Jharkhand News : मुख्यमंत्री के निर्देश पर ओमान से सुरक्षित लौटी सिमडेगा की बेटी प्रीति कुजूर, राज्य सरकार और भारतीय दूतावास के प्रयास से मिली बड़ी राहत

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Jharkhand News : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश पर ओमान में फंसी झारखंड के सिमडेगा की प्रवासी श्रमिक प्रीति कुजूर की सुरक्षित घर वापसी हुई। भारतीय दूतावास और राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष की पहल से मिला न्याय।

Jharkhand News : झारखंड सरकार की त्वरित पहल और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश के बाद ओमान (मस्कट) में फंसी सिमडेगा की प्रवासी श्रमिक प्रीति कुजूर की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित हो गई है। लंबे समय से परेशानियों का सामना कर रही प्रीति कुजूर अब अपने परिवार के बीच लौट रही हैं। राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष, श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग तथा भारतीय दूतावास (मस्कट) के समन्वित प्रयासों से यह संभव हो सका। यह मामला न केवल एक प्रवासी श्रमिक की सुरक्षित वापसी का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संकट की घड़ी में सरकार किस तरह अपने नागरिकों की सहायता के लिए सक्रिय रहती है।

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने पूरे मामले को प्राथमिकता के आधार पर लिया। सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके बाद श्रमायुक्त कार्यालय के अधीन कार्यरत राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष ने बिना देरी किए भारतीय दूतावास (मस्कट) और प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स (POE), रांची से संपर्क स्थापित किया।

जानकारी के अनुसार, नियंत्रण कक्ष ने 23 जून 2026 को पूरा मामला भारतीय दूतावास और पीओई कार्यालय को भेजा। इसके अगले ही दिन यानी 24 जून 2026 को भारतीय दूतावास ने प्रीति कुजूर से संपर्क स्थापित कर उनकी स्थिति की जानकारी ली और उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। इसके बाद लगातार बातचीत और समन्वय के माध्यम से उनकी सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

प्रीति कुजूर झारखंड के सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड स्थित मरारोमा गंझूटोली की रहने वाली हैं। उनके भाई रंतु कुजूर ने 19 जून 2026 को राज्य सरकार से सहायता की अपील करते हुए बताया था कि उनकी बहन विदेश में गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे स्वयं कोई प्रभावी कदम नहीं उठा पा रहे थे। इसके बाद यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आया और कार्रवाई शुरू हुई।

मामले की जांच में सामने आया कि मार्च 2026 में भारत के एक एजेंट ने प्रीति कुजूर को दुबई में ₹45,000 से ₹50,000 प्रति माह वेतन का लालच देकर विदेश भेजने का भरोसा दिया था। लेकिन उन्हें धोखे से दुबई की बजाय ओमान भेज दिया गया। वहां पहुंचने के बाद उन्हें वादे के अनुरूप वेतन नहीं मिला और मात्र ₹23,000 से ₹25,000 प्रति माह पर काम कराया जाने लगा। बेहतर रोजगार के नाम पर किया गया यह छल उनके लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब प्रीति कुजूर ने भारत लौटने की इच्छा जताई। कंपनी के मालिक ने उन्हें वापस भेजने के बदले भारी रकम की मांग की। बताया गया कि परिवार ने किसी तरह ₹1.92 लाख की व्यवस्था कर कंपनी को भुगतान भी किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें घर लौटने की अनुमति नहीं दी गई। इस कारण पूरा परिवार मानसिक तनाव और आर्थिक संकट से गुजर रहा था।

कंपनी मालिक ने यह भी शर्त रखी थी कि दो वर्ष का अनुबंध पूरा होने से पहले यदि प्रीति वापस जाना चाहती हैं तो उन्हें 950 ओमानी रियाल का भुगतान करना होगा। इतनी बड़ी राशि का भुगतान करना परिवार के लिए लगभग असंभव था। ऐसे में राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष ने भारतीय दूतावास को पत्र लिखकर प्रीति की आर्थिक स्थिति से अवगत कराया और कंपनी प्रबंधन से मानवीय आधार पर राहत दिलाने का अनुरोध किया।

भारतीय दूतावास की सक्रिय भूमिका और लगातार बातचीत का सकारात्मक परिणाम सामने आया। दूतावास और नियंत्रण कक्ष के प्रयासों से कंपनी मालिक ने अपनी मांग में बड़ी कटौती करते हुए राशि 950 ओमानी रियाल से घटाकर 600 ओमानी रियाल करने पर सहमति व्यक्त की। आवश्यक राशि जमा होने के बाद कंपनी ने प्रीति कुजूर का पासपोर्ट और अन्य सभी मूल दस्तावेज वापस कर दिए, जिससे उनकी घर वापसी का रास्ता साफ हो गया।

सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्रीति कुजूर 1 अगस्त 2026 को ओमान से भारत के लिए रवाना हुईं। उनके 2 अगस्त 2026 को झारखंड पहुंचने की पुष्टि की गई है। परिवार के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। कई महीनों की चिंता, आर्थिक बोझ और मानसिक पीड़ा के बाद अब परिवार अपनी बेटी के सुरक्षित लौटने का इंतजार कर रहा है।

यह पूरा घटनाक्रम विदेशों में रोजगार के नाम पर सक्रिय फर्जी एजेंटों की बढ़ती गतिविधियों की भी पोल खोलता है। बेहतर वेतन और सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर कई एजेंट युवाओं को गलत जानकारी देकर दूसरे देशों में भेज देते हैं, जहां उन्हें तय शर्तों के अनुरूप काम और वेतन नहीं मिलता। ऐसे मामलों में प्रवासी श्रमिक आर्थिक और कानूनी दोनों तरह की मुश्किलों में फंस जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश जाने से पहले अधिकृत एजेंसियों और सरकारी प्रक्रियाओं की पूरी जांच-पड़ताल करना बेहद आवश्यक है।

राज्य सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि विदेशों और देश के अन्य राज्यों में कार्यरत झारखंड के श्रमिकों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि संकट में फंसे किसी भी प्रवासी श्रमिक को समय पर सहायता उपलब्ध हो। राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष इसी उद्देश्य से लगातार कार्य कर रहा है और जरूरतमंद श्रमिकों को कानूनी, प्रशासनिक तथा समन्वय संबंधी सहायता उपलब्ध करा रहा है।

प्रीति कुजूर की सुरक्षित घर वापसी यह संदेश देती है कि यदि समय पर प्रशासन और संबंधित संस्थाओं से संपर्क किया जाए तो विदेश में फंसे श्रमिकों को भी राहत दिलाई जा सकती है। यह मामला प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा, सरकारी तत्परता और भारतीय दूतावास की सक्रिय भूमिका का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।

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