Jamshedpur News : XLRI–जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, जमशेदपुर में 13वें डॉ. वर्गीज कुरियन स्मृति सतत विकास व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में शामिल हुए।
Jamshedpur News : व्याख्यान का मुख्य उद्देश्य भारत के आर्थिक विकास में उत्पादकों की भूमिका को रेखांकित करना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा करना और समावेशी एवं सतत विकास की संभावनाओं को सामने लाना रहा।
Jamshedpur News : इस वर्ष के व्याख्यान की थीम “Producers as Nation Builders: Rethinking Growth, Institutions and Inclusion in India” रखी गई। इसका व्यापक संदेश यह रहा कि देश की आर्थिक प्रगति में किसानों, कारीगरों, ग्रामीण उद्यमियों और अन्य उत्पादकों की भूमिका को अधिक महत्व देने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में उत्पादन आधारित विकास, सामूहिक स्वामित्व, ग्रामीण उद्यमिता, संस्थागत सहयोग और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

ग्रामीण विकास के लिए उत्पादकों को सशक्त बनाना जरूरी
व्याख्यान को संबोधित करते हुए NABARD अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी ने उत्पादकों को सशक्त बनाने और उन्हें मजबूत संस्थागत सहायता उपलब्ध कराने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि देश की समृद्धि केवल बड़े उद्योगों और शहरी अर्थव्यवस्था की प्रगति से सुनिश्चित नहीं हो सकती, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन, रोजगार और उद्यमिता के अवसरों को बढ़ाना भी जरूरी है।
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में किसानों और ग्रामीण उत्पादकों की आर्थिक स्थिति का सीधा संबंध ग्रामीण समाज की समग्र प्रगति से है। यदि उत्पादकों को बेहतर बाजार, वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रभावी संस्थागत सहयोग मिले, तो उनकी आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।
ग्रामीण विकास की दिशा में सामूहिक स्वामित्व और संगठित प्रयासों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। जब छोटे उत्पादक समूहों, सहकारी संस्थाओं और अन्य सामूहिक संगठनों के माध्यम से काम करते हैं, तो उनके लिए संसाधनों का बेहतर उपयोग करना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना और बाजार तक पहुंच बनाना आसान हो सकता है।
कार्यक्रम में सामने आया संदेश यह था कि उत्पादकों को केवल आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा मानने के बजाय राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखा जाना चाहिए। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ऐसी नीतियों और संस्थागत व्यवस्थाओं की आवश्यकता है, जो छोटे उत्पादकों को विकास के अवसरों से जोड़ सकें।
सतत विकास और समावेशी अर्थव्यवस्था पर चर्चा
व्याख्यान की थीम में आर्थिक विकास के साथ सामाजिक समावेशन और संस्थागत सुधारों पर विशेष ध्यान दिया गया। समावेशी विकास का अर्थ है कि आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचे और ग्रामीण, आदिवासी तथा आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों को भी आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें।
भारत में ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक संभावनाएं व्यापक हैं। कृषि, पशुपालन, वन आधारित उत्पाद, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यम ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, इन क्षेत्रों में काम करने वाले उद्यमियों को बाजार तक पहुंच, तकनीक, वित्त और व्यवसाय प्रबंधन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में संस्थागत सहयोग ग्रामीण उद्यमों को स्थायी आधार देने में महत्वपूर्ण हो सकता है। वित्तीय संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी एजेंसियों और उद्यमिता सहायता केंद्रों के बीच बेहतर समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार और व्यवसाय विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
कार्यक्रम में उत्पादन आधारित विकास पर दिया गया जोर इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा रहा। इसका उद्देश्य ऐसी आर्थिक व्यवस्था को प्रोत्साहित करना है, जिसमें स्थानीय उत्पादकों की क्षमता का उपयोग हो, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिले और आर्थिक गतिविधियों का लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे।

जलवायु परिवर्तन के बीच ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत
सतत विकास के संदर्भ में जलवायु परिवर्तन भी एक महत्वपूर्ण विषय है। मौसम में अनिश्चितता, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव और पर्यावरणीय चुनौतियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। कृषि और वन आधारित आजीविका पर निर्भर समुदायों के लिए इन चुनौतियों का सामना करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
डॉ. शाजी कृष्णन वी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जलवायु परिवर्तन के प्रति मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दिशा में संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग, टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों, स्थानीय नवाचार और ग्रामीण उद्यमों की क्षमता बढ़ाने जैसे प्रयास महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
सतत विकास का उद्देश्य केवल वर्तमान आर्थिक जरूरतों को पूरा करना नहीं है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों और आजीविका के अवसरों को भी सुरक्षित रखना है। इसलिए ग्रामीण विकास की योजनाओं में आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
FACES की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत
कार्यक्रम के दौरान XLRI के Fr Arrupe Centre for Ecology and Sustainability (FACES) की वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। यह केंद्र पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और जिम्मेदार आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विषयों पर कार्य करता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र की प्रमुख कार्यक्षेत्रों में जैव विविधता, सर्कुलर इकोनॉमी, कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी तथा आदिवासी एवं वन आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करना शामिल है।
सर्कुलर इकोनॉमी ऐसी आर्थिक व्यवस्था की अवधारणा है, जिसमें संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने, अपशिष्ट कम करने और वस्तुओं के पुनः उपयोग एवं पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाता है। वहीं, कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी के अंतर्गत कारोबारी गतिविधियों को पर्यावरणीय और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ संचालित करने पर जोर दिया जाता है।
आदिवासी और वन आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई समुदाय अपनी आजीविका के लिए स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक कौशल पर निर्भर हैं। ऐसे उद्यमों को उचित अवसर मिलने से स्थानीय रोजगार, आय के स्रोत और पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा मिल सकता है।
FACES की वार्षिक रिपोर्ट की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में पर्यावरणीय जिम्मेदारी और आर्थिक विकास के बीच संबंध को भी प्रमुखता दी।
XCITE में 15 ग्रामीण उद्यमियों से मिले NABARD अध्यक्ष
मुख्य व्याख्यान से पहले डॉ. शाजी कृष्णन वी ने XLRI के Council for Innovation, Technology and Entrepreneurship (XCITE) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण बिजनेस इनक्यूबेशन कार्यक्रम से जुड़े 15 संस्थापकों और उद्यमियों से मुलाकात की।
बैठक में उन्होंने उद्यमियों के व्यवसाय, उनके उत्पादों और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी ली। इस संवाद का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित हो रहे व्यावसायिक विचारों, नवाचारों और उद्यमिता की संभावनाओं को समझना रहा।
बिजनेस इनक्यूबेशन कार्यक्रम नए उद्यमियों को अपने व्यावसायिक विचारों को विकसित करने, बाजार की जरूरतों को समझने और व्यवसाय संचालन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान खोजने में सहायता कर सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे कार्यक्रमों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वहां स्थानीय संसाधनों और समस्याओं पर आधारित नए व्यवसाय विकसित करने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
डॉ. शाजी कृष्णन वी ने ग्रामीण उद्यमिता, नवाचार और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के संदर्भ में NABARD की प्रतिबद्धता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के महत्व को रेखांकित किया।
झारखंड सहित पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में कृषि, वनोपज, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय संसाधनों पर आधारित व्यवसायों के विकास की संभावनाएं हैं। ऐसे में ग्रामीण उद्यमियों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने वाले प्रयास क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देने में सहायक हो सकते हैं।
ग्रामीण भारत के विकास के लिए महत्वपूर्ण संदेश
XLRI जमशेदपुर में आयोजित 13वें डॉ. वर्गीज कुरियन स्मृति सतत विकास व्याख्यान ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, उद्यमिता और समावेशी विकास को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। कार्यक्रम में उत्पादकों को राष्ट्र निर्माण का आधार मानने, ग्रामीण उद्यमों को प्रोत्साहित करने और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ आर्थिक प्रगति हासिल करने पर जोर दिया गया।
इस आयोजन ने यह भी रेखांकित किया कि ग्रामीण विकास के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। उत्पादकों को वास्तविक अवसर उपलब्ध कराना, संस्थागत सहयोग मजबूत करना, युवाओं के नवाचार को प्रोत्साहित करना और स्थानीय उद्यमों को बाजार से जोड़ना भी आवश्यक है।
XLRI का यह आयोजन जिम्मेदार नेतृत्व, सतत विकास और सामाजिक समावेशन जैसे विषयों पर संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। अब इस तरह की चर्चाओं का व्यापक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इनके माध्यम से सामने आए विचारों को व्यावहारिक कार्यक्रमों, मजबूत संस्थागत सहयोग और ग्रामीण समुदायों के लिए ठोस अवसरों में किस प्रकार बदला जाता है।













