Seraikela-Kharsawan News : सरायकेला में बेखौफ बालू माफिया: सरकारी स्कूल बना अवैध बालू डंपिंग का अड्डा, रातभर दौड़ रहे ट्रैक्टर और हाइवा

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Seraikela-Kharsawan News : कुकड़ू के उत्क्रमित मध्य विद्यालय परिसर में एक महीने से अवैध बालू भंडारण का आरोप, बच्चों की सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

Seraikela-Kharsawan News : सरायकेला-खरसावां के कुकड़ू प्रखंड स्थित सिरूम टोला, बुरुडीह के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में अवैध बालू भंडारण का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक महीने से रात के अंधेरे में ट्रैक्टर और हाइवा के जरिए बालू का अवैध कारोबार चल रहा है, जबकि प्रशासन अब तक मौन है।

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से अवैध बालू कारोबार का एक गंभीर मामला सामने आया है। कुकड़ू प्रखंड के सिरूम टोला, बुरुडीह स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय का परिसर इन दिनों शिक्षा का केंद्र कम और अवैध बालू भंडारण का अड्डा अधिक दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब एक महीने से बालू माफिया खुलेआम विद्यालय परिसर में बड़े पैमाने पर बालू डंप कर रहे हैं, लेकिन संबंधित विभागों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

विद्यालय परिसर में बालू के विशाल ढेर लगे होने से न केवल स्कूल का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हुआ है, बल्कि यहां पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर बच्चों को शिक्षा मिलनी चाहिए, वहां अब भारी वाहनों और अवैध कारोबार की गतिविधियां चल रही हैं।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह पूरा कारोबार मुख्य रूप से रात के समय संचालित किया जाता है। आरोप है कि तिरुलडीह क्षेत्र से ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू लाकर विद्यालय परिसर में जमा किया जाता है। इसके बाद देर रात बड़े हाइवा वाहनों में वही बालू लोड कर अन्य स्थानों के लिए रवाना कर दिया जाता है।

रातभर ट्रैक्टर और हाइवा की लगातार आवाजाही से गांव की सड़कों पर धूल उड़ती रहती है और तेज शोर से लोगों की नींद भी प्रभावित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार रात दो से तीन बजे तक भारी वाहन गांव के भीतर चलते रहते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

विद्यालय परिसर में भारी मात्रा में बालू डंप होने से सबसे अधिक चिंता वहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। स्कूल खुलने के दौरान बच्चे उसी परिसर में खेलते और आवाजाही करते हैं, जहां बालू के बड़े-बड़े ढेर मौजूद हैं।

अभिभावकों का कहना है कि यदि किसी बच्चे के ऊपर बालू का ढेर खिसक जाए या परिसर में प्रवेश करने वाले भारी वाहन से कोई हादसा हो जाए, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा के मंदिर को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और कानून के खिलाफ है।

गांव के लोगों का आरोप है कि यह अवैध कारोबार बिना किसी संरक्षण के संभव नहीं हो सकता। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में बालू माफिया लंबे समय से सक्रिय हैं और प्रशासनिक निगरानी के अभाव में उनका मनोबल बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों का दावा है कि एक महीने से विद्यालय परिसर में लगातार बालू जमा किया जा रहा है, फिर भी न तो शिक्षा विभाग, न खनन विभाग और न ही स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर जांच की। इससे लोगों के बीच प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष बढ़ गया है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर उठ रहा है। जब विद्यालय परिसर में लगातार ट्रैक्टर और हाइवा की आवाजाही हो रही है, तब संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि रात में इतने बड़े पैमाने पर वाहन गांव में प्रवेश कर रहे हैं, तो पुलिस और प्रशासन की गश्ती व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं। लोगों का मानना है कि सरकारी संपत्ति का इस प्रकार दुरुपयोग होना प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, खनन विभाग और शिक्षा विभाग से संयुक्त रूप से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • विद्यालय परिसर में अवैध रूप से डंप किए गए बालू को तत्काल जब्त किया जाए।
  • बालू के स्रोत और परिवहन में शामिल लोगों की पहचान की जाए।
  • विद्यालय परिसर को तुरंत बालू मुक्त कराया जाए।
  • दोषियों के खिलाफ खनन एवं अन्य संबंधित कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।
  • भविष्य में स्कूल परिसरों का इस प्रकार दुरुपयोग रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह अवैध कारोबार और भी बड़े स्तर पर फैल सकता है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और सरकारी विद्यालय की गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

लोगों का कहना है कि यह केवल अवैध बालू भंडारण का मामला नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, सरकारी संपत्ति और कानून के शासन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। ऐसे में दोषियों पर त्वरित कार्रवाई कर प्रशासन को जनता का विश्वास कायम करना चाहिए।

सरायकेला-खरसावां के कुकड़ू स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में अवैध बालू भंडारण के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं, तो यह मामला सरकारी विद्यालय के दुरुपयोग और अवैध खनन नेटवर्क की गंभीर तस्वीर पेश करता है। अब निगाहें जिला प्रशासन और खनन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वे जांच कर दोषियों के खिलाफ कितनी सख्ती दिखाते हैं।

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