JPSC Protest 2026 : रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच हेमंत सरकार और छात्रों के बीच दूसरे दौर की अहम वार्ता शुरू हो गई है। स्टेट गेस्ट हाउस में 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सरकार के साथ भर्ती परीक्षाओं, नियुक्ति प्रक्रिया और छात्रों की मांगों पर चर्चा कर रहा है। जानिए आंदोलन के 14वें दिन क्या-क्या हुआ और आगे की रणनीति क्या है।
JPSC Protest 2026 : रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़े अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। भर्ती परीक्षाओं में देरी, नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और विभिन्न लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के बीच शनिवार (8 अगस्त 2026) को दूसरे दौर की महत्वपूर्ण वार्ता शुरू हो गई है। मोरहाबादी स्थित राजकीय अतिथिशाला (स्टेट गेस्ट हाउस) में आयोजित इस बैठक को आंदोलन के भविष्य के लिए निर्णायक माना जा रहा है।
सरकार के साथ बातचीत करने के लिए ‘JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच’ की ओर से आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच चुका है। आंदोलनरत छात्रों को उम्मीद है कि इस बैठक में उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाएगा और लंबे समय से लंबित भर्ती प्रक्रियाओं का समाधान निकल सकेगा।
वार्ता को देखते हुए स्टेट गेस्ट हाउस और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
छात्रों की ओर से सरकार के समक्ष अपनी बात रखने के लिए आठ प्रतिनिधियों को अधिकृत किया गया है। प्रतिनिधिमंडल में चंदन कुमार, रामा अवतार महतो, दिनबंधु मंडल, बिमल कुमार, पूजा कुमारी, प्रेम कुमार, रवि शंकर और अमित कुमार शर्मा शामिल हैं। यही प्रतिनिधिमंडल सरकार के सामने अभ्यर्थियों की मांगों और समस्याओं को विस्तार से रख रहा है।
पहले दौर की वार्ता में बनी थी सकारात्मक सहमति
इससे पहले शुक्रवार शाम को सरकार और छात्रों के बीच पहली बैठक हुई थी। दोनों पक्षों ने बातचीत को सकारात्मक बताया था। हालांकि छात्रों ने स्पष्ट किया था कि यह केवल शुरुआती चरण की वार्ता थी और अंतिम निर्णय आने तक आंदोलन जारी रहेगा।

पहले दौर की बातचीत में सरकार की ओर से मंत्री संजय प्रसाद यादव, दीपिका सिंह पांडेय, चमरा लिंडा, सुद्धिव कुमार तथा स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह शामिल हुए थे। बैठक में भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा कैलेंडर, परिणामों में हो रही देरी और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की गई।
छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार ने उनकी बात गंभीरता से सुनी है, लेकिन जब तक लिखित आश्वासन और ठोस निर्णय सामने नहीं आता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
आंदोलन के 14वें दिन भी जारी रहा विरोध
JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन शनिवार को 14वें दिन भी जारी रहा। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम सहित विभिन्न स्थानों पर छात्र लगातार धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं। कई छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे हुए हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में देरी, परिणामों की घोषणा में लंबा इंतजार, नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और अन्य प्रशासनिक समस्याओं के कारण हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। यही कारण है कि वे अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
10 अगस्त तक मांगें नहीं मानी गईं तो विधानसभा घेराव
छात्रों ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यदि 10 अगस्त तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यभर के अभ्यर्थी विधानसभा का घेराव करेंगे।
अभ्यर्थी न्याय मंच का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है, लेकिन यदि सरकार समय पर समाधान नहीं निकालती तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों के छात्रों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
AISA के विधानसभा मार्च के दौरान हुआ विवाद
इधर आंदोलन के बीच छात्र राजनीति भी गर्म हो गई है। वामपंथी छात्र संगठन AISA ने विधानसभा मार्च का आह्वान किया था। इसके तहत बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे।
इसी दौरान एक विवाद उस समय खड़ा हो गया जब एक छात्र ने AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंक दी। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि हमला करने वाला छात्र आरएसएस से जुड़ा हुआ है और यह घटना राजनीतिक साजिश के तहत कराई गई। वहीं इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
आंदोलन को मिला सामाजिक समर्थन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलनरत छात्रों को भोजन और पेयजल उपलब्ध कराने के लिए चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद जुनैद (जुनैद मलिक) भी रांची पहुंचे। उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों का समर्थन किया।
जुनैद ने अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र महतो से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
उनके इस समर्थन के बाद आंदोलन को सामाजिक संगठनों और आम लोगों का भी सहयोग मिलने लगा है।
आंदोलन पर तेज हुई राजनीतिक प्रतिक्रिया
JPSC-JSSC आंदोलन अब राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने छात्रों के समर्थन में बयान देना शुरू कर दिया है।
जयराम महतो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए घोषणा की कि वह 9 अगस्त को सुबह छह बजे से पुराने विधानसभा परिसर में छात्रों के समर्थन में एक दिवसीय निर्जला अनशन करेंगे।
वहीं गोड्डा से सांसद ने भी कहा है कि यदि 13 अगस्त तक, यानी संसद सत्र समाप्त होने तक, इस मामले में कोई समाधान नहीं निकलता है तो वह अपनी पार्टी से अनुमति लेकर आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में शामिल होंगे और स्वयं भी अनशन पर बैठेंगे।
सरकार और छात्रों के बीच वार्ता पर टिकी निगाहें
राज्यभर के लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों की निगाहें अब दूसरे दौर की इस वार्ता पर टिकी हुई हैं। छात्रों का मानना है कि यदि सरकार भर्ती परीक्षाओं के लिए स्पष्ट रोडमैप, समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर और नियुक्ति प्रक्रिया पर ठोस आश्वासन देती है तो आंदोलन समाप्त होने की संभावना बन सकती है।
दूसरी ओर यदि वार्ता किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचती है तो 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव के साथ आंदोलन और अधिक व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस वार्ता से कोई ठोस समाधान निकलता है या आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होता है।















