Giridih News : मरांग बुरु संरक्षण को लेकर हेमंत सोरेन का बड़ा बयान, आदिवासी संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का दिया भरोसा
Giridih News : पीरटांड़ के मधुबन मेला मैदान में दो दिवसीय मरांग बुरु धर्मगढ़ महासम्मेलन का समापन, पारसनाथ पहाड़ को आदिवासियों का धार्मिक स्थल घोषित करने की उठी मांग
Giridih News : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पीरटांड़ में मरांग बुरु धर्मगढ़ महासम्मेलन के समापन पर कहा कि सरकार मरांग बुरु के संरक्षण और आदिवासी संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सम्मेलन में पारसनाथ पहाड़ को आदिवासियों का धार्मिक स्थल घोषित करने की मांग उठाई गई।
Giridih News: झारखंड के गिरिडीह जिले के पीरटांड़ स्थित मधुबन मेला मैदान में मरांग बुरु के संरक्षण और आदिवासी समाज के धार्मिक एवं संवैधानिक अधिकारों को लेकर आयोजित दो दिवसीय मरांग बुरु धर्मगढ़ महासम्मेलन का गुरुवार को समापन हो गया। मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस महासम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में संथाल समाज के श्रद्धालु, सामाजिक प्रतिनिधि और गणमान्य लोग शामिल हुए। सम्मेलन के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आदिवासी समाज को संबोधित करते हुए मरांग बुरु के संरक्षण और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज को संविधान और कानून के दायरे में जो अधिकार प्राप्त हैं, उनका हनन नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मरांग बुरु के संरक्षण और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार हरसंभव कदम उठाएगी।

महासम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मरांग बुरु आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसके संरक्षण के साथ-साथ आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना भी आवश्यक है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार आदिवासी समाज के अधिकारों के प्रति गंभीर है और कानून एवं संविधान के तहत प्राप्त अधिकारों का उल्लंघन नहीं होने दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब मरांग बुरु और पारसनाथ पहाड़ को लेकर आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान, आस्था और अधिकारों से जुड़े मुद्दे सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं।
हालांकि, सम्मेलन में उठाई गई मांगों और सरकार की प्रतिबद्धता के बीच आगे की कार्रवाई को लेकर समाज की निगाहें प्रशासनिक एवं सरकारी स्तर पर होने वाले निर्णयों पर रहेंगी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज को वर्तमान प्रतिस्पर्धा के दौर में शिक्षित, जागरूक और संगठित होने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को अपनी पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूक होना बेहद जरूरी है। शिक्षा और संगठन समाज को मजबूत बनाने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति के साथ जीवन जीने की अपनी विशिष्ट परंपरा और संस्कृति के लिए जाना जाता है। ऐसे में समाज को अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक जीवनशैली को सुरक्षित रखते हुए विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उनका संदेश केवल धार्मिक और सांस्कृतिक संरक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक एकजुटता को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया।
मरांग बुरु धर्मगढ़ महासम्मेलन के समापन समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। आदिवासी संस्कृति की झलक पेश करते हुए पारंपरिक नृत्य और मांदर की थाप के बीच मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया।
आयोजन समिति की ओर से मुख्यमंत्री को दिशोम मांझीथान का चित्र और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
समारोह में उपस्थित लोगों के बीच आदिवासी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था का विशेष माहौल देखने को मिला। पारंपरिक स्वागत ने महासम्मेलन की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता को भी प्रदर्शित किया।
महासम्मेलन के दौरान मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष फागू बेसरा ने पारसनाथ पहाड़ को आदिवासियों का धार्मिक स्थल घोषित करने की मांग उठाई।
यह मांग सम्मेलन के प्रमुख विषयों में शामिल रही। आदिवासी समाज के धार्मिक अधिकारों और पारंपरिक आस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित इस महासम्मेलन में पारसनाथ पहाड़ की धार्मिक पहचान को लेकर चर्चा की गई।
फागू बेसरा ने सम्मेलन के मंच से इस मांग को सामने रखा। अब इस मांग को लेकर आगे क्या पहल होती है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।
मरांग बुरु और पारसनाथ पहाड़ से जुड़ा मुद्दा आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से संबंधित है। ऐसे में इस विषय पर संवाद और संबंधित पक्षों की मांगों पर विचार करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मरांग बुरु धर्मगढ़ महासम्मेलन के समापन समारोह में झारखंड के कई जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन, राज्यसभा सांसद डॉ. सरफराज अहमद, मेयर प्रमिला मेहरा और दिवंगत मंत्री की पत्नी श्वेता शर्मा सहित कई प्रमुख लोग शामिल हुए।
इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भी महासम्मेलन में भाग लिया।
दो दिवसीय इस आयोजन में मरांग बुरु के संरक्षण, आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान, संवैधानिक अधिकारों और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े विषय प्रमुखता से सामने आए।
पीरटांड़ के मधुबन मेला मैदान में आयोजित मरांग बुरु धर्मगढ़ महासम्मेलन ने आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर प्रमुखता से सामने लाया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में संरक्षण, अधिकारों की रक्षा, शिक्षा और जागरूकता पर जोर दिया। वहीं, सम्मेलन में पारसनाथ पहाड़ को आदिवासियों का धार्मिक स्थल घोषित करने की मांग भी उठाई गई।
अब इस महासम्मेलन के बाद आदिवासी समाज की मांगों और मरांग बुरु के संरक्षण को लेकर आगे होने वाली पहल पर सभी की नजरें रहेंगी।









