Jamshedpur News : लौहनगरी में भारी वाहनों के लिए एक समान नो एंट्री व्यवस्था नहीं होने से बढ़ा हादसों का खतरा, 15 से अधिक लोग घायल; हादसे के बाद कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
Jamshedpur News : जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में पिछले 15 दिनों में 15 से अधिक सड़क हादसों में करीब 12 लोगों की मौत और 15 से अधिक लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। अलग-अलग क्षेत्रों में भारी वाहनों के प्रवेश के लिए अलग-अलग समय निर्धारित होने से ट्रेलर, हाइवा, स्लैग टैंकर और अन्य भारी वाहन रिहायशी इलाकों से गुजर रहे हैं। इससे स्कूल जाने वाले बच्चों, पैदल राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जमशेदपुर को औद्योगिक शहर के रूप में देशभर में पहचान मिली है, लेकिन शहर की सड़कों पर बढ़ता भारी वाहनों का दबाव अब नागरिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। मुख्य सड़कों से लेकर सहायक मार्गों तक भारी वाहनों की आवाजाही कई इलाकों में बेखौफ जारी है। पिछले करीब 15 दिनों के दौरान जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों में हुए सड़क हादसों ने यातायात व्यवस्था की गंभीर कमियों को सामने ला दिया है।

उपलब्ध घटनाक्रम के अनुसार, इस अवधि में 15 से अधिक सड़क दुर्घटनाओं में करीब 12 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 15 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों में पैदल राहगीर, दोपहिया वाहन सवार और युवा शामिल हैं। लगातार सामने आ रहे हादसों के कारण लोगों में डर और आक्रोश दोनों बढ़ रहा है।
शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक यानी नो एंट्री को लेकर एकरूपता नहीं होने की समस्या सबसे ज्यादा गंभीर नजर आ रही है। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर नो एंट्री लागू होने के कारण भारी वाहन चालक वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। यही वैकल्पिक रास्ते कई बार घनी आबादी वाले इलाकों, स्कूलों के आसपास और संकरी सड़कों से होकर गुजरते हैं।
यातायात विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी एक इलाके में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगने के बाद चालक दूसरे मार्ग की ओर रुख करते हैं। इससे उस मार्ग पर अचानक भारी वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। यदि पूरे शहर में यातायात के लिए एक समन्वित और समान व्यवस्था नहीं हो, तो एक सड़क पर लगाया गया प्रतिबंध दूसरी सड़क के लिए खतरा बन सकता है।
शनिवार को गोविंदपुर के अन्ना चौक के पास हुए हादसे ने शहर को झकझोर दिया। सड़क किनारे खड़ी सात वर्षीय बच्ची आरोही कुमारी को तेज रफ्तार स्कूल वाहन ने अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। नो एंट्री लागू करने की मांग को लेकर लोगों ने करीब छह घंटे तक मुख्य मार्ग को जाम रखा। विरोध के बाद प्रशासन ने गोविंदपुर क्षेत्र में सुबह से रात 10 बजे तक नो एंट्री लागू करने का आदेश जारी किया।
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या किसी मासूम की जान जाने के बाद ही प्रशासन को यातायात व्यवस्था में बदलाव की जरूरत महसूस होती है? यदि संबंधित क्षेत्र में भारी वाहनों का खतरा पहले से मौजूद था, तो दुर्घटना से पहले प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए?
जमशेदपुर के कई प्रमुख मार्गों पर सुबह के समय भारी वाहनों की आवाजाही नागरिकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। बर्मामाइंस के ट्यूब कंपनी गोलचक्कर से लेकर एचएसएम गेट और मानगो बड़ा गोलचक्कर जैसे क्षेत्रों में स्कूल जाने और लौटने के समय भी भारी वाहनों की आवाजाही की शिकायतें सामने आती रही हैं।
इन इलाकों में सुबह के समय बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, अभिभावक और दोपहिया वाहन चालक सड़कों पर रहते हैं। ऐसे में तेज रफ्तार ट्रेलर, हाइवा और अन्य भारी वाहनों की मौजूदगी दुर्घटना की आशंका को बढ़ा देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यातायात नियमों की निगरानी के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों से भी इस स्थिति की जांच की जा सकती है।
पिछले दिनों आकाशदीप प्लाजा के पास एक ट्रेलर ने बाइक सवार युवक को पीछे से टक्कर मार दी। हादसा इतना गंभीर था कि युवक की जान चली गई। गोलमुरी क्षेत्र में भी ट्रेलर की चपेट में आने से एक अज्ञात पैदल राहगीर की मौत की घटना सामने आई।
वहीं रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात बिष्टुपुर थाना क्षेत्र के सीएच एरिया आर्मी कैंप के पास तेज रफ्तार स्पोर्ट्स बाइक डिवाइडर से टकरा गई। दुर्घटना में ओडिशा की रहने वाली 26 वर्षीय एंजल गुड़िया की मौत हो गई, जबकि बाइक चालक घायल हो गया।
इन घटनाओं को केवल अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं के रूप में देखने के बजाय शहर की व्यापक यातायात व्यवस्था के संदर्भ में भी देखना जरूरी है। खासकर तब, जब कम समय में लगातार कई जानें जा रही हों।
सड़क हादसों के बाद पुलिस और प्रशासन की सक्रियता दिखाई देती है, लेकिन नागरिकों का सवाल है कि दुर्घटना से पहले निगरानी और रोकथाम की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। भारी वाहनों के लिए नो एंट्री का पालन, वाहन की गति पर नियंत्रण, स्कूल और रिहायशी इलाकों में निगरानी तथा सीसीटीवी के जरिए नियमों का उल्लंघन पकड़ने की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।
सिर्फ दुर्घटना के बाद कुछ घंटों या कुछ दिनों के लिए सख्ती बढ़ाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की है कि पूरे शहर के लिए वैज्ञानिक यातायात अध्ययन के आधार पर भारी वाहनों के प्रवेश और निकासी की स्पष्ट नीति तैयार की जाए।
स्थानीय नागरिकों की प्रमुख मांग है कि जमशेदपुर शहर में भारी वाहनों के लिए एक समान और स्पष्ट नो एंट्री व्यवस्था लागू की जाए। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग समय निर्धारित करने के बजाय ऐसा यातायात प्लान तैयार किया जाए, जिससे भारी वाहनों को आबादी वाले इलाकों से गुजरने की जरूरत ही कम हो।
इसके साथ ही स्कूलों के आसपास, बाजार क्षेत्रों और घनी आबादी वाले इलाकों में विशेष निगरानी की जरूरत है। भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण, नियमित जांच और नियम तोड़ने वाले चालकों पर प्रभावी कार्रवाई भी जरूरी है।

जमशेदपुर की औद्योगिक जरूरतों के कारण भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद करना व्यावहारिक नहीं है। लेकिन औद्योगिक गतिविधियों और आम नागरिकों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
पिछले 15 दिनों में हुई मौतों और घायलों की संख्या ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि शहर की वर्तमान यातायात व्यवस्था नागरिकों को कितनी सुरक्षा दे पा रही है। यदि अलग-अलग नो एंट्री व्यवस्था के कारण भारी वाहन लगातार वैकल्पिक रास्तों पर जा रहे हैं, तो पूरे शहर के स्तर पर नए सिरे से यातायात योजना बनाने की जरूरत है।
जमशेदपुर के लोगों को ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें किसी सड़क पर नो एंट्री लागू कराने के लिए किसी मासूम की जान जाने का इंतजार न करना पड़े। सड़क सुरक्षा का लक्ष्य दुर्घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि दुर्घटना होने से पहले उसे रोकना होना चाहिए।














