झारखंड में JPSC – JSSC-CGL, उत्पाद सिपाही, PGTT और मैट्रिक सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर भारतीय जनता युवा मोर्चा, जमशेदपुर महानगर ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। जिलाध्यक्ष नितिश कुशवाहा ने निष्पक्ष CBI जांच की मांग करते हुए 10 अगस्त को रांची में प्रस्तावित विधानसभा घेराव में युवाओं से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।
झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार उठ रहे विवादों के बीच भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) जमशेदपुर महानगर ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जमशेदपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान भाजयुमो के जिलाध्यक्ष एवं कोल्हान विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष नितिश कुशवाहा ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में सामने आ रही कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के सपनों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा और प्रत्येक मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
नितिश कुशवाहा ने कहा कि झारखंड में JPSC, JSSC-CGL, उत्पाद सिपाही, PGTT, मैट्रिक समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कहीं कथित पेपर लीक की चर्चा हुई, कहीं परीक्षा स्थगित करनी पड़ी तो कहीं भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगे। उनका कहना था कि इन घटनाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर असर डाला है, जिसका सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों युवाओं को उठाना पड़ रहा है जो वर्षों तक कठिन परिश्रम कर सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी युवाओं का अधिकार है, किसी सरकार की कृपा नहीं। अभ्यर्थी अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगाते हैं। यदि परीक्षा प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े होने लगें तो युवाओं का मनोबल टूटता है और व्यवस्था पर उनका भरोसा कमजोर होता है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए।
भाजयुमो जिलाध्यक्ष ने मांग की कि JPSC, JSSC सहित जिन भी भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आए हैं, उन सभी मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष CBI जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जांच केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि कथित पेपर लीक के पूरे नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन और इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की गहराई से जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
प्रेस वार्ता के दौरान नितिश कुशवाहा ने अभय तिवारी से जुड़े लगाए गए आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिन-जिन परीक्षाओं में उनकी कथित भूमिका जांच के दायरे में आती है, उन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जांच में किसी परीक्षा में अनियमितता प्रमाणित होती है तो अभ्यर्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। जरूरत पड़ने पर संबंधित परीक्षा दोबारा आयोजित कर योग्य अभ्यर्थियों को न्याय दिया जाए।

उन्होंने कहा कि पेपर लीक केवल एक प्रश्नपत्र के बाहर आने का मामला नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं की मेहनत, विश्वास और अधिकारों पर सीधा हमला है, जिन्होंने वर्षों तक तैयारी कर प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का सपना देखा है। ऐसी स्थिति में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच ही युवाओं का भरोसा बहाल कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता।
भाजयुमो नेता ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे विवादों ने झारखंड के युवाओं में गहरा असंतोष पैदा किया है। ऐसे में 10 अगस्त को रांची में प्रस्तावित विधानसभा घेराव युवाओं की आवाज को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। उन्होंने इसे किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं बल्कि युवाओं के अधिकार, रोजगार और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था की मांग से जुड़ा जनआंदोलन बताया।
उन्होंने झारखंड के छात्रों और युवाओं से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक संख्या में 10 अगस्त को रांची पहुंचकर विधानसभा घेराव में भाग लें। उनके अनुसार यह लड़ाई किसी एक संगठन या व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं की है जिन्होंने वर्षों तक मेहनत कर अपने भविष्य के सपने संजोए हैं। उन्होंने कहा कि अब लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने का समय आ गया है ताकि सरकार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए।
राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए नितिश कुशवाहा ने कहा कि युवाओं के धैर्य की परीक्षा लेना उचित नहीं है। सरकार को भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के सवालों का स्थायी समाधान निकालना होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि मेहनत करने वाले युवाओं के भविष्य के साथ आखिर कब तक इस तरह का खिलवाड़ होता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता युवा मोर्चा युवाओं के अधिकार और सम्मान की इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से उठाता रहेगा।
उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक परीक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि झारखंड के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य, रोजगार, सम्मान और अधिकार से जुड़ा विषय है। यदि भर्ती प्रक्रियाओं पर विश्वास कमजोर होता है तो इसका असर पूरे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और युवाओं के मनोबल पर पड़ता है। इसलिए सरकार को सभी विवादित मामलों की निष्पक्ष जांच कराकर पारदर्शी भर्ती प्रणाली सुनिश्चित करनी चाहिए।
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें रहेंगी। वहीं अभ्यर्थी भी निष्पक्ष जांच और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग को लेकर लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।











