Jamshedpur News : मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज, येलहंका (बेंगलुरु) में द्वितीय वर्ष के छात्र लक्ष्य मिश्रा की संदिग्ध मौत पर परिवार ने उठाए कई सवाल। पिता का दावा- रैगिंग के बाद हत्या कर शव नीचे फेंका गया, जबकि कॉलेज प्रशासन इसे आत्महत्या बता रहा है।
Jamshedpur News : बेंगलुरु के मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र लक्ष्य मिश्रा की संदिग्ध मौत पर पिता ने रैगिंग के बाद हत्या का आरोप लगाया है। परिवार ने निष्पक्ष जांच, CCTV फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
बेंगलुरु स्थित मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज, येलहंका में पढ़ाई कर रहे द्वितीय वर्ष के छात्र लक्ष्य मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे की पहले रैगिंग की गई, फिर उसकी हत्या कर शव को ऊंचाई से नीचे फेंक दिया गया। दूसरी ओर कॉलेज प्रशासन इस घटना को आत्महत्या का मामला बता रहा है। इन विरोधाभासी दावों के बीच परिवार ने निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है।
परिजनों का कहना है कि घटना के बाद से उन्हें कई ऐसे तथ्य मिले हैं जो कॉलेज प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े करते हैं। उनका आरोप है कि मामले को जल्दबाजी में आत्महत्या बताकर बंद करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि कई पहलुओं की गहन जांच अभी बाकी है।
पिता ने लगाए रैगिंग और हत्या के आरोप
लक्ष्य मिश्रा के पिता का कहना है कि उनका बेटा पढ़ाई में अच्छा था और इंजीनियर बनने का सपना लेकर कॉलेज पहुंचा था। उनका आरोप है कि हॉस्टल में उसके साथ रैगिंग हुई और बाद में उसकी हत्या कर दी गई।
परिवार का दावा है कि कॉलेज प्रशासन जिस खिड़की से कूदकर आत्महत्या करने की बात कह रहा है, उसका आकार इतना छोटा है कि उस रास्ते से किसी व्यक्ति का निकलना संभव प्रतीत नहीं होता। उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित स्थान की तस्वीरें भी सुरक्षित रखी हैं और जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराई हैं।
घटनास्थल को लेकर भी उठे सवाल
परिजनों ने घटनास्थल की तस्वीरों के आधार पर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस स्थान पर शव मिला, वहां खून के निशान बेहद कम दिखाई देते हैं। परिवार का दावा है कि यदि कोई व्यक्ति नौवीं मंजिल जैसी ऊंचाई से गिरता है, तो घटनास्थल की स्थिति अलग हो सकती है।

इसी प्रकार परिजनों ने यह भी कहा कि शव की स्थिति को देखकर उन्हें संदेह होता है कि यह सामान्य ऊंचाई से गिरने का मामला नहीं है। हालांकि इन दावों की पुष्टि किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या आधिकारिक फोरेंसिक रिपोर्ट से अभी नहीं हुई है।
निष्पक्ष जांच की उठी मांग
परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मामले में निम्न बिंदुओं की जांच की जानी चाहिए—
- हॉस्टल और आसपास के सभी CCTV फुटेज सुरक्षित किए जाएं।
- मोबाइल फोन, लैपटॉप और कॉल रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच हो।
- हॉस्टल में मौजूद छात्रों और कर्मचारियों से निष्पक्ष पूछताछ की जाए।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- यदि रैगिंग की शिकायत या उसके संकेत मिले हों तो उनकी भी विस्तृत जांच की जाए।
रैगिंग पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर देश के शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग की समस्या पर बहस छेड़ रही है। उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग रोकने के लिए सख्त नियम और एंटी-रैगिंग समितियां बनाई गई हैं, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाली घटनाएं इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती हैं।
यदि जांच में रैगिंग या किसी प्रकार की आपराधिक साजिश सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि जांच में आत्महत्या की पुष्टि होती है, तो उसके पीछे की परिस्थितियों को भी पूरी पारदर्शिता के साथ सामने लाना आवश्यक होगा।
परिवार ने न्याय की लगाई गुहार
लक्ष्य मिश्रा के पिता ने भावुक अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए। उनका कहना है कि वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले केवल निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच चाहते हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी भी निर्दोष या दोषी के साथ अन्याय न हो।
परिवार का कहना है कि यदि सभी उपलब्ध साक्ष्यों, वैज्ञानिक जांच और गवाहों के बयान के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाती है, तभी लक्ष्य मिश्रा की मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।












