Jharkhand Student Protest : JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में 25 जुलाई से चल रहा सत्याग्रह समाप्त, छात्र संगठनों के बीच आगे की रणनीति पर मंथन जारी
Jharkhand Student Protest : रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 26 दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन समाप्त हो गया। सरकार द्वारा प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बाद जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा की।
Jharkhand Student Protest : झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी (Jharkhand Public Service Commission) और जेएसएससी (Jharkhand Staff Selection Commission) परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के विरोध में पिछले 26 दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन बुधवार को समाप्त हो गया। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 25 जुलाई से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर बैठे जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच ने राज्य सरकार द्वारा प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन खत्म करने की आधिकारिक घोषणा की।
हालांकि आंदोलन पूरी तरह समाप्त होने की तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं हुई है। आंदोलन में शामिल दूसरे छात्र समूह ने तत्काल निर्णय लेने के बजाय बैठक कर आगे की रणनीति तय करने का फैसला किया है। इससे आंदोलन स्थल पर छात्रों के बीच मतभेद भी खुलकर सामने आए हैं।
जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र 25 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना और सत्याग्रह कर रहे थे। अभ्यर्थियों का आरोप था कि राज्य की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता का अभाव रहा है तथा चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
छात्र लगातार निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार और भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे थे। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने दिन-रात धरनास्थल पर रहकर अपनी आवाज बुलंद की।

मंच के छात्र नेता रामावतार महतो ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने मंच की सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा छात्र हित में लिए गए निर्णय ऐतिहासिक हैं और इससे लाखों प्रतियोगी छात्रों में न्याय की उम्मीद जगी है।
रामावतार महतो ने कहा,
“हमने 25 जुलाई से छात्रों के भविष्य और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के लिए सत्याग्रह शुरू किया था। सरकार ने हमारी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया है, इसलिए छात्र हित को ध्यान में रखते हुए हम अपना आंदोलन समाप्त कर रहे हैं।”
उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने संवाद और समाधान का रास्ता अपनाया, जिससे आंदोलन को सम्मानजनक निष्कर्ष मिला।
छात्रों का आंदोलन मुख्य रूप से जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर था। अभ्यर्थियों का कहना था कि कई परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, चयन प्रक्रिया में अनियमितता, मूल्यांकन में पारदर्शिता की कमी तथा भर्ती प्रक्रिया में देरी जैसी समस्याओं ने युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल थे:
- कथित परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच
- दोषी अधिकारियों और गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई
- पारदर्शी भर्ती प्रणाली लागू करना
- लंबित नियुक्ति प्रक्रियाओं में तेजी
- भविष्य की परीक्षाओं के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था
इन मांगों को लेकर छात्र लगातार सरकार पर दबाव बना रहे थे।
जहां एक ओर जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी, वहीं दूसरे छात्र समूह ने इस निर्णय पर तुरंत सहमति नहीं जताई। बुधवार दोपहर तक दूसरे गुट के छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बैठक करते रहे और आंदोलन की आगामी दिशा पर विचार-विमर्श करते रहे।
सूत्रों के अनुसार, इस गुट का मानना है कि सरकार के निर्णय की लिखित प्रक्रिया और उसके क्रियान्वयन पर स्पष्टता मिलने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाना चाहिए। हालांकि संकेत मिले हैं कि वे भी जल्द अपना आधिकारिक रुख सार्वजनिक कर सकते हैं।
आंदोलन समाप्त करने वाले छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में उठाए गए कदम से अभ्यर्थियों का विश्वास मजबूत हुआ है।
रामावतार महतो ने कहा कि यह केवल आंदोलन की समाप्ति नहीं बल्कि छात्र संघर्ष की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने सभी अभ्यर्थियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपने अध्ययन और आगामी परीक्षाओं की तैयारी में लौटने की अपील भी की।
धरनास्थल पर मौजूद कई छात्रों ने कहा कि यदि सरकार अपने वादों को समयबद्ध तरीके से लागू करती है, तो इससे भविष्य में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आंदोलन समाप्त होने के बावजूद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने निर्णयों को धरातल पर लागू करना है। झारखंड में पिछले कुछ वर्षों से भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं, जिससे प्रतियोगी छात्रों में असंतोष बढ़ा है।
यदि जांच प्रक्रिया पारदर्शी रहती है और दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई होती है, तो इससे राज्य की भर्ती व्यवस्था में विश्वास बहाल करने में मदद मिल सकती है। वहीं यदि घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित रहती हैं, तो भविष्य में फिर से छात्र आंदोलन तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच ने अपना सत्याग्रह समाप्त कर दिया है, जबकि दूसरे छात्र संगठन की बैठक जारी है। सभी की नजर अब सरकार द्वारा घोषित फैसलों के क्रियान्वयन और दूसरे छात्र समूह की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई है।
26 दिनों तक चले इस आंदोलन ने झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, युवाओं के भविष्य और सरकारी भर्ती प्रणाली को लेकर एक व्यापक बहस खड़ी कर दी है। आने वाले दिनों में सरकार के कदम तय करेंगे कि यह आंदोलन वास्तव में छात्रों के लिए ऐतिहासिक साबित होता है या नहीं।














