Jamshedpur News : जमशेदपुर को दो आयुष अस्पतालों की सौगात, सोमवार से शुरू होगी ओपीडी सेवा; जानें डॉक्टरों की ड्यूटी और समय

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Jamshedpur News: जमशेदपुर में दो आयुष अस्पताल शुरू, कदमा में 50 बेड और बिष्टुपुर में पंचकर्म सेंटर की सुविधा

Jamshedpur News : जमशेदपुर के कदमा स्थित 50 बेड के धनवंतरी आयुष अस्पताल और बिष्टुपुर के 10 बेड वाले पंचकर्म सेंटर में सोमवार से ओपीडी सेवा शुरू होगी। जानें अस्पताल का समय, उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं और डॉक्टरों की ड्यूटी।

Jamshedpur News : शहरवासियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। जमशेदपुर में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने और मरीजों को उपचार के अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में दो आयुष संस्थानों को शुरू किया जा रहा है। कदमा के शास्त्रीनगर ब्लॉक नंबर-4 स्थित 50 बेड वाले धनवंतरी आयुष अस्पताल और बिष्टुपुर के सर्किट हाउस परिसर स्थित 10 बेड वाले पंचकर्म सेंटर को आयुष विभाग ने शनिवार को अपने अधीन ले लिया।

विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, दोनों केंद्रों में सोमवार से ओपीडी यानी बाह्य रोगी विभाग की सेवाएं शुरू की जाएंगी। इससे जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को आयुर्वेद तथा अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी सेवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधा मिल सकेगी।

दोनों संस्थानों में ओपीडी संचालन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। चिकित्सकों और कर्मचारियों की तैनाती भी कर दी गई है। अब मरीज निर्धारित समय के दौरान अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त कर सकेंगे।

कदमा के शास्त्रीनगर ब्लॉक नंबर-4 में स्थित धनवंतरी आयुष अस्पताल को 50 बेड की क्षमता के साथ तैयार किया गया है। इस अस्पताल का उद्देश्य मरीजों को विभिन्न आयुष चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना है।

यहां आयुर्वेद के साथ होम्योपैथी, यूनानी चिकित्सा, पंचकर्म और योग से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों में परामर्श लेने वाले मरीजों को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।

अस्पताल में फिलहाल ओपीडी सेवा शुरू की जा रही है। इसका अर्थ है कि शुरुआती चरण में मरीज चिकित्सक से परामर्श ले सकेंगे। अस्पताल की पूरी 50 बेड की क्षमता के अनुसार मरीजों को भर्ती कर इलाज करने की सुविधा शुरू होने में अभी समय लगेगा।

जिला आयुष पदाधिकारी डॉ. मुकुल दीक्षित के अनुसार, इनडोर यानी अस्पताल में भर्ती कर इलाज करने की व्यवस्था शुरू करने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन की आवश्यकता है। इसके लिए विभाग ने अतिरिक्त डॉक्टरों और कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

जब आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध हो जाएगा, तब अस्पताल में मरीजों को भर्ती कर उपचार देने की व्यवस्था शुरू की जा सकेगी।

जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित सर्किट हाउस परिसर में 10 बेड का पंचकर्म सेंटर भी शुरू किया जा रहा है। इस केंद्र में आयुर्वेद की पारंपरिक पंचकर्म चिकित्सा पद्धति के माध्यम से मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने की तैयारी है।

पंचकर्म आयुर्वेद की एक प्रमुख उपचार पद्धति है, जिसमें मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय आकलन के अनुसार विभिन्न प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है। इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य निर्धारित चिकित्सकीय जरूरतों के अनुसार उपचार प्रदान करना होता है।

इस केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में पंचकर्म से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसके लिए चिकित्सकों और कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है।

हालांकि, फिलहाल यहां भी ओपीडी सेवा से शुरुआत होगी। भर्ती की सुविधा शुरू करने के लिए आवश्यक अतिरिक्त कर्मचारियों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी। इसलिए मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे अस्पताल पहुंचने पर उपलब्ध सेवाओं और उपचार प्रक्रिया की जानकारी संबंधित चिकित्सक से प्राप्त करें।

दोनों आयुष संस्थानों में ओपीडी का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित किया गया है। मरीज इस अवधि के दौरान चिकित्सकीय परामर्श के लिए पहुंच सकते हैं।

जिला आयुष पदाधिकारी डॉ. मुकुल दीक्षित के अनुसार, दोनों केंद्रों में ओपीडी संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। डॉक्टरों और कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ उनकी ड्यूटी भी निर्धारित कर दी गई है।

इन अस्पतालों के शुरू होने से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से उपचार कराने के इच्छुक लोगों को शहर में ही परामर्श की सुविधा मिल सकेगी। इससे उन्हें संबंधित सेवाओं के लिए अन्य स्थानों पर जाने की जरूरत कम हो सकती है।

हालांकि, अस्पतालों में उपलब्ध वास्तविक उपचार, जांच, प्रक्रियाओं और अन्य सुविधाओं की जानकारी मरीजों को संबंधित केंद्र से प्राप्त करनी चाहिए।

कदमा स्थित धनवंतरी आयुष अस्पताल में चिकित्सकों की ड्यूटी सप्ताह के अलग-अलग दिनों में निर्धारित की गई है।

  • डॉ. बालाजी एमएन: सोमवार और बुधवार
  • डॉ. जगमोहन महतो: गुरुवार और शनिवार
  • डॉ. संचिता दत्ता: मंगलवार और शुक्रवार
  • मोहम्मद शायक: सेवक सह सफाईकर्मी, पूरे सप्ताह

मरीज अस्पताल जाने से पहले अपनी जरूरत के अनुसार संबंधित डॉक्टर की उपलब्धता की जानकारी ले सकते हैं। इससे उन्हें सही दिन पर चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त करने में सुविधा होगी।

बिष्टुपुर स्थित 10 बेड वाले पंचकर्म सेंटर में भी डॉक्टरों की ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है।

  • डॉ. रेखा दास: सोमवार, मंगलवार और बुधवार
  • डॉ. रौनक अफरोज खानम: गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार
  • संजीत कुमार मुर्मू: सेवक सह रात्रिप्रहरी, पूरे सप्ताह

केंद्र में पंचकर्म से जुड़ी चिकित्सा सेवाएं चिकित्सकीय परामर्श और उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार प्रदान की जाएंगी। मरीजों को किसी भी प्रक्रिया से पहले चिकित्सक से अपनी स्वास्थ्य स्थिति और उपचार की उपयुक्तता के संबंध में सलाह लेनी चाहिए।

दोनों संस्थानों को शुरू करने की पहल केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय के निर्देश पर की जा रही है। इसका उद्देश्य आयुष चिकित्सा सेवाओं को लोगों तक पहुंचाना और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए संस्थागत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

कदमा का धनवंतरी आयुष अस्पताल और बिष्टुपुर का पंचकर्म सेंटर शुरू होने के बाद शहर की स्वास्थ्य सेवाओं में आयुष चिकित्सा से जुड़ा एक नया विकल्प जुड़ेगा। दोनों केंद्रों के संचालन से संबंधित जिम्मेदारियां आयुष विभाग के अधीन रहेंगी।

हालांकि, किसी भी अस्पताल की उपयोगिता केवल उसके भवन या बेड की संख्या से तय नहीं होती। नियमित चिकित्सकीय उपलब्धता, प्रशिक्षित कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या, उपचार की गुणवत्ता और मरीजों को समय पर सेवाएं मिलना भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में आने वाले समय में इन संस्थानों का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि ओपीडी संचालन के साथ भर्ती और अन्य प्रस्तावित सेवाएं कितनी प्रभावी ढंग से शुरू हो पाती हैं।

फिलहाल दोनों अस्पतालों में ओपीडी सेवा शुरू की जा रही है। मरीजों को भर्ती कर इलाज करने की सुविधा शुरू करने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन जुटाने की प्रक्रिया जारी है।

धनवंतरी आयुष अस्पताल की 50 बेड और बिष्टुपुर पंचकर्म सेंटर की 10 बेड की क्षमता को देखते हुए भविष्य में इन सुविधाओं का विस्तार मरीजों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन भर्ती की सेवा कब से शुरू होगी, इसकी निश्चित तारीख फिलहाल घोषित नहीं की गई है।

शहरवासियों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि दोनों केंद्रों में निर्धारित समय पर डॉक्टर उपलब्ध रहें और मरीजों को व्यवस्थित तरीके से परामर्श मिले। साथ ही, इनडोर सेवाएं शुरू करने के लिए चल रही नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करना भी जरूरी होगा।

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