Jamshedpur News : घर-घर जांच, दवा वितरण, फॉगिंग और आईआरएस अभियान का दिखा असर, जुलाई मध्य के बाद नहीं हुई कोई नई मौत; स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
Jamshedpur News : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के विशेष अभियान, घर-घर जांच, फॉगिंग, आईआरएस छिड़काव और समय पर इलाज से स्थिति अब नियंत्रण में है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Jamshedpur News : पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में कुछ सप्ताह पहले तक लोगों के लिए चिंता का विषय बना ब्रेन मलेरिया अब धीरे-धीरे नियंत्रण में आता दिखाई दे रहा है। स्वास्थ्य विभाग की लगातार निगरानी, घर-घर जांच अभियान, समय पर इलाज और व्यापक जागरूकता कार्यक्रमों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। अब क्षेत्र में ब्रेन मलेरिया के नए मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिस बीमारी ने जून के अंतिम सप्ताह में पूरे प्रखंड को हिला कर रख दिया था, वह अब नियंत्रित होती दिखाई दे रही है। लगातार चलाए गए विशेष अभियान और प्रशासन की सक्रियता के कारण संक्रमण की रफ्तार काफी धीमी हो गई है।
पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी सुकांतो सीट ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रखंड में ब्रेन मलेरिया के मरीजों की संख्या में अब काफी कमी आई है। उन्होंने कहा कि यह सफलता स्वास्थ्य विभाग, डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी सिंहभूम के सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के नेतृत्व और लगातार निगरानी की सराहना करते हुए कहा कि उनके निर्देश पर पूरे क्षेत्र में सघन अभियान चलाया गया। स्वास्थ्य टीमों ने गांव-गांव जाकर लोगों की जांच की, जरूरतमंद मरीजों को तुरंत दवाएं उपलब्ध कराईं और संदिग्ध मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया।
सुकांतो सीट के अनुसार, पहले जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में नए मरीज सामने आ रहे थे, वहीं अब नए मामलों की संख्या काफी कम हो गई है। साथ ही गंभीर मरीजों की संख्या में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है, जो राहत देने वाला संकेत है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए गए अभियान के तहत गांवों में विशेष चिकित्सा शिविर लगाए गए। स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रत्येक घर तक पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य जांच की और बुखार से पीड़ित व्यक्तियों का तत्काल परीक्षण कराया।
इसके साथ ही मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर फॉगिंग कराई गई। प्रभावित इलाकों में आईआरएस (Indoor Residual Spray) का छिड़काव भी किया गया, जिससे मच्छरों की संख्या कम करने में मदद मिली।
इसके अलावा लोगों को मच्छरदानी का उपयोग करने, घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देने, साफ-सफाई बनाए रखने तथा बुखार होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह भी दी गई।
गौरतलब है कि जून के अंतिम सप्ताह में पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया का संक्रमण तेजी से फैल गया था। कुछ ही दिनों में कई बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ गए थे और कई बच्चों की मौत की खबरों ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि पोटका को जिले का सबसे संवेदनशील हॉटस्पॉट माना जाने लगा। लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी।
इसके बाद प्रशासन ने तत्काल युद्ध स्तर पर कार्रवाई शुरू की। स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमों को प्रभावित गांवों में भेजा गया और लगातार निगरानी की व्यवस्था की गई।
ब्रेन मलेरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमों को भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया। इन टीमों ने हजारों ग्रामीणों की जांच की, जरूरतमंद मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराईं और गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की।
चिकित्सकों ने गांवों में जाकर लोगों को यह भी समझाया कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर जांच और उपचार से इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को यह संदेश भी दिया कि बुखार, तेज सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी या दौरे जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जुलाई के मध्य से अब तक ब्रेन मलेरिया से किसी नई मौत की सूचना नहीं मिली है। यह स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
रोजाना सामने आने वाले मामलों में भी लगातार गिरावट दर्ज की गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अब अधिकांश मरीज शुरुआती चरण में ही जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंच रहे हैं, जिससे समय पर इलाज संभव हो पा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बीमारी पर नियंत्रण पाने में लोगों की बढ़ती जागरूकता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पहले जहां कई लोग बुखार होने के बावजूद अस्पताल जाने से बचते थे, वहीं अब ग्रामीण स्वयं जांच शिविरों में पहुंच रहे हैं और स्वास्थ्य कर्मियों के निर्देशों का पालन कर रहे हैं।
गांवों में लगातार चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों के कारण लोगों को मच्छरों से बचाव, साफ-सफाई और समय पर इलाज के महत्व की बेहतर जानकारी मिली है।
हालांकि ब्रेन मलेरिया के मामलों में कमी आई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अभी भी पूरी सतर्कता बरतने की अपील की है।
अधिकारियों का कहना है कि बरसात के मौसम में मच्छरों का प्रजनन तेजी से होता है। ऐसे में घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने दें, रात में मच्छरदानी का उपयोग करें, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें और बुखार आने पर बिना देर किए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निगरानी अभियान अभी जारी रहेगा ताकि संक्रमण दोबारा फैलने की संभावना को रोका जा सके।
पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया के मामलों में आई गिरावट स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, चिकित्सा टीमों और स्थानीय लोगों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है। जून के अंत में जिस बीमारी ने पूरे क्षेत्र को चिंता में डाल दिया था, उसी पर अब काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है। यदि यही सतर्कता और जागरूकता आगे भी बनी रही तो आने वाले दिनों में पोटका पूरी तरह ब्रेन मलेरिया मुक्त क्षेत्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकता है।

















