Jamshedpur News : पटमदा प्रखंड की ओड़िया पंचायत के ग्रामीणों ने डीसी कार्यालय के समक्ष किया प्रदर्शन, ग्रामसभा की अनुमति के बिना खनन, प्रदूषण, विस्फोट और सुरक्षा खतरे का लगाया आरोप।
Jamshedpur News : पटमदा प्रखंड की ओड़िया पंचायत के ग्रामीणों ने डीसी कार्यालय के समक्ष किया प्रदर्शन, ग्रामसभा की अनुमति के बिना खनन, प्रदूषण, विस्फोट और सुरक्षा खतरे का लगाया आरोप।
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड अंतर्गत ओड़िया पंचायत में संचालित पत्थर खदान को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश एक बार फिर सामने आया है। मंगलवार को लायाडीह, चिरूडीह और ओड़िया गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पिछले लगभग 20 वर्षों से स्वीकृत सीमा से कहीं अधिक क्षेत्र में अवैध पत्थर खनन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण, ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
ग्रामीणों का नेतृत्व दुखनी सोरेन ने किया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन से मांग की कि विवादित खदान के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


स्वीकृत क्षेत्र से अधिक भूमि पर खनन का आरोप
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि खाता संख्या 624 के प्लॉट संख्या 4546 एवं प्लॉट संख्या 988 में जितने क्षेत्र के लिए खनन की स्वीकृति दी गई थी, उससे कई गुना अधिक भूमि पर लंबे समय से पत्थर निकाला जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए तो पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से चल रहे इस खनन कार्य के कारण आसपास के गांवों का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हुआ है। लगातार विस्फोट और भारी मशीनों के संचालन से क्षेत्र में रहने वाले लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
स्कूल, घर और जाहेरथान के पास चल रहा खनन
ग्रामीणों ने प्रशासन को बताया कि जिस स्थान पर पत्थर खदान संचालित की जा रही है, उसके आसपास विद्यालय, ग्रामीणों के आवास तथा आदिवासी समाज का धार्मिक स्थल जाहेरथान स्थित है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में लगातार विस्फोट होने से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में भय का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार तेज धमाकों से घरों में कंपन महसूस होता है। इससे मकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी रहती है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।

11 हजार वोल्ट बिजली लाइन से बढ़ा खतरा
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि लायाडीह गांव के बीचों-बीच 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन गुजरती है। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान में होने वाले विस्फोट और भारी मशीनों के संचालन के कारण बिजली लाइन को भी खतरा उत्पन्न हो गया है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि किसी कारणवश विद्युत लाइन प्रभावित हुई तो बड़ी जनहानि हो सकती है। ऐसे में प्रशासन को सुरक्षा के दृष्टिकोण से तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
ग्रामसभा की अनुमति के बिना खनन कराने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में संचालित खनन कार्य के लिए ग्रामसभा की विधिवत सहमति नहीं ली गई। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों की राय और सहमति के बिना इस प्रकार का खनन कार्य नियमों और जनभावनाओं के विरुद्ध है।
ग्रामीणों ने मांग की कि प्रशासन इस पहलू की भी गंभीरता से जांच करे और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

धूल, प्रदूषण और विस्फोट से स्वास्थ्य पर असर
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बताया कि पत्थर खदान में प्रतिदिन होने वाले विस्फोटों और उड़ती धूल के कारण पूरे क्षेत्र में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार कई लोगों को सांस संबंधी समस्याएं, धूल से होने वाली एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि खनन इसी तरह चलता रहा तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पेयजल स्रोत और कृषि भूमि भी प्रभावित होने का दावा
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अवैध खनन के कारण इलाके के प्राकृतिक जल स्रोतों और कृषि भूमि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। लगातार खनन और विस्फोट से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे खेती-किसानी भी प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि गांव के लोग मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर हैं। यदि भूमि और जल स्रोत प्रभावित होते रहे तो ग्रामीणों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
सर्वसम्मति से खदान बंद कराने का निर्णय
लायाडीह गांव और ओड़िया पंचायत के ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामसभा और स्थानीय लोगों की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि क्षेत्र में संचालित पत्थर खदान को तत्काल बंद कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि अवैध खनन और उससे उत्पन्न हो रही समस्याओं के खिलाफ है। वे चाहते हैं कि कानून के अनुसार जांच हो और यदि कोई अनियमितता पाई जाए तो कार्रवाई की जाए।
कई अधिकारियों को भेजी गई ज्ञापन की प्रतिलिपि
ग्रामीणों ने उपायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन की प्रतिलिपि जिला खनन पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) तथा अंचल अधिकारी (सीओ) को भी भेजी है। उनका उद्देश्य संबंधित विभागों का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित करना और जल्द से जल्द कार्रवाई सुनिश्चित कराना है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक सक्षम टीम गठित की जाए, जो खनन क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करे।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी ग्रामीणों की निगाहें
फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि प्रशासन मामले की जांच कराता है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि खनन कार्य निर्धारित नियमों और स्वीकृत क्षेत्र के भीतर संचालित हो रहा था या नहीं। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
इस पूरे मामले में संबंधित खनन संचालक या प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। प्रशासन की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।















