Jamshedpur News : राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के विरोध में सैकड़ों लोगों ने किया प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग
Jamshedpur News : अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के आरोपों को लेकर जमशेदपुर में डीसी कार्यालय के सामने प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक जांच, एसआईटी की कार्रवाई में तेजी और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
झारखंड के जमशेदपुर में अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा चोरी के मामले को लेकर विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। जिला समाहरणालय (डीसी ऑफिस) के सामने सैकड़ों की संख्या में लोग एकत्र हुए और मामले की निष्पक्ष एवं न्यायिक जांच की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच कराने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं और चोरी के मामले में अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियों को पारदर्शी तरीके से जांच करनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप
धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने राम मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े कुछ पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि जिस मंदिर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं और प्रवेश से पहले कई स्तरों की जांच होती है, वहां यदि इतनी बड़ी चोरी या अनियमितता हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
हालांकि प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
‘न्यायिक जांच हो, सच्चाई सामने आए’
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मामले की जांच केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की जाए, जिसमें सीबीआई और अन्य वरिष्ठ जांच अधिकारियों को शामिल किया जाए।
उनका कहना था कि यदि जांच निष्पक्ष होगी तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
डीसी के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान उपायुक्त कार्यालय के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन में पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों की पहचान और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि करोड़ों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिरों में दान करते हैं।
आस्था से जुड़े मुद्दे पर जताई चिंता
विरोध प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा कि लोग पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिरों में चढ़ावा चढ़ाते हैं। यदि उसी धन के दुरुपयोग या चोरी जैसी खबरें सामने आती हैं तो इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।
उन्होंने कहा कि छोटे मंदिरों में चोरी की घटनाएं पहले भी सुनने को मिलती रही हैं, लेकिन यदि देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक को लेकर ऐसे आरोप सामने आते हैं तो इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार से मांगा जवाब
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री से भी इस पूरे मामले पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देने की मांग की। उनका कहना था कि यदि एसआईटी का गठन हो चुका है तो जांच में तेजी लाई जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई में हो रही देरी लोगों के बीच कई तरह के सवाल खड़े कर रही है। हालांकि सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक रूप से क्या कार्रवाई की गई है, इस पर प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।
‘गुरुजी विचार मंथ’ संस्था ने किया आयोजन
प्रदर्शनकारियों के अनुसार यह कार्यक्रम किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं बल्कि ‘गुरुजी विचार मंथ’ नामक एक सामाजिक संस्था के नेतृत्व में आयोजित किया गया। संस्था के पदाधिकारियों का कहना था कि उनका उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था से जुड़े इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाना है।
उन्होंने कहा कि यदि आने वाले दिनों में मामले में संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
क्या है पूरा विवाद?
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने दावा किया कि अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से संबंधित कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इसी को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं और जमशेदपुर में भी लोगों ने विरोध दर्ज कराया।
हालांकि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि प्रदर्शन के दौरान लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित जांच एजेंसियों अथवा राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक तथ्य सामने आ सकते हैं।
आस्था और पारदर्शिता दोनों जरूरी
धार्मिक संस्थानों में आने वाला दान करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक होता है। ऐसे में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना आवश्यक माना जाता है।
वहीं दूसरी ओर, किसी भी व्यक्ति, संस्था या ट्रस्ट पर लगाए गए आरोप तब तक आरोप ही माने जाते हैं जब तक सक्षम जांच एजेंसी या न्यायालय द्वारा उनकी पुष्टि नहीं हो जाती। इसलिए इस पूरे मामले में आधिकारिक जांच और उसके निष्कर्षों का इंतजार भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल जिला प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर संबंधित स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है।

















