Jamshedpur News : जमशेदपुर के डुमरिया प्रखंड के चीटामाटी टोला में सड़क नहीं होने से मरीज को खटिया पर ढोने की खबर के बाद प्रशासन हरकत में आया। एसडीओ, बीडीओ और सीओ ने पैदल दुर्गम रास्ता तय कर जमीनी हकीकत देखी और सड़क निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
Jamshedpur News : जमशेदपुर के डुमरिया प्रखंड स्थित चीटामाटी टोला में सड़क नहीं होने के कारण मरीज को खटिया पर अस्पताल ले जाने की खबर के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। एसडीओ अमिताभ भगत समेत अधिकारियों ने पैदल दुर्गम रास्तों का निरीक्षण कर ग्रामीणों की समस्याओं को समझा और सड़क निर्माण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए।
Jamshedpur News : पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत डुमरिया प्रखंड के सुदूरवर्ती चीटामाटी टोला में सड़क नहीं होने के कारण गंभीर रूप से बीमार टोला प्रधान जंगल हेंब्रम को ग्रामीणों द्वारा खटिया पर लादकर लगभग चार किलोमीटर तक उबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते से अस्पताल पहुंचाने की खबर ने प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर दिया है। इस खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन तत्काल हरकत में आया और अधिकारियों की टीम ने स्वयं दुर्गम क्षेत्र का दौरा कर जमीनी हकीकत का निरीक्षण किया।
ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या को सामने लाने वाली इस घटना ने न केवल प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया बल्कि यह भी उजागर कर दिया कि आजादी के दशकों बाद भी कई गांव सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को आज भी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।

सरकारी वाहन छोड़ पैदल निकले अधिकारी
निरीक्षण के लिए घाटशिला के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अमिताभ भगत, अंचल अधिकारी (सीओ) पवन कुमार तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) निलेश मुर्मू स्वयं चीटामाटी टोला पहुंचे। हालांकि गांव तक जाने के लिए कोई सड़क नहीं होने के कारण अधिकारियों को अपने सरकारी वाहन बीच रास्ते में ही छोड़ने पड़े।
इसके बाद अधिकारियों ने पैदल ही पहाड़ी पगडंडियों का सफर शुरू किया। संकरी पगडंडी, बड़े-बड़े पत्थर, तीखी चढ़ाई और फिसलन भरे रास्तों पर चलते हुए अधिकारियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कुछ दूरी तय करने के बाद ही वे थककर हांफने लगे।
अधिकारियों ने महसूस किया ग्रामीणों का दर्द
दुर्गम रास्तों पर पैदल चलने के दौरान अधिकारियों ने पहली बार प्रत्यक्ष रूप से महसूस किया कि ग्रामीण प्रतिदिन किस तरह इन कठिन परिस्थितियों में आवाजाही करते हैं। विशेष रूप से किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाना कितना मुश्किल होता है, इसका अनुभव अधिकारियों को मौके पर ही हुआ।
अधिकारियों ने माना कि जिस रास्ते पर सामान्य रूप से चलना भी बेहद कठिन है, वहां गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को खटिया पर उठाकर कई किलोमीटर तक ले जाना ग्रामीणों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। निरीक्षण के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने विस्तार से रखीं।
खबर का हुआ सकारात्मक असर
चीटामाटी टोला में मरीज को खटिया पर ढोने की तस्वीरें और खबर सामने आने के बाद प्रशासन की त्वरित सक्रियता देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही थी, लेकिन इस घटना के बाद पहली बार वरिष्ठ अधिकारी स्वयं गांव पहुंचे और वास्तविक स्थिति को अपनी आंखों से देखा।
स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि अब उनकी वर्षों पुरानी सड़क की मांग पूरी होगी और गांव तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाएगा।
सड़क निर्माण प्रक्रिया तेज करने का निर्देश
निरीक्षण के बाद एसडीओ अमिताभ भगत ने मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस क्षेत्र में सड़क निर्माण से जुड़ी सभी प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान प्रशासन की जिम्मेदारी है और सड़क जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई तेज की जाएगी।
उन्होंने संबंधित विभागों को प्रस्ताव, सर्वेक्षण और अन्य औपचारिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए ताकि सड़क निर्माण का कार्य जल्द शुरू किया जा सके।
स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंच सबसे बड़ी चुनौती
चीटामाटी टोला जैसे कई गांवों में सड़क नहीं होने के कारण सबसे अधिक परेशानी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर होती है। किसी भी व्यक्ति के गंभीर रूप से बीमार होने पर एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में ग्रामीणों को मरीज को खटिया या अस्थायी स्ट्रेचर पर उठाकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
बरसात के दिनों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। फिसलन भरे रास्तों और उफनते नालों के कारण कई बार मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना संभव नहीं हो पाता, जिससे उनकी जान तक खतरे में पड़ जाती है।
ग्रामीणों ने रखी अपनी मांग
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों से केवल सड़क ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से न केवल मरीजों को राहत मिलेगी बल्कि बच्चों की पढ़ाई, किसानों की उपज के परिवहन और गांव के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि सड़क निर्माण कार्य में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए और जल्द से जल्द निर्माण शुरू कराया जाए।
विकास की राह में सड़क सबसे बड़ी जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी दूरस्थ क्षेत्र के विकास की पहली शर्त सड़क संपर्क होती है। सड़क बनने से स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक आसानी से पहुंचता है। चीटामाटी टोला की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आज भी कई गांव बुनियादी सुविधाओं से क्यों वंचित हैं।
यह घटना प्रशासन के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए केवल कागजी रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होती, बल्कि अधिकारियों को समय-समय पर जमीनी स्तर पर जाकर वास्तविक परिस्थितियों का आकलन करना चाहिए।

चीटामाटी टोला में मरीज को खटिया पर ढोने की घटना केवल एक समाचार नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल आधारभूत संरचना की तस्वीर है। राहत की बात यह है कि इस घटना के बाद प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को मौके पर भेजा और वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया। अब ग्रामीणों की उम्मीद प्रशासन से जुड़ी है कि निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि जल्द सड़क निर्माण शुरू हो और वर्षों से चली आ रही यह समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो।














