Jharkhand News : सीआईडी ने देवघर के बैजनाथपुर बंधा इलाके से सुधाकर यादव को पकड़ा; ठिकाने से परीक्षार्थियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र और बैंक चेक बरामद, बैंक खातों और व्हाट्सऐप चैट की भी हो रही जांच
Jharkhand News : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सीजीएल परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक और गड़बड़ी के मामले की जांच तेज हो गई है। सीआईडी ने देवघर से बिहार के बांका निवासी सुधाकर यादव को पकड़ा है। उसके ठिकाने से कई परीक्षार्थियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र और बैंक चेक मिलने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी कथित तौर पर करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने की सेटिंग और वित्तीय लेनदेन के एंगल की जांच कर रही है।
झारखंड में JSSC CGL परीक्षा पेपर लीक और गड़बड़ी मामले की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में सीआईडी की टीम ने देवघर से एक संदिग्ध को पकड़ा है। पकड़े गए व्यक्ति की पहचान सुधाकर यादव के रूप में हुई है, जो बिहार के बांका जिले के जयपुर थाना क्षेत्र का मूल निवासी बताया जा रहा है।
सीआईडी की टीम सुधाकर यादव को देवघर से रांची लेकर आई है, जहां उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ के जरिए परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
अभ्यर्थियों की निशानदेही पर कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, इससे पहले पूछताछ के लिए बुलाए गए कुछ अभ्यर्थियों से मिली जानकारी और उनकी निशानदेही के आधार पर सीआईडी ने सुधाकर यादव तक पहुंच बनाई। जांच टीम ने देवघर के बैजनाथपुर बंधा इलाके में स्थित एक मकान में कार्रवाई की, जहां से सुधाकर को पकड़ा गया।
जांच के दौरान उसके ठिकाने से कई परीक्षार्थियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र और बैंक चेक बरामद किए जाने की बात सामने आई है। इन दस्तावेजों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब सीआईडी इन प्रमाण पत्रों और चेक की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया था और किन अभ्यर्थियों से उनका संबंध है।
सीआईडी की प्रारंभिक पूछताछ में मामले को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, सुधाकर यादव ने कथित तौर पर करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने की सेटिंग से जुड़े होने की बात स्वीकार की है।
आरोप है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा में मदद पहुंचाने के लिए प्रश्नों और उनके उत्तरों को याद कराया गया। पूछताछ में पहले सामने आए कुछ अभ्यर्थियों ने भी सीआईडी को बताया था कि सुधाकर यादव ने परीक्षा से संबंधित उनकी मदद की थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, सुधाकर ने हजारीबाग में भी कई परीक्षार्थियों को कथित तौर पर प्रश्नपत्र के उत्तर याद कराने की बात स्वीकार की है। हालांकि, इन आरोपों की पूरी पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
पूछताछ में सुधाकर यादव के बारे में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि वह वर्ष 2018 से रांची स्थित सचिवालय में लिपिक के पद पर तैनात था।
सुधाकर ने पूछताछ के दौरान अधिकारियों को बताया कि बाद में उसका स्थानांतरण दुमका कर दिया गया था और वह वहीं रह रहा था। हालांकि, जांच एजेंसी को आशंका है कि सीआईडी की कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद वह देवघर में छिपकर रह रहा था।
गुप्त सूचना मिलने के बाद सीआईडी की टीम ने देवघर में कार्रवाई की और उसे अपने कब्जे में लेकर पूछताछ के लिए रांची लाई।
सुधाकर यादव के ठिकाने से कथित तौर पर बरामद शैक्षणिक प्रमाण पत्र और बैंक चेक अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। सीआईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये दस्तावेज किन अभ्यर्थियों के हैं और सुधाकर तक कैसे पहुंचे।
इसके साथ ही जांच एजेंसी संबंधित बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है। कथित पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले पैसों के लेनदेन की आशंका को देखते हुए वित्तीय गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच के बाद यदि पर्याप्त और ठोस साक्ष्य मिलते हैं, तभी सुधाकर यादव की औपचारिक गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मामले में सीआईडी केवल सुधाकर यादव तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी दो अन्य संदिग्धों से भी लगातार पूछताछ कर रही है। इनमें कोडरमा जिले के डोमचांच निवासी राजेश प्रसाद यादव और संदीप कुमार शामिल हैं।
दोनों से रविवार को दिनभर पूछताछ की गई। आरोप है कि दोनों संदिग्धों ने भी अभ्यर्थियों को परीक्षा में अनुचित लाभ पहुंचाने में भूमिका निभाई हो सकती है।
अभ्यर्थियों से पूछताछ के दौरान ही इन दोनों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। सीआईडी ने दोनों संदिग्धों को सोमवार को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया है।
सीआईडी अब इस पूरे मामले के डिजिटल और वित्तीय पहलुओं को भी खंगाल रही है। जांच एजेंसी द्वारा संदिग्धों के बैंक खातों, व्हाट्सऐप चैट और अभ्यर्थियों के साथ संपर्क से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।
जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित परीक्षा गड़बड़ी में केवल कुछ लोग शामिल थे या इसके पीछे एक बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
इसके अलावा एजेंसी यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों तक प्रश्न और उत्तर कैसे पहुंचे, किस स्तर पर उनकी मदद की गई और इस पूरी प्रक्रिया में पैसों का लेनदेन हुआ या नहीं।
JSSC CGL पेपर लीक मामले में देवघर से सुधाकर यादव के पकड़े जाने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों को कथित तौर पर परीक्षा पास कराने की सेटिंग का आरोप सामने आने से अब सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुधाकर यादव और अन्य संदिग्ध ही इस पूरे मामले की कड़ी हैं या इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था?
फिलहाल सीआईडी दस्तावेजों, बैंक खातों, डिजिटल चैट और अभ्यर्थियों से मिली जानकारी को जोड़कर पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट करने में जुटी है। आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच के आधार पर इस मामले में और भी नाम सामने आने की संभावना है।
हालांकि, किसी भी व्यक्ति की भूमिका या अपराध में संलिप्तता को अंतिम रूप से तभी माना जा सकता है, जब जांच में उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य सामने आएं और कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोप साबित हों।

















