Bokaro News : गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर बोकारो में आयोजित हुआ ‘वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन–रन फॉर हंगर’, कर्मचारियों ने दौड़ के जरिए स्वस्थ जीवनशैली और जरूरतमंदों के लिए भोजन का संदेश दिया
Bokaro News : गांधी जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर वेदांता आयरन एंड स्टील/ईएसएल स्टील लिमिटेड की ओर से शुक्रवार को ‘वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन–रन फॉर हंगर’ अभियान का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य केवल लोगों को दौड़ और शारीरिक गतिविधियों के प्रति जागरूक करना नहीं था, बल्कि समाज में भूख जैसी गंभीर समस्या के खिलाफ जागरूकता पैदा करना भी था। कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी इस अभियान में शामिल हुए और दौड़ के माध्यम से सामाजिक सरोकार का संदेश दिया।
Bokaro News : वेदांता की ओर से पिछले चार-पांच वर्षों से ‘रन फॉर हंगर’ अभियान का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से कंपनी लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के साथ-साथ समाज के जरूरतमंद लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का संदेश देती है। आयोजन में शामिल प्रतिभागियों ने दौड़ के दौरान फिटनेस, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा से जुड़े संदेशों को आगे बढ़ाया।
‘रन फॉर हंगर’ अभियान की खास बात यह है कि इसमें दौड़ को भोजन से जोड़कर सामाजिक जागरूकता का प्रयास किया जाता है। कंपनी के प्रतिनिधियों के अनुसार, अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का कोई भी बच्चा भूखा न सोए।
अभियान के तहत प्रत्येक मील की दौड़ को एक मील भोजन के रूप में माना जाता है। इसके अनुरूप जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाने की पहल की जाती है। यानी प्रतिभागियों की शारीरिक सक्रियता को समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए भोजन उपलब्ध कराने की मुहिम से जोड़ा गया है।

वेदांता के अनुसार, अब तक इस अभियान के माध्यम से दो लाख मील का योगदान किया जा चुका है। कंपनी का कहना है कि यह पहल लोगों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में भी प्रेरित करने का माध्यम है।

आयोजन के दौरान वक्ताओं ने नियमित शारीरिक गतिविधियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की बदलती जीवनशैली में लोगों का शारीरिक गतिविधियों से जुड़ाव कम होता जा रहा है। ऐसे में नियमित दौड़, पैदल चलना और व्यायाम जैसी गतिविधियों को दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है।
दौड़ को शरीर को सक्रिय रखने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने वाली गतिविधि के रूप में देखा गया। आयोजन में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी लोगों से फिटनेस को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की अपील की।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक दिन दौड़ आयोजित करना नहीं, बल्कि लोगों के बीच लंबे समय तक स्वस्थ रहने और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की सोच विकसित करना बताया गया।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन और विचारों को भी याद किया गया। गांधी जयंती के मौके पर सत्य, अहिंसा, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्यों को याद किया गया, वहीं लाल बहादुर शास्त्री की सादगी, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण को भी स्मरण किया गया।
आयोजकों के अनुसार, ‘रन फॉर हंगर’ जैसे अभियान में सामाजिक सेवा और जनभागीदारी का संदेश उन मूल्यों से जुड़ता है, जिन पर गांधी और शास्त्री ने अपने सार्वजनिक जीवन में जोर दिया था।
आयोजन के दौरान 7 किलोमीटर की दौड़ भी कराई गई। इसमें प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में सिक्योरिटी विभाग के रविंद्र कुमार पांडे ने 25 मिनट में 7 किलोमीटर की दौड़ पूरी कर प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं कृष्ण बहादुर गुरु ने दूसरा और लगन हंसदा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
दौड़ में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण के दौरान प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया गया और उन्हें आगे भी फिटनेस तथा सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया गया।
वेदांता आयरन एंड स्टील/ईएसएल स्टील लिमिटेड के अधिकारियों और कर्मचारियों की भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप दिया। कंपनी से जुड़े लोगों ने दौड़ में हिस्सा लेकर फिटनेस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई और भूख के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को समर्थन दिया।
इस तरह का आयोजन कॉर्पोरेट संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी और कर्मचारियों की सामुदायिक भागीदारी को भी सामने लाता है। खासकर जब किसी अभियान में स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा दोनों पहलुओं को जोड़ा जाता है, तो उसका संदेश आम लोगों तक अलग तरीके से पहुंचता है।
कार्यक्रम में मौजूद वेदांत शंकर, एएसपी चास, बोकारो और रवि शर्मा, वेदांता इलेक्ट्रोस्टील अधिकारी ने भी अभियान और इसके उद्देश्यों से जुड़े विचार साझा किए।
‘रन फॉर हंगर’ के माध्यम से दिया गया संदेश यही रहा कि स्वस्थ समाज की शुरुआत स्वस्थ व्यक्ति से होती है, लेकिन समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब जरूरतमंद लोगों की बुनियादी जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाए। दौड़ के जरिए फिटनेस को बढ़ावा देने के साथ भूख के खिलाफ जागरूकता पैदा करने की यह पहल सामाजिक भागीदारी का एक उदाहरण बनी।













