Baharagora News : 3 साल से अधर में लटका ‘बहरागोड़ा-गांडानाटा’ सड़क मरम्मत कार्य, करोड़ों की योजना के बावजूद ग्रामीण बदहाल

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Baharagora News : 5.55 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत 12 किलोमीटर सड़क का जीर्णोद्धार अधूरा, दर्जन भर गांवों के लोगों को धूल, कीचड़ और जर्जर सड़क पर सफर करने की मजबूरी

Baharagora News : बहरागोड़ा के जिला परिषद बस टर्मिनल से गांडानाटा तक मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत स्वीकृत 5.55 करोड़ रुपये की सड़क मरम्मत योजना पिछले तीन वर्षों से अधूरी है। ग्रामीणों में प्रशासन और विभाग के खिलाफ भारी नाराजगी।

बहरागोड़ा: पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड में जिला परिषद बस टर्मिनल से गांडानाटा तक बनने वाली सड़क का विशेष मरम्मती कार्य पिछले तीन वर्षों से अधर में लटका हुआ है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत स्वीकृत इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन आज स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये की स्वीकृत योजना कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण दर्जन भर गांवों के हजारों ग्रामीणों को प्रतिदिन कठिन परिस्थितियों में आवाजाही करनी पड़ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती है, जबकि गर्मी के दिनों में धूल के गुबार से राहगीरों और वाहन चालकों का चलना मुश्किल हो जाता है। लगातार खराब होती सड़क न केवल लोगों की दैनिक दिनचर्या को प्रभावित कर रही है बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ा रही है।


2023 में हुआ था शिलान्यास, लेकिन काम नहीं हुआ पूरा

जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में 5 करोड़ 55 लाख 75 हजार रुपये की लागत से इस 12 किलोमीटर लंबी सड़क के विशेष मरम्मती कार्य को स्वीकृति मिली थी। योजना के शिलान्यास के दौरान स्थानीय स्तर पर इसे बड़ी उपलब्धि बताया गया था और उम्मीद जताई गई थी कि जल्द ही ग्रामीणों को बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी।

हालांकि शिलान्यास के बाद निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका। लगभग दो वर्ष पहले संवेदक द्वारा सड़क के कुछ गड्ढों में गिट्टी और मिट्टी भरकर औपचारिकता पूरी कर दी गई, लेकिन इसके बाद सड़क निर्माण या मरम्मत का कोई व्यापक कार्य नहीं किया गया। परिणामस्वरूप सड़क की स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है।


दर्जन भर गांवों की लाइफलाइन बनी यह सड़क

जिला परिषद बस टर्मिनल से गांडानाटा तक जाने वाली यह सड़क केवल एक मार्ग नहीं बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों की जीवनरेखा मानी जाती है। इसी सड़क से होकर ग्रामीण बाजार, अस्पताल, विद्यालय, सरकारी कार्यालय और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचते हैं।

खराब सड़क के कारण स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और छोटे व्यापारियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दौरान कई जगहों पर सड़क पर पानी भर जाने से वाहन चालकों को भारी जोखिम उठाना पड़ता है। वहीं दोपहिया वाहन चालक अक्सर फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।


ग्रामीणों का आरोप, विभागीय उदासीनता बनी सबसे बड़ी वजह

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण कार्य में विभागीय उदासीनता साफ दिखाई देती है। करोड़ों रुपये की योजना स्वीकृत होने के बावजूद कार्य में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाता तो आज क्षेत्र के लोगों को इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।

लोगों का यह भी कहना है कि प्रारंभिक स्तर पर केवल दिखावे के लिए कुछ गड्ढों को भर दिया गया, लेकिन उसके बाद संवेदक और संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। इससे लोगों का सरकारी योजनाओं पर विश्वास भी प्रभावित हो रहा है।


धूल और कीचड़ से स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा असर

सड़क की खराब स्थिति केवल यातायात की समस्या तक सीमित नहीं है। गर्मी के मौसम में उड़ने वाली धूल से आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों को सांस संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं बरसात में सड़क कीचड़ में बदल जाने से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूली बच्चों को प्रतिदिन इसी सड़क से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार बारिश के दौरान बच्चे फिसल जाते हैं या समय पर विद्यालय नहीं पहुंच पाते। मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी एंबुलेंस और निजी वाहनों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।


किसानों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान

यह सड़क स्थानीय किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। क्षेत्र के किसान अपनी उपज इसी मार्ग से बाजार तक पहुंचाते हैं। सड़क खराब होने के कारण परिवहन लागत बढ़ रही है और कई बार समय पर सामान बाजार तक नहीं पहुंच पाता।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि खराब सड़क के कारण बड़े वाहन आने से बचते हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा प्रभाव देखा जा सकता है।


जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से कार्रवाई की मांग

क्षेत्र के लोगों ने संबंधित विभाग, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की योजना स्वीकृत हो चुकी है तो उसका लाभ भी समय पर लोगों तक पहुंचना चाहिए।

लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य में हुई देरी की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित संवेदक की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही सड़क का गुणवत्तापूर्ण निर्माण जल्द पूरा कराया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।


बुनियादी सुविधाओं पर उठ रहे सवाल

मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है, ताकि लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक आसानी से पहुंच मिल सके। लेकिन बहरागोड़ा में इस परियोजना की धीमी प्रगति कई सवाल खड़े कर रही है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन नहीं होगा तो विकास के दावे केवल घोषणाओं तक सीमित रह जाएंगे। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द निर्माण कार्य शुरू करेगा।


ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

  • सड़क मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्य तत्काल शुरू किया जाए।
  • निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।
  • कार्य में हुई देरी की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
  • बरसात से पहले सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाए।
  • भविष्य में योजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

बहरागोड़ा से गांडानाटा तक की सड़क का तीन वर्षों से अधूरा पड़ा मरम्मत कार्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रहा है। 5.55 करोड़ रुपये की स्वीकृत परियोजना के बावजूद यदि ग्रामीणों को आज भी जर्जर सड़क, धूल और कीचड़ से जूझना पड़ रहा है, तो यह केवल विकास कार्यों में देरी का मामला नहीं बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन और संबंधित विभाग पर टिकी हैं कि आखिर यह महत्वपूर्ण सड़क परियोजना कब पूरी होगी और लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल पाएगी।

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