Giridih Kanwar Yatra 2026 : ऐतिहासिक उत्तरवाहिनी राजदाह धाम से जल उठाकर शुरू की आस्था की यात्रा, ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंजा पूरा धाम
Giridih Kanwar Yatra 2026: गिरिडीह के सरिया निवासी युवा शिवभक्त विराट सिंह लगातार चौथी बार 51 लीटर पवित्र जल लेकर लगभग 300 किलोमीटर लंबी पैदल कांवड़ यात्रा पर निकले। उत्तरवाहिनी राजदाह धाम से शुरू हुई इस यात्रा में श्रद्धालुओं ने भव्य विदाई दी।
सावन माह में भगवान शिव की भक्ति का उत्साह पूरे देश में देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में झारखंड के गिरिडीह जिले के सरिया निवासी युवा शिवभक्त विराट सिंह लगातार चौथी बार 51 लीटर पवित्र जल लेकर लगभग 300 किलोमीटर लंबी पैदल कांवड़ यात्रा पर रवाना हुए हैं। उनकी इस कठिन और प्रेरणादायक यात्रा ने क्षेत्र के श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह का माहौल बना दिया है।
विराट सिंह ने अपनी कांवड़ यात्रा की शुरुआत ऐतिहासिक उत्तरवाहिनी राजदाह धाम से की। यहां उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया और यात्रा की सफलता की कामना की। धार्मिक अनुष्ठान के बाद उन्होंने पवित्र जल अपनी कांवड़ में भरकर पैदल यात्रा आरंभ की।

उत्तरवाहिनी राजदाह धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
यात्रा प्रारंभ होने से पहले उत्तरवाहिनी राजदाह धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। धाम परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंज उठा। भक्तों ने भगवान शिव की आराधना करते हुए विराट सिंह को शुभकामनाएं दीं और उनकी यात्रा की सफलता के लिए प्रार्थना की।
पूरे वातावरण में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया और उनके साहस एवं समर्पण की सराहना की।
लगातार चौथी बार निभा रहे आस्था का संकल्प
विराट सिंह पिछले चार वर्षों से लगातार सावन माह में कठिन कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। इस वर्ष भी उन्होंने 51 लीटर पवित्र जल लेकर लगभग 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा का संकल्प लिया है। इतनी लंबी दूरी तय करना शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन शिवभक्ति के प्रति उनकी अटूट आस्था उन्हें लगातार इस मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विराट सिंह की यह यात्रा युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। हर वर्ष उनकी यात्रा को देखने और उन्हें विदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
51 लीटर जल के साथ कठिन होती है यात्रा
कांवड़ यात्रा सामान्य रूप से भी कठिन मानी जाती है, लेकिन 51 लीटर पवित्र जल के साथ लगभग 300 किलोमीटर तक पैदल चलना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को मौसम, थकान और लंबी दूरी जैसी कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
इसके बावजूद शिवभक्त अपनी श्रद्धा और विश्वास के बल पर यात्रा पूरी करते हैं। विराट सिंह का कहना है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा और श्रद्धालुओं के आशीर्वाद से उन्हें हर वर्ष यह यात्रा पूरी करने की शक्ति मिलती है।
सावन में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में सावन माह को भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु विभिन्न पवित्र नदियों और तीर्थस्थलों से जल लेकर शिवालयों तक कांवड़ यात्रा करते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई कांवड़ यात्रा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष सावन में कांवड़ यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
क्षेत्र में बना भक्ति का माहौल
विराट सिंह की यात्रा को लेकर सरिया सहित आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक उत्साह देखने को मिला। यात्रा शुरू होने से पहले लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और सुरक्षित यात्रा की कामना की। कई श्रद्धालुओं ने उनके साथ कुछ दूरी तक पैदल चलकर उनका उत्साहवर्धन भी किया।
धार्मिक आयोजनों और कांवड़ यात्राओं के चलते पूरे क्षेत्र में शिवभक्ति का माहौल बना हुआ है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी लगातार किया जा रहा है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने विराट सिंह
विराट सिंह की यह लगातार चौथी कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि अनुशासन, संकल्प और आत्मविश्वास का भी उदाहरण है। उनकी यह यात्रा बताती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और भगवान के प्रति अटूट विश्वास के साथ कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे युवा समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
गिरिडीह जिले के सरिया निवासी युवा शिवभक्त विराट सिंह की 51 लीटर पवित्र जल के साथ लगभग 300 किलोमीटर लंबी पैदल कांवड़ यात्रा श्रद्धा, समर्पण और संकल्प का प्रेरणादायक उदाहरण है। उत्तरवाहिनी राजदाह धाम से शुरू हुई इस यात्रा ने एक बार फिर सावन माह की आध्यात्मिक ऊर्जा और भगवान शिव के प्रति भक्तों की अटूट आस्था को उजागर किया है। श्रद्धालु उनकी यात्रा की सफलता और सुरक्षित वापसी के लिए भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना कर रहे हैं।















