Jamshedpur News : जमशेदपुर में बिष्टुपुर स्थित आवास से देर रात हुई गिरफ्तारी, मेडिकल जांच के बाद दोनों को रांची ले गई ED की टीम
Jamshedpur News : जमशेदपुर में कथित 734 करोड़ रुपये के GST घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने बड़ी कार्रवाई की है। स्क्रैप कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल को गिरफ्तार किया गया। दोनों को मेडिकल जांच के बाद रांची ले जाया गया।
जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर में कथित 734 करोड़ रुपये के GST फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने स्क्रैप कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल को गिरफ्तार किया है। दोनों की गिरफ्तारी बिष्टुपुर स्थित आवास से देर रात करीब साढ़े 12 बजे किए जाने की जानकारी सामने आई है। गिरफ्तारी के बाद ED की टीम दोनों को मेडिकल जांच के लिए एमजीएम अस्पताल लेकर पहुंची। मेडिकल जांच पूरी होने के बाद दोनों को रांची ले जाया गया।
ED की यह कार्रवाई उस कथित GST फर्जीवाड़े की जांच का हिस्सा है, जिसमें फर्जी कंपनियों और इनवॉइस के माध्यम से बड़े पैमाने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल करने के आरोपों की जांच की जा रही है। उपलब्ध जांच रिपोर्टों के मुताबिक, इस पूरे मामले में पहले भी कई कारोबारियों की गिरफ्तारी और संपत्तियों पर कार्रवाई हो चुकी है।

जानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह ED की रांची टीम ने कथित GST घोटाले के सिलसिले में जमशेदपुर और कोलकाता समेत कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया था। जमशेदपुर में बिष्टुपुर सहित कई स्थानों पर कार्रवाई की गई। इनमें बबलू जायसवाल और उनके अकाउंटेंट से जुड़े ठिकाने भी शामिल बताए गए हैं। कोलकाता और अन्य स्थानों पर भी संबंधित कारोबारियों एवं कंपनियों से जुड़े परिसरों की जांच की गई।
तलाशी के दौरान ED की टीम ने कारोबारी दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों समेत कई सामग्रियों की जांच की। मीडिया रिपोर्टों में दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री मिलने की बात कही गई है। हालांकि, बरामद सामग्री को लेकर जांच एजेंसी की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
इस मामले की जांच का एक प्रमुख पहलू कथित तौर पर बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस तैयार करना और उसके आधार पर ITC का लाभ लेना है। ED की पिछली जांच के संबंध में सामने आई जानकारी के मुताबिक, कुछ ऐसी कंपनियों से इनवॉइस लिए जाने की बात सामने आई थी, जिनके वास्तविक अस्तित्व को लेकर सवाल उठे थे। इन कथित फर्जी इनवॉइस के जरिए GST के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किए जाने की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस तरह की गतिविधियों के जरिए सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच सकता है। इसी आधार पर GST से जुड़े मूल मामले के साथ-साथ कथित अवैध वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की भी जांच की जा रही है।
इस पूरे मामले में ED की पिछली कार्रवाई के दौरान 135 कथित फर्जी या कागजी कंपनियों के नेटवर्क का भी उल्लेख सामने आया था। जांच के अनुसार, इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी बिलिंग और GST इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े लेनदेन के लिए किया गया। वर्ष 2025 में ED की कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने दावा किया था कि सिंडिकेट से जुड़े लोगों ने बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के फर्जी GST चालान जारी किए और उनके माध्यम से ITC का लाभ लिया।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े मामले में पहले जमशेदपुर और कोलकाता के कई कारोबारी ED की जांच के दायरे में आए थे। कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। ED ने इससे पहले कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने और बैंक खातों में मौजूद राशि को फ्रीज करने जैसी कार्रवाई भी की थी।
734 करोड़ रुपये के कथित GST फर्जीवाड़े का मामला नया नहीं है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई पिछले कुछ वर्षों से जारी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, GST खुफिया महानिदेशालय यानी DGGI की जांच के बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की थी। इस मामले में पहले भी कई कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया था।
ED की पिछली जांच में कथित GST फर्जीवाड़े से जुड़े फर्जी चालानों, ITC और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की गई थी। 2025 में एजेंसी ने मामले से जुड़े एक कारोबारी की 15.41 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त करने की जानकारी दी थी। इसके अलावा कथित अपराध की आय से जुड़ी अन्य संपत्तियों पर भी कार्रवाई की गई थी।
अब ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों को मेडिकल जांच के बाद रांची ले जाया गया है। वहां ED की टीम उनसे कथित GST फर्जीवाड़े, कारोबारी लेनदेन, कंपनियों और फर्जी इनवॉइस से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ कर सकती है।
जांच में यह भी देखा जा सकता है कि कथित फर्जी कंपनियों और इनवॉइस का नेटवर्क किस तरह संचालित हुआ, किन कारोबारियों तक कथित ITC पहुंचा और इससे जुड़े वित्तीय लेनदेन का पूरा रास्ता क्या था।
हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। ED की कार्रवाई और जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज एवं साक्ष्य ही मामले की आगे की दिशा तय करेंगे।
बबलू जायसवाल और राज जायसवाल को जमशेदपुर से रांची ले जाने के बाद अब मामले की जांच ED की रांची टीम के स्तर पर आगे बढ़ेगी। 734 करोड़ रुपये के कथित GST घोटाले से जुड़े इस मामले में पहले से चल रही जांच के बीच पिता-पुत्र की गिरफ्तारी से जांच का दायरा और विस्तृत हो सकता है।

फिलहाल ED की कार्रवाई के बाद जमशेदपुर में यह मामला चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। आने वाले समय में पूछताछ और जांच से सामने आने वाली जानकारी से यह स्पष्ट होगा कि कथित GST फर्जीवाड़े में बबलू जायसवाल और राज जायसवाल की भूमिका को लेकर जांच एजेंसी के पास क्या साक्ष्य हैं और पूरे नेटवर्क में अन्य किन लोगों या संस्थाओं की भूमिका सामने आती है।













