Jamshedpur News : पूर्वी सिंहभूम में ब्रेन मलेरिया का बढ़ता खतरा, मुसाबनी में तैनात सीआरपीएफ जवान पिंटू कुमार की इलाज के दौरान मौत; परिजनों ने वेंटिलेटर सुविधा नहीं मिलने का लगाया आरोप।
Jamshedpur News : जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में ब्रेन मलेरिया से पीड़ित सीआरपीएफ जवान पिंटू कुमार की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का आरोप है कि समय पर वेंटिलेटर सुविधा नहीं मिलने से उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। पूर्वी सिंहभूम में ब्रेन मलेरिया के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
Jamshedpur News : पूर्वी सिंहभूम जिले में लगातार बढ़ रहे ब्रेन मलेरिया के मामलों के बीच एक दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। मुसाबनी स्थित सीआरपीएफ की 197वीं बटालियन में तैनात जवान पिंटू कुमार की ब्रेन मलेरिया से मौत हो गई। उनका इलाज जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में चल रहा था, जहां बुधवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। इस घटना के बाद न केवल उनके परिवार बल्कि सीआरपीएफ कैंप और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

इस मामले ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और गंभीर मरीजों के लिए उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि जवान की हालत लगातार बिगड़ रही थी और उन्हें तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता थी, लेकिन एमजीएम अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण समय पर जीवनरक्षक उपचार नहीं मिल सका।
मुसाबनी से जादूगोड़ा और फिर एमजीएम अस्पताल किया गया था रेफर
जानकारी के अनुसार, सीआरपीएफ जवान पिंटू कुमार की तबीयत अचानक खराब होने लगी थी। शुरुआत में उन्हें मुसाबनी से इलाज के लिए जादूगोड़ा भेजा गया। वहां चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर स्थित एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया।
मंगलवार को उन्हें एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच के दौरान चिकित्सकों ने ब्रेन मलेरिया की पुष्टि की। इसके बाद डॉक्टरों की टीम लगातार उनका इलाज करती रही, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका और बुधवार को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
परिजनों ने लगाया वेंटिलेटर सुविधा नहीं मिलने का आरोप
पिंटू कुमार के परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता बताई थी। उनका आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त वेंटिलेटर सुविधा उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण मरीज को आवश्यक जीवनरक्षक सहायता समय पर नहीं मिल सकी।
हालांकि, अस्पताल प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन इस घटना के बाद सरकारी अस्पतालों में गंभीर मरीजों के लिए उपलब्ध संसाधनों और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर बहस तेज हो गई है।
बिहार के वैशाली जिले के रहने वाले थे पिंटू कुमार
पिंटू कुमार मूल रूप से बिहार के वैशाली जिले के फरीदपुर गांव के निवासी थे। उनका जन्म 2 मई 1991 को हुआ था। वे सीआरपीएफ की 197वीं बटालियन में अपनी सेवाएं दे रहे थे और मुसाबनी में तैनात थे।
वर्ष 2019 में उनका विवाह हुआ था। उनके परिवार में पत्नी और तीन छोटे बच्चे हैं। बताया गया कि करीब दो महीने पहले ही उनके घर बेटे का जन्म हुआ था। बेटे के जन्म के बाद वह छुट्टी लेकर अपने गांव भी गए थे। परिवार खुशियों का जश्न मना ही रहा था कि अचानक यह दुखद खबर पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ बनकर टूट पड़ी।
अस्पताल परिसर में गूंजता रहा परिजनों का विलाप
जैसे ही जवान के निधन की सूचना मिली, उनकी मां, भाई और अन्य परिजन एमजीएम अस्पताल पहुंचे। अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। मां अपने बेटे के पार्थिव शरीर से लिपटकर विलाप करती रही, जिसे देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए।
घटना की सूचना मिलने पर सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में जवान भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अपने साथी को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। इसके बाद पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक गांव भेज दिया गया।
सीआरपीएफ कैंप में पसरा मातम
मुसाबनी स्थित 197वीं बटालियन में पिंटू कुमार की मृत्यु की खबर पहुंचते ही पूरे कैंप में शोक का माहौल बन गया। साथी जवानों ने उन्हें एक अनुशासित, कर्तव्यनिष्ठ और मिलनसार सैनिक बताया। उनके असामयिक निधन से जवानों में भी गहरा दुख देखा गया।
पूर्वी सिंहभूम में लगातार बढ़ रहे हैं ब्रेन मलेरिया के मामले
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पूर्वी सिंहभूम जिले के कई इलाकों में मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से ब्रेन मलेरिया के मामलों में वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है।
ब्रेन मलेरिया, मलेरिया का अत्यंत गंभीर रूप माना जाता है, जिसमें संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। तेज बुखार, बेहोशी, दौरे पड़ना, भ्रम की स्थिति और मानसिक असंतुलन इसके प्रमुख लक्षण माने जाते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने तेज की निगरानी और जागरूकता अभियान
ब्रेन मलेरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी तेज कर दिया है। विभाग लोगों से अपील कर रहा है कि बुखार आने पर लापरवाही न करें और तुरंत सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
इसके अलावा लोगों को मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करने, घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देने तथा साफ-सफाई बनाए रखने की भी सलाह दी जा रही है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे हैं सवाल
सीआरपीएफ जवान की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकारी अस्पताल गंभीर मरीजों को समय पर आवश्यक जीवनरक्षक सुविधाएं उपलब्ध कराने में सक्षम हैं। यदि किसी मरीज को तत्काल वेंटिलेटर या अन्य अत्याधुनिक चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ती है, तो उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है।
हालांकि, वेंटिलेटर सुविधा उपलब्ध नहीं होने संबंधी परिजनों के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यदि इस मामले की जांच होती है तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज के दौरान किन परिस्थितियों में यह घटना हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
ब्रेन मलेरिया के बढ़ते मामलों के बीच यह घटना स्वास्थ्य विभाग के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि बीमारी की रोकथाम के साथ-साथ अस्पतालों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।














