Giridih News : गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ कोबरा-209 की संयुक्त कार्रवाई में मिली बड़ी सफलता, हत्या, आईईडी विस्फोट, सुरक्षाबलों पर हमले और लेवी वसूली जैसे 240 से अधिक मामलों में था आरोपी
Giridih News : झारखंड के गिरिडीह में पुलिस और सीआरपीएफ कोबरा-209 ने 25 लाख रुपये के इनामी सैक कमांडर अजय महतो उर्फ टाइगर को गिरफ्तार किया। आरोपी पर 240 से अधिक नक्सली मामलों का आरोप है। जानें पूरी खबर।
गिरिडीह: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ की कोबरा-209 बटालियन ने संयुक्त अभियान चलाकर प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के 25 लाख रुपये के इनामी स्पेशल एरिया कमेटी (सैक) कमांडर अजय महतो उर्फ टाइगर को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार अजय महतो पिछले करीब दो दशकों से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था और उसके खिलाफ झारखंड के विभिन्न जिलों में हत्या, आईईडी विस्फोट, सुरक्षाबलों पर हमले, लेवी वसूली तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत 240 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
शनिवार को आयोजित प्रेसवार्ता में गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए इसे झारखंड में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अजय महतो की गिरफ्तारी से नक्सली संगठन के नेटवर्क को गहरा झटका लगा है।
गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि झारखंड पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर लगातार नक्सल विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 17 जुलाई को खुखरा थाना क्षेत्र के हरलाडीह ओपी अंतर्गत जंगल में नक्सलियों की मौजूदगी की गुप्त सूचना मिली थी।
सूचना मिलते ही अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) सुरजीत कुमार तथा सीआरपीएफ कोबरा-209 बटालियन के कंपनी कमांडर आकिफ अहमद बानी के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। टीम ने पिपराडीह टोला-खवासटांड जंगल क्षेत्र में घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। अभियान के दौरान जंगल से भागने की कोशिश कर रहे अजय महतो को सुरक्षा बलों ने घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
2005 से नक्सली संगठन में था सक्रिय
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार नक्सली अजय महतो उर्फ मोछु उर्फ टाइगर उर्फ अंजन दा उर्फ बुधराम उर्फ श्रीकांत उर्फ बासुदेव, गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र स्थित नावाडीह गांव का निवासी है।
वह वर्ष 2005 में नक्सली संगठन से जुड़ा था। शुरुआत में उसने दस्ता सदस्य के रूप में काम किया। बाद में संगठन ने उसे लेवी वसूली, हथियारों की आपूर्ति और नए सदस्यों की भर्ती जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं।
संगठन में लगातार सक्रिय रहने के कारण उसे प्रमोशन मिलता गया और बाद में वह स्पेशल एरिया कमेटी (सैक) का कमांडर बन गया। इस दौरान उसने झुमरा पहाड़, लुगु पहाड़, पारसनाथ और सारंडा जैसे संवेदनशील इलाकों में नक्सली गतिविधियों का संचालन किया।
240 से अधिक मामलों में था वांछित
गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार ने बताया कि अजय महतो के खिलाफ झारखंड के विभिन्न जिलों में कुल 240 से अधिक मामले दर्ज हैं।
इनमें शामिल हैं—
- गिरिडीह – 68 मामले
- पश्चिमी सिंहभूम – 107 मामले
- बोकारो – 37 मामले
- धनबाद – 15 मामले
- हजारीबाग – 7 मामले
- चतरा – 2 मामले
- रामगढ़ – 2 मामले
- सरायकेला – 2 मामले
इन सभी मामलों में हत्या, पुलिस एवं सुरक्षा बलों पर हमला, आईईडी ब्लास्ट, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, लेवी वसूली, अपहरण और अन्य गंभीर अपराध शामिल हैं।
कई चर्चित नक्सली घटनाओं में रहा शामिल
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अजय महतो कई बड़ी नक्सली वारदातों का मुख्य आरोपी रहा है।
उस पर वर्ष 2008 में पीरटांड़ क्षेत्र में सीआरपीएफ के तीन जवानों की हत्या का आरोप है। इसके अलावा वर्ष 2010 में पीरटांड़ प्रखंड कार्यालय में विस्फोट कराने की घटना में भी उसकी भूमिका सामने आई थी।
वर्ष 2014 में धुलियामट्टी क्षेत्र में बारूदी सुरंग विस्फोट कर सीआरपीएफ के जवान बादल राय की हत्या और 17 जवानों को घायल करने की घटना में भी उसका नाम शामिल है।
इतना ही नहीं, मुखबिरी के संदेह में कई ग्रामीणों की हत्या, लेवी नहीं देने वाले लोगों की हत्या और विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने जैसे कई मामलों में भी उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है।
नक्सल विरोधी अभियान को मिली नई मजबूती
झारखंड में पिछले कुछ वर्षों से नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा बलों की कार्रवाई के कारण कई बड़े नक्सली या तो मारे गए हैं, गिरफ्तार हुए हैं या फिर आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अजय महतो जैसे वरिष्ठ कमांडर की गिरफ्तारी से संगठन की रणनीतिक क्षमता और नेटवर्क पर असर पड़ सकता है। विशेषकर पारसनाथ, झुमरा और आसपास के इलाकों में नक्सली गतिविधियों को नियंत्रित करने में यह कार्रवाई अहम साबित हो सकती है।
एसपी ने आत्मसमर्पण की अपील की
प्रेसवार्ता के दौरान गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की “नई दिशा-एक नई पहल” आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर नक्सली मुख्यधारा में लौट सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे लोगों के पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई योजनाएं चला रही है। जो नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करेंगे, उन्हें सरकार की नीति के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
गिरफ्तारी से संगठन को लगा बड़ा झटका
पुलिस का मानना है कि 25 लाख रुपये के इनामी सैक कमांडर की गिरफ्तारी केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि नक्सली संगठन के लिए बड़ा रणनीतिक नुकसान है। इससे संगठन की गतिविधियों, लेवी नेटवर्क और संचालन प्रणाली पर असर पड़ने की संभावना है।
सुरक्षा एजेंसियां अब अजय महतो से पूछताछ के आधार पर अन्य सक्रिय नक्सलियों, हथियारों के ठिकानों और संगठन के नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने में लगी हैं। पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरफ्तारी के बाद नक्सल विरोधी अभियान को और गति मिलेगी तथा झारखंड के संवेदनशील क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।














