Jamshedpur News : 5 माह से मानदेय नहीं मिलने पर MGM अस्पताल में रो पड़ी महिला होमगार्ड, बोलीं– ‘हमको पैसा दिला दीजिए, नहीं तो हम मर जाएंगे’

---Advertisement---

Jamshedpur News : जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ड्यूटी के दौरान महिला होमगार्ड का दर्द छलका, इलाज के लिए भी नहीं हैं पैसे; लगातार बकाया मानदेय से बढ़ रहा आर्थिक और मानसिक संकट।

Jamshedpur News : जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पांच माह से मानदेय नहीं मिलने पर महिला होमगार्ड ड्यूटी के दौरान फूट-फूटकर रो पड़ी। इलाज के लिए पैसे नहीं होने और आर्थिक तंगी से परेशान महिला ने गंभीर चेतावनी दी। पढ़ें पूरी खबर।

झारखंड के जमशेदपुर स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शनिवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था में तैनात एक आदिवासी महिला होमगार्ड जवान ड्यूटी के दौरान अचानक फूट-फूटकर रोने लगी। उसकी आंखों से छलकते आंसुओं के साथ वर्षों की जिम्मेदारियों और महीनों की आर्थिक परेशानियों का दर्द भी बाहर आ गया।

महिला ने रोते हुए अपने अधिकारियों और साथियों से कहा, “हमको पैसा दिला दीजिए, नहीं तो हम मर जाएंगे।” यह शब्द सुनकर अस्पताल परिसर में मौजूद अन्य होमगार्ड जवान और कर्मचारी भी स्तब्ध रह गए। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और साथी जवानों ने महिला को संभालने का प्रयास किया।

पांच माह से नहीं मिला मानदेय, आर्थिक संकट गहराया

जानकारी के अनुसार महिला होमगार्ड को पिछले पांच माह से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। लगातार वेतन नहीं मिलने के कारण वह गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही है। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है और इलाज जैसी आवश्यक जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं।

महिला का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रखी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण उसके परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

रीढ़ की गंभीर बीमारी से जूझ रही महिला

महिला ने बताया कि वह पिछले करीब छह माह से रीढ़ के पास असहनीय दर्द से परेशान है। शुरुआत में उसने कई सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन कोई विशेष राहत नहीं मिली। इसके बाद वह पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में विशेषज्ञ चिकित्सकों से इलाज करा रही है।

डॉक्टरों ने जांच के बाद ऑपरेशन कराने की सलाह दी है। हालांकि आर्थिक तंगी के कारण वह ऑपरेशन नहीं करा पा रही है। इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ होने के कारण उसकी परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।

महिला ने भावुक होकर बताया कि उसने अपने परिजनों से भी आर्थिक सहायता की उम्मीद की थी, लेकिन वहां से भी मदद नहीं मिल सकी। ऐसे में उसके सामने जीवनयापन और इलाज दोनों बड़ी चुनौती बन गए हैं।

ड्यूटी के दौरान फूट-फूटकर रोने लगी महिला

शनिवार सुबह ड्यूटी के दौरान अचानक महिला का धैर्य जवाब दे गया। वह अस्पताल परिसर में ही रोने लगी और अपनी आर्थिक परेशानियों को बयां करने लगी। उसकी बात सुनकर मौके पर मौजूद साथी होमगार्ड जवान तुरंत उसके पास पहुंचे।

साथियों ने काफी देर तक उसे समझाया और मानसिक रूप से संभालने की कोशिश की। इस दौरान कई जवान खुद भी भावुक हो गए। अस्पताल में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया।

पहले भी हो चुकी है आत्महत्या के प्रयास की घटना

यह पहला मामला नहीं है जिसने होमगार्ड जवानों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। करीब एक सप्ताह पहले भी एमजीएम अस्पताल में तैनात एक अन्य महिला होमगार्ड ने मानसिक तनाव के चलते फिनाइल पीकर आत्महत्या का प्रयास किया था।

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि लंबे समय से बकाया मानदेय के कारण होमगार्ड जवानों पर आर्थिक दबाव के साथ-साथ मानसिक तनाव भी तेजी से बढ़ रहा है।

मानदेय में देरी से प्रभावित हो रहा जीवन

होमगार्ड जवान सीमित आय पर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे में कई महीनों तक मानदेय नहीं मिलने से उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी कठिन हो जाता है। बच्चों की पढ़ाई, दवा, किराया और घरेलू खर्च जैसी आवश्यक जिम्मेदारियां सीधे प्रभावित होती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक असुरक्षा लंबे समय तक बनी रहने पर मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। समय पर भुगतान न मिलने से तनाव, अवसाद और निराशा जैसी समस्याएं बढ़ने की आशंका रहती है।

प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद

महिला होमगार्ड की भावुक अपील के बाद अस्पताल परिसर में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। साथी जवानों का कहना है कि यदि जल्द बकाया मानदेय का भुगतान नहीं हुआ तो ऐसी घटनाएं दोबारा भी सामने आ सकती हैं।

होमगार्ड जवानों की मांग है कि सरकार और संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करें, ताकि आर्थिक तंगी से जूझ रहे कर्मचारियों को राहत मिल सके।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक संकट से गुजर रहे कर्मचारियों के लिए केवल वित्तीय सहायता ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और भावनात्मक सहयोग भी आवश्यक है। लगातार तनावपूर्ण परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मियों को समय-समय पर काउंसलिंग और सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

एमजीएम अस्पताल में सामने आई यह घटना केवल एक कर्मचारी की व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि उन अनेक होमगार्ड जवानों की स्थिति को उजागर करती है जो महीनों से अपने मेहनताने का इंतजार कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्द करता है।


Join Facebook

Join Now

Join Instagram

Join Now

और पढ़ें

Leave a Comment