Jamshedpur News : जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लिफ्ट व्यवस्था ठप होने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, गंभीर मरीजों को गोद और सीढ़ियों के सहारे वार्ड तक पहुंचाना पड़ा।
Jamshedpur News : जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 16 में से 14 लिफ्ट खराब होने से मरीजों, परिजनों और अस्पताल कर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सात मंजिला अस्पताल में केवल एक लिफ्ट के सहारे स्वास्थ्य सेवाएं संचालित होती रहीं। पढ़ें पूरी खबर।
Jamshedpur News : शहर के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार को लिफ्ट व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। अस्पताल की कुल 16 लिफ्टों में से 14 लिफ्ट खराब हो जाने के कारण मरीजों, उनके परिजनों, डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सात मंजिला अस्पताल में केवल एक लिफ्ट के सहारे पूरे अस्पताल की आवाजाही संचालित होने से दिनभर अफरा-तफरी और हंगामे जैसी स्थिति बनी रही।
अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों का कहना था कि पहले से ही बीमारी और इलाज की चिंता के बीच लिफ्ट बंद होने से उनकी परेशानी कई गुना बढ़ गई। एक ही लिफ्ट के सामने लंबी-लंबी कतारें लग गईं, जिससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कई बार भीड़ इतनी अधिक हो गई कि लोगों के बीच धक्का-मुक्की और बहस की नौबत भी आ गई।
गंभीर मरीजों को गोद में उठाकर पहुंचाना पड़ा वार्ड
लिफ्ट बंद होने का सबसे अधिक असर उन मरीजों पर पड़ा जो चलने-फिरने में असमर्थ थे। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीज, दिव्यांग और गंभीर रूप से बीमार लोगों को परिजनों ने गोद में उठाकर या सहारा देकर सीढ़ियों के माध्यम से वार्ड तक पहुंचाया।
कई स्थानों पर परिजन मरीजों को गोद में लेकर एक-एक मंजिल चढ़ते दिखाई दिए। बीच-बीच में उन्हें रुककर आराम करना पड़ा। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर का उपयोग भी सीमित हो गया क्योंकि उन्हें सीढ़ियों से ऊपर ले जाना बेहद कठिन साबित हुआ।
भर्ती मरीजों ने जताई नाराजगी
अस्पताल में भर्ती मरीज राहुल सिंह ने बताया कि कई मरीज ऐसे हैं जो स्वयं खड़े होने की स्थिति में भी नहीं हैं। ऐसे मरीजों को गोद में उठाकर सीढ़ियों से ऊपर-नीचे ले जाना बेहद मुश्किल और जोखिम भरा है। उन्होंने कहा कि अस्पताल जैसी जगह पर लिफ्ट कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक व्यवस्था होती है।
अन्य मरीजों और उनके परिजनों ने भी अस्पताल प्रशासन से जल्द से जल्द सभी लिफ्टों की मरम्मत कराने की मांग की। उनका कहना था कि यदि भविष्य में किसी गंभीर मरीज को समय पर इलाज या आईसीयू तक पहुंचाने में देरी हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है।
डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों का काम भी हुआ प्रभावित
लिफ्ट खराब होने का असर केवल मरीजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अस्पताल की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हुई। डॉक्टरों और नर्सों को अलग-अलग मंजिलों पर पहुंचने में सामान्य से अधिक समय लगा। अस्पताल कर्मचारियों को दवाइयां, भोजन, मेडिकल उपकरण और अन्य जरूरी सामग्री वार्डों तक पहुंचाने में भी काफी कठिनाई हुई।
एक ही लिफ्ट के उपयोग के कारण कई बार डॉक्टरों और मरीजों को भी लंबा इंतजार करना पड़ा। इससे उपचार प्रक्रिया की गति भी प्रभावित हुई।
ऊपरी मंजिलों के वार्डों में सबसे अधिक परेशानी
एमजीएम अस्पताल सात मंजिला इमारत है, जहां मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, आईसीयू, प्रसूति एवं स्त्री रोग, शिशु रोग सहित कई महत्वपूर्ण विभाग ऊपरी मंजिलों पर संचालित होते हैं।
इन विभागों में भर्ती मरीजों के लिए लिफ्ट सबसे महत्वपूर्ण साधन है। लिफ्ट बंद रहने के कारण अस्पताल के अंदर मरीजों की आवाजाही बेहद कठिन हो गई। कई मरीजों को जांच के लिए एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक ले जाने में भी काफी समय लगा।
एक लिफ्ट पर उमड़ी भारी भीड़, हुआ हंगामा
अस्पताल में जब अधिकांश लोगों को यह जानकारी मिली कि केवल एक लिफ्ट ही चालू है, तो उसी लिफ्ट के सामने बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन जमा हो गए। लंबा इंतजार होने के कारण कई लोगों ने नाराजगी जताई और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ विरोध भी किया।
कुछ समय के लिए स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अस्पताल कर्मियों को लोगों को समझाकर व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास करना पड़ा। हालांकि किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया का इंतजार
एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने बताया कि खराब लिफ्टों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि लिफ्टों की मरम्मत विभागीय स्तर पर टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद कराई जाएगी।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया पूरी होते ही सभी खराब लिफ्टों को जल्द चालू कराया जाएगा, जिससे मरीजों, परिजनों और अस्पताल कर्मचारियों को राहत मिल सकेगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
सरकारी अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। एमजीएम जैसे बड़े अस्पताल में एक साथ 14 लिफ्टों का खराब होना अस्पताल के रखरखाव और तकनीकी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में लिफ्ट केवल परिवहन का साधन नहीं होती, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यदि समय पर रखरखाव और नियमित निरीक्षण किया जाए तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता है।
मरीजों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद
फिलहाल मरीजों और उनके परिजन अस्पताल प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद लगाए हुए हैं। लोगों का कहना है कि जब तक सभी लिफ्ट चालू नहीं होतीं, तब तक गंभीर मरीजों को होने वाली परेशानियां कम नहीं होंगी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य पूरा कराना चाहिए ताकि अस्पताल की सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो सकें।















