Giridih News : गिरिडीह के बगोदर, सरिया, बिरनी, गावां, गांडेय, डुमरी और पीरटांड़ प्रखंडों में हाथियों के झुंड से ग्रामीण परेशान, फसल और मकानों को नुकसान; सुरक्षा और मुआवजे की मांग तेज
Giridih News : गिरिडीह जिले में पिछले छह महीनों से हाथियों के झुंड की लगातार आवाजाही ने ग्रामीण इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। कई गांवों में फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचने की शिकायत है, जबकि हाथियों के हमलों में कई लोगों की जान जाने और घायल होने की घटनाएं सामने आई हैं। ग्रामीण वन विभाग और प्रशासन से प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था और त्वरित राहत की मांग कर रहे हैं।
Giridih News : झारखंड के गिरिडीह जिले में पिछले कई महीनों से हाथियों के झुंड की लगातार आवाजाही ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है। जिले के कई प्रखंडों के गांवों में हाथियों के पहुंचने से ग्रामीणों में भय का माहौल है। बगोदर, सरिया, बिरनी, गावां, गांडेय, डुमरी और पीरटांड़ क्षेत्र में हाथियों द्वारा फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचाए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, यह समस्या नई नहीं है। पिछले करीब 15 वर्षों से क्षेत्र के कई गांव हाथियों की आवाजाही से प्रभावित रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय में घटनाओं की गंभीरता बढ़ने का दावा किया जा रहा है। खेतों में तैयार फसल को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ ग्रामीणों को अपने घरों और आसपास के इलाकों में भी सतर्क रहना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, अप्रैल और मई के दौरान सरिया क्षेत्र के परसिया में 65 वर्षीय जागेश्वर ठाकुर और बंगराकला में 47 वर्षीय रधिया देवी की हाथियों के हमले में मौत हुई। इसके बाद जुलाई में भी अलग-अलग इलाकों में घटनाएं सामने आईं। गावां की सारो देवी, बिरनी के उपेंद्र यादव और रामचंद्र यादव तथा सरिया की शांति देवी की भी हाथियों के हमले में जान जाने की जानकारी दी गई है।
वहीं, हाल ही में पीरटांड़ क्षेत्र में एक दंपत्ति पर हाथियों द्वारा हमला किए जाने की घटना सामने आई। इस घटना में मंगरा मांझी की मौके पर ही मौत होने की बात सामने आई है, जबकि उनकी पत्नी बड़की देवी गंभीर रूप से घायल बताई जा रही हैं। घटना के बाद इलाके में ग्रामीणों के बीच चिंता और बढ़ गई है।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बीच ग्रामीण वन विभाग और जिला प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के झुंड को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने और लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त एवं प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हालांकि, विभाग की ओर से इस संबंध में उठाए गए कदमों और उपलब्ध संसाधनों की स्थिति की आधिकारिक जानकारी अलग-अलग स्तर पर स्पष्ट होनी बाकी है।
ग्रामीणों की मांग है कि संवेदनशील गांवों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई जाए। साथ ही हाथियों की गतिविधियों की समय रहते जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए, ताकि लोग सुरक्षित स्थानों पर जा सकें। प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने और फसल एवं मकान के नुकसान का आकलन करने की मांग भी उठ रही है।











