Himanshu Singh Murder Case : बिष्टुपुर डीडी बार के बाहर हुए हिमांशु सिंह हत्याकांड की जांच में एसआईटी को बड़ी सफलता मिली है। अब तक पांच आरोपियों को पकड़ा जा चुका है, जबकि फरार मुख्य आरोपियों की तलाश में झारखंड समेत बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लगातार छापेमारी की जा रही है।
Himanshu Singh Murder Case : जमशेदपुर के चर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड में एसआईटी ने तीन और किशोरों को पकड़ा है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल कुल्हाड़ी, वाहन, खून से सने कपड़े और सीसीटीवी फुटेज समेत कई अहम साक्ष्य जब्त किए हैं। फरार आरोपियों की तलाश में तीन राज्यों में छापेमारी जारी है।
जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित डीडी (डबल डाउन) बार के बाहर हुए चर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड और प्रत्यूष सिंह पर जानलेवा हमले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और किशोरों को हिरासत में लिया है। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, घटना के मुख्य आरोपी समेत अन्य फरार अपराधियों की तलाश में झारखंड के अलावा बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लगातार छापेमारी की जा रही है।
जिले के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. एहतेशाम वकारिब के निर्देशन में गठित एसआईटी इस मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हुई है। पुलिस का दावा है कि वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे हत्याकांड की परतें खुल चुकी हैं और जल्द ही सभी फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्यों पर पुलिस का जोर
एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारिब ने प्रेस वार्ता में बताया कि पुलिस ने मामले को अदालत में मजबूत ढंग से प्रस्तुत करने के लिए कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए हैं। जांच के दौरान पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई एक छोटी कुल्हाड़ी बरामद की है। यह हथियार आरोपी राज लोहार की निशानदेही पर बरामद किया गया।
इसके अलावा अपराध में इस्तेमाल की गई एक बुलेट मोटरसाइकिल सहित तीन वाहनों को भी जब्त कर लिया गया है। पुलिस ने घटनास्थल और आरोपियों से खून से सने कपड़े, खून के नमूने तथा चप्पलें भी बरामद की हैं। डिजिटल साक्ष्यों के रूप में डीडी बार और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तथा डीवीआर भी कब्जे में लेकर जांच का हिस्सा बनाया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन सभी साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे अदालत में आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें।
बार के अंदर विवाद के बाद रची गई हत्या की साजिश
एसआईटी की जांच में सामने आया है कि पूरी घटना की शुरुआत 27 जून की रात करीब 11:30 बजे डीडी बार के भीतर हुई थी। हिमांशु सिंह और प्रत्यूष सिंह का मुख्य आरोपी विश्वनाथ लोहरा उर्फ बोधरा, सोनू राम सरदार और उनके साथियों के साथ पैसे उड़ाने को लेकर विवाद हुआ था।
बार के कर्मचारियों और मौजूद लोगों ने उस समय विवाद को शांत करा दिया था, लेकिन मुख्य आरोपी विश्वनाथ लोहरा इस घटना से नाराज था। पुलिस के अनुसार, वह तत्काल अपने गांव पहुंचा और वहां से धारदार हथियारों से लैस अपने साथियों को बुलाकर सुनियोजित तरीके से हमला करने की योजना बनाई।
जैसे ही हिमांशु सिंह और प्रत्यूष सिंह बार से बाहर निकले, पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में हिमांशु सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के दौरान 29 जून की शाम उनकी मौत हो गई, जबकि प्रत्यूष सिंह अभी भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं और उनकी हालत पर लगातार चिकित्सकीय निगरानी रखी जा रही है।
पुलिस पर हमला कर आरोपी को छुड़ाने का आरोप
इस हत्याकांड में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। पुलिस के अनुसार, घटना के समय मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप करते हुए एक आरोपी को हिरासत में लिया था। इसी दौरान अन्य हमलावरों ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी।
इतना ही नहीं, आरोपियों ने सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाते हुए पुलिस अभिरक्षा से अपने एक साथी को जबरन छुड़ा लिया और मौके से फरार हो गए। इस दुस्साहस को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस पर हमला करने और आरोपी को हिरासत से छुड़ाने के आरोप में अलग से प्राथमिकी दर्ज की है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में भी सभी आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तकनीकी जांच से खुली कई अहम कड़ियां
एसआईटी ने तकनीकी जांच के माध्यम से कई महत्वपूर्ण सुराग जुटाए हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया।
इन्हीं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 28 जून को सोनू राम सरदार और राज लोहार को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 30 जून को एक अन्य आरोपी को पकड़ा गया, जबकि 2 जुलाई को दो और किशोरों को हिरासत में लिया गया। इस प्रकार अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
तीन राज्यों में लगातार चल रही छापेमारी
एसएसपी ने बताया कि गिरोह के कई नामजद सदस्य गिरफ्तारी के डर से झारखंड छोड़कर फरार हो चुके हैं। उनकी संभावित मौजूदगी को देखते हुए बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में विशेष पुलिस टीमों को भेजा गया है।
एसआईटी लगातार स्थानीय पुलिस के सहयोग से संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। पुलिस को उम्मीद है कि फरार मुख्य आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

शहर की शांति भंग करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शहर में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। एसएसपी ने कहा कि इस हत्याकांड में शामिल प्रत्येक आरोपी की पहचान कर उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिक जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर मजबूत चार्जशीट तैयार की जा रही है ताकि अदालत में दोषियों को सजा दिलाई जा सके।
हिमांशु सिंह हत्याकांड ने जमशेदपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि पुलिस का दावा है कि एसआईटी की त्वरित कार्रवाई, तकनीकी जांच और लगातार की जा रही छापेमारी से मामले का जल्द खुलासा पूरी तरह हो जाएगा और सभी फरार आरोपी कानून के शिकंजे में होंगे।













