Jamshedpur News : पटमदा पत्थर खदान विवाद: ओड़िया पंचायत के ग्रामीणों का उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन, अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग

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Jamshedpur News : पूर्वी सिंहभूम के पटमदा प्रखंड में ग्रामीणों ने पत्थर खदान पर अवैध खनन, पर्यावरण प्रदूषण और जनसुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोप लगाते हुए उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा, निष्पक्ष जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग।

Jamshedpur News : जमशेदपुर के पटमदा प्रखंड स्थित ओड़िया पंचायत के ग्रामीणों ने पत्थर खदान के खिलाफ उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने अवैध खनन, प्रदूषण, विस्फोट, पर्यावरण नुकसान और जनसुरक्षा को लेकर खनन कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड अंतर्गत ओड़िया पंचायत के ग्रामीणों ने क्षेत्र में संचालित पत्थर खदान के विरोध में सोमवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि वर्षों से स्वीकृत सीमा से कहीं अधिक क्षेत्र में अवैध रूप से पत्थर खनन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण, कृषि, जलस्रोत और स्थानीय लोगों के जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और ग्रामीण शामिल हुए। सभी ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर खनन कार्य पर रोक लगाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि पटमदा प्रखंड के ओड़िया मौजा में स्थित पत्थर खदान के संचालन के कारण आसपास के गांवों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खाता संख्या 624 के प्लॉट संख्या 4546 (लगभग 10 एकड़) तथा प्लॉट संख्या 988 (लगभग 8 एकड़) की स्वीकृत भूमि से कई गुना अधिक क्षेत्र में पिछले करीब 20 वर्षों से लगातार पत्थर खनन किया जा रहा है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

स्वीकृत क्षेत्र से अधिक खनन का आरोप

ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि खदान संचालकों द्वारा स्वीकृत सीमा का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि निर्धारित भूमि से कहीं अधिक क्षेत्र में लगातार खनन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन मौके पर सर्वे कराए तो अवैध खनन की वास्तविक तस्वीर सामने आ जाएगी।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खनन पट्टा, स्वीकृत क्षेत्र, पर्यावरणीय अनुमति और वर्तमान में किए जा रहे खनन की सीमा की विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

विद्यालय, घर और धार्मिक स्थल के पास चल रहा खनन

ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि पत्थर खदान के बेहद करीब विद्यालय, ग्रामीणों के आवासीय मकान और धार्मिक स्थल गराम थान स्थित हैं। इसके बावजूद भारी मशीनों और विस्फोटकों के माध्यम से लगातार खनन कार्य किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि खदान में होने वाले विस्फोटों से जमीन में कंपन महसूस होता है। इससे आसपास के मकानों में दरार पड़ने की आशंका बनी रहती है। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है और धार्मिक गतिविधियों में भी व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।

11 हजार वोल्ट बिजली लाइन के कारण हादसे का खतरा

ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान इस ओर भी आकर्षित कराया कि लायाडीह गांव के बीच से 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन गुजरती है। उनका कहना है कि लगातार हो रहे विस्फोट और भारी मशीनों के संचालन के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो जनहानि होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले का तकनीकी निरीक्षण कराने की भी मांग की है।

ग्रामसभा की सहमति के बिना खनन का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पत्थर खदान का संचालन बिना ग्रामसभा की सहमति के किया जा रहा है। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों की राय लिए बिना वर्षों से खनन गतिविधियां जारी हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर लोगों ने कई बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब मजबूर होकर उन्हें जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शन करना पड़ा।

धूल, प्रदूषण और विस्फोट से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याएं

ग्रामीणों ने बताया कि पत्थर खदान में होने वाले विस्फोटों और लगातार उड़ने वाली धूल के कारण क्षेत्र में वायु प्रदूषण बढ़ गया है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है।

उनका कहना है कि लोगों को सांस संबंधी समस्याएं, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा लगातार होने वाले धमाकों से लोगों में भय का माहौल बना रहता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से पर्यावरणीय मानकों की जांच कराने और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग भी की है।

खेती और जलस्रोत भी हो रहे प्रभावित

ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनन गतिविधियों का असर खेती योग्य भूमि और पेयजल स्रोतों पर भी पड़ रहा है। धूल के कारण खेतों की उत्पादकता प्रभावित हो रही है, जबकि लगातार हो रहे खनन से प्राकृतिक पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह खनन जारी रहा तो भविष्य में खेती और जल संकट जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से लिया खनन बंद कराने का निर्णय

ग्रामीणों के अनुसार लायाडीह, चिरूडीह, ओड़िया सहित पूरे ओड़िया पंचायत के लोगों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि क्षेत्र में पत्थर खदान और खनन कार्य को तत्काल बंद कराया जाए।

उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने उपायुक्त से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, खनन की स्वीकृति की समीक्षा करने तथा आवश्यक होने पर खनन कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने अवैध खनन के आरोपों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि ज्ञापन की प्रतिलिपि जिला खनन पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी तथा अंचल अधिकारी, पटमदा को भी भेजी गई है ताकि सभी संबंधित विभाग इस मामले में आवश्यक कार्रवाई कर सकें।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी ग्रामीणों की नजर

अब पूरे मामले में जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजर बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन आगे भी जारी रखेंगे।

फिलहाल यह मामला पर्यावरण संरक्षण, जनसुरक्षा, ग्रामीणों के अधिकार और खनन गतिविधियों की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को एक बार फिर सामने लेकर आया है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन जांच के बाद क्या निर्णय लेता है और ग्रामीणों की मांगों पर किस प्रकार की कार्रवाई की जाती है।

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