Jamshedpur News : बेंगलुरु के मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज में हुई छात्र लक्ष्य मिश्रा की मौत पर फिर तेज हुई जांच की मांग, पिता ने रैगिंग के बाद संदिग्ध हत्या का लगाया आरोप, सीबीआई जांच की उठी मांग।
Jamshedpur News : जमशेदपुर के कदमा निवासी लक्ष्य मिश्रा की बेंगलुरु स्थित मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज में हुई मौत के मामले में मानवाधिकार आयोग ने संबंधित अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है। मृतक के पिता अंजनी कुमार मिश्रा ने इसे आत्महत्या नहीं बल्कि संदिग्ध हत्या बताते हुए निष्पक्ष जांच और सीबीआई जांच की मांग की है।
जमशेदपुर के कदमा निवासी छात्र लक्ष्य मिश्रा की बेंगलुरु स्थित मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज में हुई मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस मामले में मानवाधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आयोग की इस कार्रवाई के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है।
मृतक छात्र के पिता अंजनी कुमार मिश्रा, जो भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में कार्यरत हैं, लगातार अपने बेटे की मौत को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कॉलेज प्रबंधन जिस घटना को आत्महत्या बता रहा है, वह कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया है कि लक्ष्य की मौत रैगिंग के बाद हुई संदिग्ध हत्या हो सकती है और पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए।
मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
मामले में लगातार उठ रहे सवालों और शिकायतों को देखते हुए मानवाधिकार आयोग ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले की तथ्यात्मक जानकारी और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
आयोग की इस पहल से मृतक के परिवार को निष्पक्ष जांच की उम्मीद जगी है। परिवार का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से हुई तो कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं, जो अब तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत कई संवैधानिक पदाधिकारियों को भेजा पत्र
लक्ष्य मिश्रा के पिता अंजनी कुमार मिश्रा ने इस मामले में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारियों को भी पत्र लिखा है। उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।
इसके अलावा उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री और जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय से भी मामले में सहयोग की अपील करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर की जा रही जांच से उन्हें संतुष्टि नहीं है और सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना जरूरी है।
पिता ने आत्महत्या की थ्योरी पर उठाए सवाल
मृतक के पिता का कहना है कि उनका बेटा आत्महत्या जैसा कदम उठा ही नहीं सकता था। उनका दावा है कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत की जा रही कहानी कई बिंदुओं पर संदेह पैदा करती है।
उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य ने वास्तव में नौ मंजिला इमारत से छलांग लगाई होती तो उसके शरीर पर गंभीर चोटों के स्पष्ट निशान दिखाई देते और घटनास्थल पर बड़ी मात्रा में खून मिलता। लेकिन उपलब्ध परिस्थितियां कॉलेज प्रशासन के दावों से मेल नहीं खातीं।
अंजनी मिश्रा का यह भी कहना है कि जिस खिड़की से लक्ष्य के कूदने की बात कही जा रही है, वहां सुरक्षा के लिए लोहे की रॉड और जाली लगी हुई थी। ऐसे में किसी व्यक्ति का आसानी से उस रास्ते बाहर निकल पाना संभव नहीं लगता। यही कारण है कि वे कॉलेज प्रशासन के आत्महत्या संबंधी दावे को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
रैगिंग के बाद हत्या की आशंका
परिजनों का आरोप है कि लक्ष्य मिश्रा को कॉलेज में रैगिंग का सामना करना पड़ रहा था। उनका कहना है कि यदि इस पहलू की गंभीरता से जांच की जाए तो मौत के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सकती है।
परिवार का मानना है कि मामले की शुरुआत से ही कई महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी की गई और आत्महत्या की थ्योरी को जल्दबाजी में स्वीकार कर लिया गया। ऐसे में अब स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
पुलिस को सूचना देने में देरी का भी आरोप
अंजनी कुमार मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना के बाद पुलिस को समय पर सूचना नहीं दी गई। उनका कहना है कि यदि घटना के तुरंत बाद पुलिस को सूचना देकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए जाते तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते थे।
उन्होंने सवाल उठाया कि घटना के बाद सूचना देने में देरी क्यों हुई और इस दौरान घटनास्थल पर क्या-क्या हुआ। उनका कहना है कि यही कारण है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो गई है।
सीबीआई जांच की मांग हुई तेज
परिजनों का कहना है कि राज्य स्तर की जांच एजेंसियों पर उन्हें पूरा भरोसा नहीं है। इसलिए उन्होंने सीबीआई से पूरे मामले की जांच कराने की मांग दोहराई है। उनका मानना है कि स्वतंत्र एजेंसी की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि लक्ष्य मिश्रा की मौत आत्महत्या थी या किसी साजिश का परिणाम।
मामले में विभिन्न स्तरों पर शिकायतें भेजे जाने और मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब यह मामला केवल एक छात्र की मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि छात्र सुरक्षा, रैगिंग की रोकथाम और उच्च शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही से भी जुड़ गया है।
परिवार को न्याय का इंतजार
लक्ष्य मिश्रा के परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपने बेटे के लिए न्याय पाना ही नहीं, बल्कि भविष्य में किसी अन्य छात्र के साथ ऐसी घटना न हो, यह सुनिश्चित करना भी है। परिवार को उम्मीद है कि मानवाधिकार आयोग की पहल के बाद जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी और सच्चाई सामने आएगी।
अब सभी की नजर संबंधित अधिकारियों द्वारा आयोग को भेजी जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी है। यह रिपोर्ट आने के बाद आगे की जांच और संभावित कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है। यदि रिपोर्ट में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो मामले में जांच का दायरा और भी बढ़ सकता है।
















