Jamshedpur News : पोटका से झामुमो विधायक संजीव सरदार और जल संसाधन विभाग के स्वर्णरेखा परियोजना में कार्यरत सहायक अभियंता विजय तिर्की तथा कार्यपालक अभियंता शिव राम गगराई के बीच कथित मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।
Jamshedpur News : इस मामले को लेकर आदिवासी हो एकता मंच ने कड़ा विरोध जताया है। मंच के सदस्यों ने जमशेदपुर के करंडीह चौक पर विधायक संजीव सरदार का पुतला दहन कर घटना के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विधायक से संबंधित दोनों अधिकारियों से माफी मांगने और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही, घटना के समय की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई गई है।
Jamshedpur News : मिली जानकारी के अनुसार, जल संसाधन विभाग की स्वर्णरेखा परियोजना से जुड़े सहायक अभियंता विजय तिर्की और कार्यपालक अभियंता शिव राम गगराई के साथ पोटका विधायक संजीव सरदार द्वारा कथित मारपीट किए जाने का मामला सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया है। इस घटना को लेकर विभागीय अभियंताओं के साथ-साथ आदिवासी हो एकता मंच ने भी विरोध जताया है।
करंडीह चौक पर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान मंच के सदस्यों ने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि से जनता और सरकारी कर्मचारियों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। यदि किसी अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार या मारपीट की घटना हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, इस मामले में कथित मारपीट के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी आवश्यक है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने के लिए सभी संबंधित पक्षों का बयान और उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।
विरोध प्रदर्शन के दौरान आदिवासी हो एकता मंच के सदस्यों ने मांग की कि विधायक संजीव सरदार सहायक अभियंता विजय तिर्की और कार्यपालक अभियंता शिव राम गगराई से माफी मांगें। मंच का कहना है कि सरकारी अधिकारियों के सम्मान और उनके साथ उचित व्यवहार को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि मामले को केवल राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल से जोड़कर भी देखना चाहिए। सरकारी अधिकारी अपने विभागीय दायित्वों का निर्वहन करते हैं। ऐसे में किसी भी तरह के विवाद की स्थिति में कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत समाधान निकाला जाना चाहिए।
मंच के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले को लेकर अपनी आवाज उठाते रहेंगे और अधिकारियों को न्याय दिलाने की मांग करेंगे। उनका कहना है कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक इस प्रकरण पर सवाल उठते रहेंगे।
इस पूरे विवाद में सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। आदिवासी हो एकता मंच के सदस्यों का कहना है कि घटना के समय की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने पर घटनाक्रम की जांच में मदद मिल सकती है।
मंच ने प्रशासन से मांग की है कि यदि घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज मौजूद है, तो उसे जांच प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा जाए और नियमानुसार उसकी जांच की जाए। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है और आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल संभव होगी।
हालांकि, सीसीटीवी फुटेज की उपलब्धता और उसमें दर्ज घटनाक्रम के संबंध में आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। जांच को प्रभावित किए बिना साक्ष्यों का उचित इस्तेमाल करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी, ताकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की पड़ताल की जा सके।
आदिवासी हो एकता मंच के सदस्यों ने कहा कि वे इस मामले को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष भी उठाएंगे। मंच के अनुसार, विधायक के खिलाफ शिकायत कर पूरे मामले में उचित कार्रवाई की मांग की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे इस प्रकरण को लेकर चुप नहीं बैठेंगे और संबंधित अधिकारियों के सम्मान तथा न्याय की मांग जारी रखेंगे। मंच का कहना है कि प्रशासन को मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच करनी चाहिए, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।
मुख्यमंत्री के समक्ष शिकायत करने की घोषणा के बाद इस मामले का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व भी बढ़ गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित प्रशासन और विभाग इस विवाद पर क्या कदम उठाते हैं और शिकायत मिलने की स्थिति में आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।
इस विवाद के बीच जल संसाधन विभाग की स्वर्णरेखा परियोजना से जुड़े अभियंताओं द्वारा भी विधायक संजीव सरदार के खिलाफ कार्रवाई और माफी की मांग किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, विभाग के इंजीनियर इस मामले को लेकर नाराज हैं और संबंधित अधिकारियों के साथ कथित घटना पर कार्रवाई चाहते हैं।
सरकारी विभागों में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद तथा समन्वय प्रशासनिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी मामले में विवाद उत्पन्न होता है, तो उसकी जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए। इससे न केवल संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आएगा, बल्कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए भी उचित कदम उठाए जा सकेंगे।














