Jharkahnd News : घाटशिला, दलमा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जंगलों में पुलिस का सघन सर्च ऑपरेशन, माओवादी दस्ते की गतिविधियों के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी।
Jharkahnd News : झारखंड और पश्चिम बंगाल की पुलिस ने एक करोड़ के इनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश की तलाश में संयुक्त अभियान तेज कर दिया है। घाटशिला, दलमा और सीमावर्ती जंगलों में सुरक्षा बल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।
जमशेदपुर। झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश की तलाश में सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक संयुक्त अभियान शुरू कर दिया है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर पूर्वी सिंहभूम पुलिस और पश्चिम बंगाल पुलिस लगातार जंगलों, पहाड़ी इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान चला रही हैं। सुरक्षा बलों को सूचना मिली है कि असीम मंडल अपने दस्ते के साथ झारखंड-बंगाल सीमा के विभिन्न इलाकों में सक्रिय है, जिसके बाद दोनों राज्यों की पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, माओवादी दस्ते की गतिविधियां पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला थाना क्षेत्र के झाटीझरना और लखाईसीनी के पहाड़ी क्षेत्रों में देखे जाने की सूचना मिली है। इन सूचनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है और जंगलों में लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है। स्थानीय पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बल भी अभियान में सहयोग कर रहे हैं ताकि किसी भी संभावित गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
दलमा से घाटशिला तक बढ़ाई गई निगरानी
इससे पहले दलमा पहाड़ क्षेत्र में भी असीम मंडल के दस्ते की मौजूदगी की जानकारी मिलने पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने लगातार तीन दिनों तक विशेष अभियान चलाया था। सुरक्षा बलों के दबाव के कारण माओवादी दस्ता जिले की सीमा छोड़कर पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ गया था। हालांकि, खुफिया एजेंसियों को लगातार इनकी गतिविधियों की सूचना मिल रही है, जिसके आधार पर अब पूरे सीमावर्ती इलाके में चौकसी और बढ़ा दी गई है।
घाटशिला, गालूडीह, एमजीएम थाना क्षेत्र के जंगलों के साथ-साथ दलमा के दुर्गम इलाकों में पुलिस लगातार गश्त कर रही है। ड्रोन और अन्य आधुनिक संसाधनों की सहायता से भी निगरानी की जा रही है ताकि माओवादी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
भंवराडीह और कालचिति पुलिस पिकेट फिर हुए सक्रिय
माओवादी गतिविधियों की बढ़ती आशंका को देखते हुए घाटशिला क्षेत्र के भंवराडीह और कालचिति स्थित पुलिस पिकेटों को लंबे समय बाद दोबारा सक्रिय कर दिया गया है। इन पिकेटों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है, जिससे सीमावर्ती गांवों और जंगलों में लगातार निगरानी रखी जा सके।
पुलिस का मानना है कि इन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ने से माओवादियों की आवाजाही पर प्रभाव पड़ेगा और स्थानीय लोगों में भी सुरक्षा का विश्वास मजबूत होगा।
बंगाल पुलिस ने भी सीमावर्ती इलाकों में बढ़ाई चौकसी
झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल पुलिस ने भी सीमावर्ती जिलों के जंगलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। विशेष रूप से जामबनी, बेलपहाड़ी और बंदवान क्षेत्र में पुलिस लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। दोनों राज्यों की पुलिस आपसी समन्वय के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रही है, जिससे अभियान को और प्रभावी बनाया जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि संयुक्त अभियान का उद्देश्य माओवादी गतिविधियों पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करना और सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना है।

असीम मंडल के दस्ते में कई कुख्यात माओवादी शामिल
पुलिस के अनुसार, असीम मंडल के दस्ते में कई सक्रिय और वांछित माओवादी शामिल हैं। इनमें पटमदा के झुझका निवासी रामदास मार्डी, उसकी पत्नी, मदन महतो, सागर, समीर महतो सहित अन्य सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं।
रामदास मार्डी का नाम पूर्व सांसद सुनील महतो हत्याकांड के फरार आरोपितों में भी शामिल बताया जाता है। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश कर रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यदि इस दस्ते को पकड़ने में सफलता मिलती है तो क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लग सकता है।
ग्रामीण एसपी ने कही यह बात
ग्रामीण एसपी शुभम खंडेवाल ने बताया कि माओवादी दस्ते की गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद पुलिस पूरी तरह सतर्क है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जंगलों और पहाड़ी इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है तथा हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर बनाए रखी जा रही है। स्थानीय पुलिस, विशेष बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से अभियान चला रही हैं।
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी आत्मसमर्पण की चर्चा
हाल के दिनों में एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा और उसके करीबी सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद अब असीम मंडल के आत्मसमर्पण की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। खुफिया एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
जानकारी के अनुसार, इससे पहले पश्चिम बंगाल में असीम मंडल के करीबी सहयोगी रंजीत पाल, उसकी पत्नी और एक महिला माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार बढ़ते दबाव के कारण अन्य माओवादी भी मुख्यधारा में लौटने का फैसला कर सकते हैं।
सारंडा से दलमा तक बदली रणनीति
सूत्रों के अनुसार, सारंडा क्षेत्र में सुरक्षा बलों की घेराबंदी के दौरान मिसिर बेसरा वहां से निकलने में सफल रहा था। इसके बाद उसने असीम मंडल और उसके दस्ते को पूर्वी सिंहभूम के दलमा क्षेत्र की ओर भेजा था। वहीं उसका एक अन्य सहयोगी अजय पहले ही गिरिडीह से गिरफ्तार किया जा चुका है।
इन घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियां माओवादी नेटवर्क की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और उनके संभावित ठिकानों की पहचान कर अभियान चला रही हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत
पुलिस का कहना है कि झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर लगातार संयुक्त अभियान जारी रहेगा। जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों और संवेदनशील गांवों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। स्थानीय लोगों से भी अपील की गई है कि यदि उन्हें किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि दोनों राज्यों की पुलिस के बीच बेहतर समन्वय और लगातार चल रहे अभियान से माओवादी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिलेगी।













