Jamshedpur News : डॉ. सक्षम सिंह और डॉ. समीर लाल की डूबने से हुई मौत के बाद परिवारों ने कई सवाल उठाए, कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन, एफएसएल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की गहन जांच कराने की अपील।
Jamshedpur News : जमशेदपुर के डिमना लेक में दो युवा डॉक्टरों की डूबकर मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। परिजनों ने घटना को संदिग्ध बताते हुए पुलिस से कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन, एफएसएल रिपोर्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
झारखंड के जमशेदपुर स्थित बोड़ाम थाना क्षेत्र के डिमना लेक में दो युवा डॉक्टरों की डूबने से हुई मौत का मामला अब लगातार चर्चा का विषय बनता जा रहा है। शुरुआत में इसे एक दर्दनाक हादसा माना जा रहा था, लेकिन अब मृतकों के परिजनों ने इस घटना को केवल दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि घटना से जुड़े कई ऐसे पहलू हैं, जिनकी गहराई से जांच होना बेहद जरूरी है, ताकि दोनों डॉक्टरों की मौत की वास्तविक परिस्थितियों का खुलासा हो सके।
मृतक डॉक्टरों की पहचान डॉ. सक्षम सिंह और डॉ. समीर लाल के रूप में हुई है। दोनों एमजीएम मेडिकल कॉलेज से जुड़े युवा चिकित्सक थे। इस घटना ने न केवल मेडिकल समुदाय बल्कि पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया है।
परिजनों ने बोड़ाम थाना में दिया आवेदन
मृतक डॉ. सक्षम सिंह के पिता सत्येंद्र कुमार सिंह ने बोड़ाम थाना में लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। वहीं, डॉ. समीर लाल के पिता अजय लाल ने भी घटना को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
परिजनों का कहना है कि पुलिस को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की बारीकी से जांच करनी चाहिए। उनका उद्देश्य किसी पर बिना आधार के आरोप लगाना नहीं है, बल्कि सच्चाई सामने लाना है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर उस रात डिमना लेक पर वास्तव में क्या हुआ था।
तीन लोग साथ थे, लेकिन केवल दो की मौत क्यों हुई?
घटना का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस समय यह हादसा हुआ, उस दौरान तीन डॉक्टर साथ मौजूद थे, लेकिन डूबने से केवल दो की मौत हुई जबकि तीसरा डॉक्टर सुरक्षित बाहर निकल आया।
परिजनों के अनुसार, यह पहलू पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है और इसकी विस्तार से जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि तीसरे साथी डॉ. यश के बयान, घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का मिलान कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।
24 जुलाई की सुबह मिली थी घटना की सूचना
आवेदन में बताया गया है कि 24 जुलाई की सुबह परिवार को डॉ. सचिन का फोन आया, जिसमें सूचना दी गई कि डॉ. सक्षम सिंह और डॉ. समीर लाल डिमना लेक में लापता हो गए हैं।
यह सूचना मिलते ही परिवार पलामू से तत्काल जमशेदपुर के लिए रवाना हुआ। एमजीएम अस्पताल पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि डॉ. सक्षम सिंह की मौत हो चुकी है। इसके बाद पूरे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई।
घटना वाली रात क्या हुआ था?
परिजनों के अनुसार, घटना वाली रात डॉ. सक्षम सिंह, डॉ. समीर लाल और डॉ. यश एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित हॉस्टल से एक कार में सवार होकर डिमना लेक पहुंचे थे।
बताया गया कि तीनों रेडियल गेट के समीप पहुंचे थे। इसी दौरान पहले डॉ. सक्षम सिंह पानी में उतरे और अचानक गहराई में चले गए। उन्हें बचाने के लिए डॉ. समीर लाल भी पानी में कूदे, लेकिन वह भी बाहर नहीं निकल सके।
डॉ. यश के अनुसार, उन्होंने दोनों को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद वह बाहर आए और अपने मोबाइल फोन से डॉ. सचिन को घटना की सूचना दी।
हालांकि, परिजनों का कहना है कि इस पूरी कहानी की स्वतंत्र रूप से जांच होना आवश्यक है।
सड़क हादसे के बाद हाथ पूरी तरह ठीक नहीं था
डॉ. सक्षम सिंह के पिता ने अपने आवेदन में एक और महत्वपूर्ण बात का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उनके बेटे का एक गंभीर सड़क हादसा हुआ था, जिसमें उसके एक हाथ की क्षमता पहले जैसी नहीं रह गई थी।
ऐसी स्थिति में उनका सवाल है कि यदि वह पूरी तरह शारीरिक रूप से सक्षम नहीं थे, तो आखिर वह स्वेच्छा से गहरे पानी में क्यों उतरते? यही कारण है कि परिवार इस पूरी घटना को लेकर संदेह जता रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
तकनीकी और वैज्ञानिक जांच की मांग
परिजनों ने पुलिस से आग्रह किया है कि मामले की जांच केवल मौखिक बयान के आधार पर समाप्त न की जाए। उन्होंने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच कराने की मांग की है।
इनमें शामिल हैं—
- कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)
- मोबाइल लोकेशन
- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य
- घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्य
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट
- विसरा रिपोर्ट
- फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) जांच
- यदि उपलब्ध हो तो सीसीटीवी फुटेज
- घटनास्थल का वैज्ञानिक निरीक्षण
परिवार का मानना है कि आधुनिक तकनीकी जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना वास्तव में दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण मौजूद था।
लापरवाही या आपराधिक भूमिका सामने आए तो हो कार्रवाई
परिजनों ने अपने आवेदन में स्पष्ट कहा है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को बेवजह कठघरे में खड़ा करना नहीं है। यदि जांच के दौरान किसी की लापरवाही, भूमिका या किसी प्रकार की आपराधिक संलिप्तता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने पुलिस प्रशासन पर भरोसा जताते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच से ही दोनों परिवारों को न्याय मिल सकेगा और घटना की वास्तविकता सामने आएगी।
मेडिकल समुदाय में भी शोक और चिंता
दो युवा डॉक्टरों की एक साथ मौत ने मेडिकल समुदाय को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। साथियों और परिचितों के बीच इस घटना को लेकर कई चर्चाएं हो रही हैं। चिकित्सकों का मानना है कि यदि किसी घटना को लेकर परिजनों के मन में संदेह है, तो सभी पहलुओं की पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे।
पुलिस जांच पर टिकी सबकी निगाहें
अब पूरे मामले में सभी की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। यदि परिजनों की मांग के अनुरूप तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जाती है, तो घटना के कई अनसुलझे सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।
फिलहाल यह मामला केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने लाने की मांग का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेंगे।
















