Jamshedpur News : जमशेदपुर में बड़ा खुलासा: पोटका बीडीओ की सरकारी टाटा सूमो 9 साल से बिना रजिस्ट्रेशन नंबर दौड़ रही सड़कों पर, जांच के आदेश

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Jamshedpur News : जिला परिवहन पदाधिकारी ने नोटिस और पेनल्टी की बात कही, भाजपा और आजसू ने उठाए गंभीर सवाल; वर्षों से बिना नंबर वाहन में ईंधन भरने की भी जांच की मांग।

Jamshedpur News : जमशेदपुर के पोटका प्रखंड के बीडीओ की सरकारी टाटा सूमो पिछले 9 वर्षों से बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के संचालित होने का मामला सामने आया है। जिला परिवहन पदाधिकारी ने जांच और कार्रवाई के आदेश दिए हैं, जबकि भाजपा और आजसू ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Jamshedpur News : पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड से सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, पोटका प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) की सरकारी टाटा सूमो पिछले लगभग 9 वर्षों से बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के सड़कों पर चल रही है। मामला सामने आने के बाद जिला परिवहन विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है और जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं विपक्षी दलों भाजपा और आजसू ने इस पूरे प्रकरण को प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

सरकारी वाहनों पर नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी स्वयं प्रशासन की होती है। ऐसे में यदि कोई सरकारी वाहन लंबे समय तक बिना वैध रजिस्ट्रेशन नंबर के संचालित होता रहा हो तो यह केवल नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

जिला परिवहन पदाधिकारी ने कहा- हर वाहन पर नंबर होना अनिवार्य

मामले को लेकर जिला परिवहन पदाधिकारी दिलीप कुमार ने स्पष्ट कहा कि भारत में सड़क पर चलने वाले प्रत्येक वाहन का पंजीकृत होना और उस पर रजिस्ट्रेशन नंबर प्रदर्शित करना अनिवार्य है। यदि किसी सरकारी वाहन में भी नंबर नहीं है तो यह नियमों का सीधा उल्लंघन है।

उन्होंने कहा कि यदि पोटका बीडीओ के सरकारी वाहन में रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं पाया गया है तो संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही नियमानुसार पेनल्टी लगाते हुए वाहन का विधिवत रजिस्ट्रेशन कराने की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।

परिवहन विभाग का कहना है कि जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि वाहन का पंजीकरण क्यों नहीं कराया गया और इतने लंबे समय तक यह वाहन किस परिस्थिति में सरकारी कार्यों के लिए उपयोग किया जाता रहा।

9 वर्षों तक बिना नंबर वाहन कैसे चलता रहा?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सरकारी वाहन वास्तव में नौ वर्षों से बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के संचालित हो रहा था, तो इस दौरान किसी भी स्तर पर इसकी जांच क्यों नहीं हुई।

सरकारी वाहनों की नियमित जांच, फिटनेस, बीमा और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन समय-समय पर किया जाता है। ऐसे में इतने लंबे समय तक इस वाहन का बिना नंबर के संचालन प्रशासनिक व्यवस्था पर कई प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो केवल वाहन चालक या संबंधित कार्यालय ही नहीं, बल्कि निगरानी करने वाले विभागों की भूमिका की भी समीक्षा आवश्यक होगी।

भाजपा ने उठाए गंभीर सवाल

प्रदेश भाजपा प्रवक्ता अभय सिंह ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि कानून सभी नागरिकों और सरकारी अधिकारियों पर समान रूप से लागू होता है। यदि कोई आम नागरिक बिना नंबर की गाड़ी चलाता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होती है। ऐसे में सरकारी वाहन के मामले में भी समान नियम लागू होने चाहिए।

उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग करते हुए कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर इतने वर्षों तक बिना नंबर वाले वाहन का संचालन कैसे होता रहा।

अभय सिंह ने विशेष रूप से इस बात पर भी सवाल उठाया कि सरकारी वाहन में वर्षों तक ईंधन किस प्रक्रिया के तहत डाला जाता रहा। उन्होंने कहा कि इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि वाहन के लिए ईंधन किस मद से जारी किया गया और संबंधित अभिलेखों में उसका उल्लेख किस प्रकार किया गया।

भाजपा का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

आजसू ने भी कार्रवाई की मांग की

आजसू पार्टी के जिला अध्यक्ष कन्हैया सिंह ने भी इस पूरे मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया है।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि केवल वाहन के रजिस्ट्रेशन की जांच ही नहीं, बल्कि पिछले कई वर्षों के दौरान वाहन में डाले गए ईंधन का पूरा रिकॉर्ड भी खंगाला जाए।

कन्हैया सिंह ने कहा कि यदि वाहन बिना नंबर के संचालित हो रहा था तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सरकारी खर्च से ईंधन किस आधार पर उपलब्ध कराया गया और संबंधित विभागों ने इसकी जांच क्यों नहीं की।

सरकारी व्यवस्था और पारदर्शिता पर उठे सवाल

यह मामला केवल एक वाहन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी विभागों में वाहनों के पंजीकरण, बीमा, फिटनेस और उपयोग की नियमित निगरानी बेहद आवश्यक है।

यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि सरकारी वाहन लंबे समय तक बिना वैध रजिस्ट्रेशन के संचालित होता रहा, तो इससे विभागीय निगरानी प्रणाली की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठेंगे।

साथ ही यह भी अपेक्षा की जा रही है कि जांच के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

परिवहन नियम क्या कहते हैं?

मोटर वाहन नियमों के अनुसार सड़क पर चलने वाले प्रत्येक वाहन का वैध रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है। वाहन पर निर्धारित प्रारूप में रजिस्ट्रेशन नंबर प्रदर्शित करना भी अनिवार्य है। बिना वैध पंजीकरण या नंबर प्लेट के वाहन का सार्वजनिक सड़क पर संचालन नियमों का उल्लंघन माना जाता है और ऐसी स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई, जुर्माना तथा अन्य कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल जिला परिवहन विभाग ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करता है।

यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि सरकारी वाहन वर्षों तक बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के संचालित होता रहा, तो यह मामला केवल परिवहन नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी संसाधनों के उपयोग की पारदर्शिता से भी जुड़ जाएगा।

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