमान संभाली। नंदलाल रुंगटा और मुकुंद रुंगटा ने कारोबार को आगे बढ़ाते हुए खनन क्षेत्र में समूह की स्थिति मजबूत की। इसके बाद सिद्धार्थ रुंगटा के जुड़ने से समूह के कारोबार को स्टील क्षेत्र में भी विस्तार मिला।
यही विस्तार आगे चलकर रुंगटा परिवार को केवल माइनिंग कंपनी के रूप में नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड स्टील कारोबारी समूह के रूप में स्थापित करने में अहम साबित हुआ।
रुंगटा समूह की खासियत यह रही कि उसने सिर्फ खनिजों के उत्खनन तक अपने कारोबार को सीमित नहीं रखा। समूह ने खदानों से निकलने वाले लौह अयस्क को आगे प्रोसेस कर स्टील उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया।
आज रुंगटा समूह झारखंड और ओडिशा में औद्योगिक संयंत्रों के जरिए पेलेट्स, स्पंज आयरन और टीएमटी बार जैसे उत्पादों के निर्माण से भी जुड़ा है। झारखंड के चिलियामा और ओडिशा के कमांडा में समूह की औद्योगिक गतिविधियां इसके विस्तारित कारोबारी मॉडल को दर्शाती हैं।
इस तरह रुंगटा परिवार ने खनन से लेकर स्टील उत्पादन तक पूरी वैल्यू चेन में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। यही वजह है कि आज रुंगटा नाम केवल पश्चिमी सिंहभूम या झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के बड़े कारोबारी घरानों के बीच इसकी पहचान बन चुकी है।
झारखंड लंबे समय से कोयला, लौह अयस्क, मैगनीज और अन्य खनिज संसाधनों के लिए जाना जाता है। राज्य की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास में खनन क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में चाईबासा जैसे क्षेत्र से निकलकर किसी कारोबारी परिवार का देश के शीर्ष 100 अमीरों की सूची में पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
रुंगटा बंधुओं का 61वें स्थान पर पहुंचना यह भी दिखाता है कि झारखंड की खनिज संपदा से जुड़े पारंपरिक कारोबार ने किस तरह समय के साथ आधुनिक औद्योगिक स्वरूप लिया है।
एक समय लौह अयस्क और मैगनीज खनन से शुरू हुआ रुंगटा परिवार का सफर अब स्टील उत्पादन और बड़े औद्योगिक कारोबार तक पहुंच चुका है। करीब 40 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति और देश के टॉप-100 अमीरों में स्थान ने इस परिवार की कारोबारी यात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया है।
रुंगटा परिवार की उपलब्धि क्यों है खास?
- चाईबासा के कारोबारी परिवार की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मजबूत हुई।
- नंदलाल और मुकुंद रुंगटा पहली बार टॉप-100 अमीरों की सूची में शामिल हुए।
- करीब 40 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति के साथ 61वां स्थान।
- खनन के साथ पेलेट्स, स्पंज आयरन और टीएमटी बार के कारोबार में विस्तार।
- झारखंड और ओडिशा में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार।
- बड़े खनन समूहों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा।
चाईबासा की लाल मिट्टी से शुरू हुआ रुंगटा परिवार का सफर अब देश के बड़े औद्योगिक और कारोबारी घरानों की सूची में दर्ज हो चुका है। खनन से स्टील तक के इस सफर ने न केवल परिवार को नई ऊंचाई दी है, बल्कि झारखंड के औद्योगिक इतिहास में भी एक नया अध्याय जोड़ दिया है।














