Jharkhand News : झारखंड के सभी 24 जिलों में विकास भारती बिशुनपुर और ग्लोबसलर्न की साझेदारी से AI आधारित शिक्षण मंच PrepG AI की शुरुआत हुई है। कक्षा 6 से 12 तक के ग्रामीण और जनजातीय विद्यार्थियों को अब व्यक्तिगत डिजिटल शिक्षा, वीडियो लेक्चर और 24 घंटे शैक्षणिक सहायता मिलेगी।
Jharkhand News : झारखंड में शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य के सभी 24 जिलों में अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आधारित शिक्षण मंच प्रेप्जी (PrepG AI) के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक और व्यक्तिगत शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण, दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक संसाधनों की पहुंच अब तक सीमित रही है।
इस महत्वाकांक्षी पहल के लिए विकास भारती बिशुनपुर और ग्लोबसलर्न सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य राज्य के कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपनी सीखने की क्षमता के अनुसार बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
रांची प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विकास भारती बिशुनपुर के सचिव पद्मश्री अशोक भगत और ग्लोबसलर्न की ओर से पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. एस. शिवेंदु ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख विशेषज्ञ और पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
AI आधारित यह शिक्षण मंच राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। साथ ही इसे एनसीईआरटी (NCERT) और सीबीएसई (CBSE) के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुरूप विकसित किया गया है ताकि विद्यार्थियों को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के अनुसार अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो सके।
इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता, समझ और प्रदर्शन का विश्लेषण कर उसके लिए व्यक्तिगत अध्ययन योजना तैयार करता है। इससे विद्यार्थियों को वही विषय अधिक पढ़ाए जाते हैं, जिनमें उन्हें अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होती है।
प्रेप्जी मंच पर विद्यार्थियों को कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें AI शिक्षक, प्रारंभिक मूल्यांकन परीक्षा, अवधारणा निर्माण, 5,200 से अधिक वीडियो व्याख्यान, अध्यायवार अभ्यास, नियमित मॉक टेस्ट, परीक्षा केंद्रित अध्ययन सामग्री और विद्यार्थियों की प्रगति की निरंतर निगरानी जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
इस मंच की एक और खासियत यह है कि विद्यार्थी किसी भी समय हिंदी या अंग्रेजी भाषा में लिखकर अथवा बोलकर अपने प्रश्न पूछ सकते हैं। AI आधारित शिक्षक उन्हें चरणबद्ध तरीके से उत्तर उपलब्ध कराएगा, जिससे उनकी अवधारणाएं बेहतर तरीके से स्पष्ट होंगी। यह सुविधा विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी होगी, जिन्हें किसी विषय को समझने में अतिरिक्त समय या सहायता की आवश्यकता होती है।
प्रेप्जी के संस्थापक एवं अकादमिक प्रमुख डॉ. एस. शिवेंदु ने कहा कि शिक्षा में तकनीक का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका केंद्र विद्यार्थी हो। उन्होंने कहा कि AI का उद्देश्य शिक्षक की जगह लेना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उनकी व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त सहयोग प्रदान करना है।

उन्होंने बताया कि इस मंच के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी अपनी गति से सीख सकेगा। इससे दूरदराज के गांवों में रहने वाले बच्चे भी वही गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री प्राप्त कर सकेंगे, जो बड़े शहरों के विद्यार्थियों को उपलब्ध होती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कोई भी व्यक्ति PrepG AI के माध्यम से इस पाठ्यक्रम और इसकी सुविधाओं को देख सकता है।
विकास भारती बिशुनपुर के सचिव पद्मश्री अशोक भगत ने कहा कि उनकी संस्था पिछले चार दशकों से झारखंड के अंतिम गांव तक शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास की योजनाएं पहुंचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अब डिजिटल तकनीक के सहयोग से शिक्षा को नई दिशा देने का समय आ गया है।
उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के माध्यम से राज्य के उन विद्यार्थियों तक भी आधुनिक शिक्षा पहुंचेगी, जिन्हें अब तक सीमित संसाधनों के कारण गुणवत्तापूर्ण अध्ययन का अवसर नहीं मिल पाया था। संस्था का लक्ष्य प्रत्येक बच्चे तक समान शिक्षा के अवसर पहुंचाना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को उसका अधिकार बनाना है।
ग्लोबसलर्न की कार्यकारी निदेशक एवं सह-संस्थापक मृदुला सिन्हा ने कहा कि शिक्षा प्रशासन में लंबे अनुभव के दौरान उन्होंने देखा कि अधिकांश विद्यार्थी प्रतिभा की कमी के कारण नहीं, बल्कि अवसरों की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं। उनका मानना है कि AI आधारित व्यक्तिगत शिक्षण इस अंतर को काफी हद तक कम कर सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थियों को समय पर सही मार्गदर्शन, अभ्यास और व्यक्तिगत सहायता मिले तो वे बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। यही उद्देश्य इस पहल के पीछे है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI आधारित शिक्षा भारतीय शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रही है। विशेषकर ऐसे राज्यों में जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों और शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता चुनौती बनी रहती है, वहां इस प्रकार की तकनीक शिक्षा को नई दिशा दे सकती है।
यह पहल झारखंड के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ डिजिटल समानता को भी बढ़ावा देगी। इससे विद्यार्थियों में तकनीकी समझ विकसित होगी और वे भविष्य की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं एवं रोजगार के अवसरों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।
दोनों संस्थाओं ने भविष्य में इस परियोजना को और व्यापक बनाने की योजना भी बनाई है। इसके अंतर्गत स्थानीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री तैयार करने, अधिक जिलों एवं विद्यालयों तक इस मंच का विस्तार करने तथा शिक्षकों के क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान ग्लोबसलर्न के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुधीर त्रिपाठी, विकास भारती के अध्यक्ष डॉ. अजय सिंह, उपाध्यक्ष रंजना कुमारी, विकास सिंह, विशाख, निखिल मैत्री सहित शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और भविष्य उन्मुख कदम बताया।
AI आधारित यह पहल न केवल विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का माध्यम बनेगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी शिक्षा के बीच मौजूद अंतर को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले समय में झारखंड डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।













