Ramgarh News : श्रीराम पावर एंड स्टील समेत औद्योगिक इकाइयों में हुए हादसों को लेकर पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने उठाए सवाल, रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
Ramgarh News : रामगढ़ जिले की औद्योगिक इकाइयों में हाल के दिनों में हुए हादसों और श्रमिक सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने विभिन्न औद्योगिक हादसों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग को लेकर 25 सितंबर 2026 को रामगढ़ उपायुक्त कार्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना देने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि 24 सितंबर तक संबंधित जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो वे पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के साथ उपायुक्त कार्यालय के प्रवेश द्वार की सीढ़ियों पर शांतिपूर्ण धरना देंगे। इस संबंध में हालिया रिपोर्टों में भी इसी कार्यक्रम और मांग का उल्लेख किया गया है।
Ramgarh News : पूर्व विधायक के अनुसार, रामगढ़ के कुजू स्थित श्रीराम पावर एंड स्टील प्लांट, सिरका स्थित झारखंड इस्पात और बरकाकाना स्थित मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात से जुड़े हादसों की प्रशासनिक जांच और उसकी प्रगति को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि इन घटनाओं में इंजीनियरों और श्रमिकों की जान गई तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।
शंकर चौधरी का कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से अलग-अलग मामलों की जांच के लिए समितियां गठित की गई थीं। लेकिन उनका आरोप है कि सभी निर्धारित बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। हालिया मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, श्रीराम पावर एंड स्टील प्लांट की जांच समिति ने अग्नि सुरक्षा से संबंधित बिंदु पर रिपोर्ट दी, जबकि अन्य बिंदुओं पर पूर्ण प्रतिवेदन नहीं दिया गया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी रामगढ़ उपायुक्त को पत्र लिखकर श्रीराम पावर एंड स्टील प्लांट में हुए फर्नेस ब्लास्ट की जांच को लेकर आपत्ति जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने समिति से सभी निर्धारित बिंदुओं पर दोबारा संपूर्ण जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की है। इनमें घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों की सिफारिश शामिल है।
शंकर चौधरी ने श्रीराम पावर एंड स्टील प्लांट से जुड़े प्रशासनिक आदेशों और उसके बाद के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कार्रवाई और बंदी के आदेश के बावजूद प्लांट का संचालन जारी रहा। उन्होंने औद्योगिक गतिविधियों के कारण होने वाले प्रदूषण और श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल उठाए हैं। इससे पहले 10 सितंबर को भी उन्होंने जिला मुख्यालय के सामने औद्योगिक दुर्घटनाओं और श्रमिक सुरक्षा के मुद्दे को लेकर धरना दिया था।
हालांकि, प्रशासन की ओर से पूर्व के धरने के दौरान कुछ मामलों में की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराई गई थी। एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने बताया था कि कुछ औद्योगिक इकाइयों से संबंधित जांच रिपोर्ट अभी लंबित हैं।
शंकर चौधरी ने कहा है कि प्रस्तावित धरना किसी टकराव के उद्देश्य से नहीं, बल्कि औद्योगिक हादसों की निष्पक्ष जांच, श्रमिकों की सुरक्षा, प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कराने की मांग को लेकर किया जाएगा।
उनका कहना है कि औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और हादसों के बाद जांच की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। यदि 24 सितंबर तक रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो 25 सितंबर को उपायुक्त कार्यालय के प्रवेश द्वार की सीढ़ियों पर धरना दिया जाएगा।
अब देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन जांच रिपोर्ट को लेकर क्या जानकारी सार्वजनिक करता है और 25 सितंबर को प्रस्तावित धरने की स्थिति क्या रहती है। फिलहाल रामगढ़ में औद्योगिक सुरक्षा, जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है।









