Jamshedpur News : पुलिस मुठभेड़ में मारे गए गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के आपराधिक नेटवर्क का बड़ा खुलासा। घाघीडीह जेल से गैंग संचालन, अखिलेश सिंह की हत्या की साजिश, नागालैंड से AK-47 मंगाने की योजना और CID की जांच से जुड़े पूरे मामले को विस्तार से जानिए।
Jamshedpur News : पुलिस मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा को लेकर कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने झारखंड के आपराधिक जगत की गहरी जड़ों को उजागर कर दिया है। पुलिस रिकॉर्ड और जांच एजेंसियों के अनुसार, सुजीत सिन्हा का आपराधिक नेटवर्क केवल सड़क पर सक्रिय अपराधियों तक सीमित नहीं था, बल्कि वह जेल में बंद रहने के बावजूद पूरे गिरोह का संचालन करता था। हत्या की साजिश रचना, रंगदारी वसूलना, हथियारों की सप्लाई कराना और शूटरों को निर्देश देना जैसे गंभीर अपराधों का संचालन वह जेल के भीतर से ही करता था।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह की हत्या के लिए नागालैंड से एक AK-47 राइफल और कई अत्याधुनिक पिस्तौलें मंगाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि पुलिस की समय पर कार्रवाई के कारण यह साजिश सफल नहीं हो सकी।
पुलिस के अनुसार, सुजीत सिन्हा के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच के दौरान उसके गैंग के संचालन का पूरा तंत्र सामने आया, जिसने यह साबित किया कि जेल में बंद होने के बावजूद उसका नेटवर्क लगातार सक्रिय था।
घाघीडीह सेंट्रल जेल में बंद रहने के दौरान सुजीत सिन्हा लगातार अपने सहयोगियों के संपर्क में रहता था। पुलिस की जांच में यह सामने आया कि वह मोबाइल फोन और फर्जी सिम कार्ड के माध्यम से अपने गैंग के सदस्यों को निर्देश देता था। जेल में छापेमारी के दौरान उसके पास से 12 से अधिक मोबाइल सिम कार्ड बरामद किए गए थे, जो अन्य लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से जारी कराए गए थे।
जांच एजेंसियों का मानना था कि इन्हीं मोबाइल नंबरों के जरिए रंगदारी की मांग, हत्या की योजना और हथियारों की खरीद-बिक्री से जुड़े निर्देश दिए जाते थे। कारोबारियों को धमकी देना और गिरोह के सदस्यों को नई जिम्मेदारियां सौंपना भी इसी नेटवर्क के माध्यम से किया जाता था।

जेल के भीतर से लगातार संचालित हो रही आपराधिक गतिविधियों की शिकायत मिलने के बाद परसुडीह थाना पुलिस ने सुजीत सिन्हा को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। तीन दिनों तक चली गहन पूछताछ में उसने कई ऐसे खुलासे किए, जिनसे पुलिस अधिकारियों को पूरे नेटवर्क की परतें समझने में मदद मिली।
पूछताछ के दौरान उसने बताया कि अखिलेश सिंह की हत्या की योजना उसके पूर्व करीबी सहयोगी सुधीर दुबे ने बनाई थी। सुधीर दुबे बिहार के बक्सर जिले के कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र स्थित ढकाइच गांव का रहने वाला है।
पुलिस के अनुसार, हत्या की इस हाई-प्रोफाइल साजिश को अंजाम देने के लिए नागालैंड से एक AK-47 राइफल और चार अत्याधुनिक पिस्तौलें मंगवाई गई थीं। इन हथियारों में दो बरेटा पिस्तौल और दो 200 Z कंपनी की पिस्तौलें शामिल थीं। बताया गया कि प्रत्येक पिस्तौल की कीमत लगभग साढ़े तीन लाख रुपये चुकाई गई थी।
सुजीत सिन्हा के इस खुलासे के बाद पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और पूरे नेटवर्क की निगरानी बढ़ा दी गई। समय रहते कार्रवाई होने के कारण हत्या की यह बड़ी साजिश नाकाम कर दी गई। वर्तमान में कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह दुमका जेल में बंद है।
पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि सुधीर दुबे के खिलाफ पहले से ही कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। सोनारी निवासी अमित सिंह की हत्या, साकची गोलीकांड सहित उसके खिलाफ एक दर्जन से अधिक संगीन मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं।
जानकारी के अनुसार, एक समय सुधीर दुबे अखिलेश सिंह का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था, लेकिन बाद में गैंग के भीतर वर्चस्व और आपसी विवाद के कारण दोनों के संबंध पूरी तरह खराब हो गए और वे एक-दूसरे के कट्टर विरोधी बन गए।
सुजीत सिन्हा के जेल से गिरोह संचालन का मामला सबसे पहले गंभीर रूप से तब सामने आया, जब नवंबर 2019 में CID के तत्कालीन डीएसपी अनिमेष गुप्ता ने परसुडीह थाना में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि घाघीडीह सेंट्रल जेल के भीतर से हत्या की साजिशें रची जा रही थीं, कारोबारियों से रंगदारी मांगी जा रही थी और पूरे गैंग का संचालन जेल से ही किया जा रहा था।
इसके बाद शुरू हुई जांच में कई अहम जानकारियां सामने आईं। पुलिस रिमांड के दौरान सुजीत सिन्हा ने अपने गिरोह की कार्यप्रणाली, हथियारों की सप्लाई चेन और झारखंड के विभिन्न जिलों में फैले आपराधिक नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण राज खोले।
जांच एजेंसियों के अनुसार, सुजीत सिन्हा का नेटवर्क केवल जमशेदपुर या कोल्हान क्षेत्र तक सीमित नहीं था। उसका प्रभाव झारखंड के कई जिलों तक फैला हुआ था और विभिन्न अपराधी गिरोहों के साथ उसके संपर्क भी सामने आए थे।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके गैंग में कई इनामी और कुख्यात अपराधी शामिल थे। इनमें कृणाल सिंह, सोनू सिंह, विकास सिंह, सेंटी उर्फ अभिजीत सिंह, अमन साव, विशाल सिंह, साहिल मलिक, बबलू खान, हरि तिवारी, मुकेश कुमार, आशीष साहू, शोएब अंसारी, रिजवान अंसारी, प्रदीप तिवारी, इमरान उर्फ साहिल और बबलू अंसारी जैसे नाम शामिल बताए गए हैं।
जांच एजेंसियों का मानना था कि गिरोह के अलग-अलग सदस्य विभिन्न क्षेत्रों में रंगदारी, हथियारों की व्यवस्था, शूटर उपलब्ध कराने और अन्य आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने की जिम्मेदारी निभाते थे।
पुलिस के अनुसार, जेल में रहते हुए भी सुजीत सिन्हा की बढ़ती आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए जून 2021 में उसे घाघीडीह सेंट्रल जेल से धनबाद जेल स्थानांतरित कर दिया गया था। प्रशासन का उद्देश्य जेल के भीतर से चल रहे उसके नेटवर्क को कमजोर करना और गैंग के सदस्यों से उसका संपर्क समाप्त करना था।
इससे पहले 11 अक्टूबर 2017 को कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह को गुरुग्राम से गिरफ्तार कर जमशेदपुर लाया गया था। इसके बाद झारखंड के कई बड़े गैंगों के बीच वर्चस्व की लड़ाई और भी तेज हो गई थी।
सुजीत सिन्हा के मामले ने एक बार फिर जेल सुरक्षा व्यवस्था और संगठित अपराध के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए यह मामला इस बात का उदाहरण बना कि आधुनिक तकनीक, फर्जी सिम कार्ड और मोबाइल फोन के जरिए अपराधी जेल में रहते हुए भी अपने नेटवर्क को सक्रिय बनाए रख सकते हैं।
पुलिस का कहना है कि संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल अपराधियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जेलों के भीतर संचार व्यवस्था पर सख्त निगरानी, अवैध मोबाइल नेटवर्क पर रोक और आपराधिक गिरोहों की वित्तीय गतिविधियों पर लगातार नजर रखना भी उतना ही आवश्यक है।















