Maiyan Samman Yojana में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, 653 अपात्र महिलाओं के नाम सूची से हटे, भौतिक सत्यापन में सामने आईं कई अनियमितताएं

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गढ़वा जिले में मुख्यमंत्री Maiyan Samman Yojana के तहत भौतिक सत्यापन के बाद 653 अपात्र महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से हटा दिए गए हैं। जांच में सरकारी कर्मचारियों के परिवार, आयकर व जीएसटी दायरे के परिवार और आयु सीमा से अधिक महिलाओं के मामले सामने आए। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

गढ़वा जिले में मुख्यमंत्री Maiyan Samman Yojana के तहत चलाए गए व्यापक भौतिक सत्यापन अभियान में बड़ा खुलासा हुआ है। जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच के बाद 653 महिलाओं को योजना के लिए अपात्र पाया गया, जिसके बाद उनके नाम लाभार्थियों की सूची से हटा दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई योजना में पारदर्शिता बनाए रखने और वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं तक सरकारी सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र महिलाओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। लेकिन हाल के सत्यापन अभियान में यह सामने आया कि कई ऐसे परिवार भी योजना का लाभ उठा रहे थे, जो निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते थे। इसी आधार पर जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के अनुसार अपात्र लाभुकों के नाम हटाने का निर्णय लिया।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जिले के विभिन्न प्रखंडों में लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन कराया गया था। इस दौरान दस्तावेजों के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक स्थिति की भी जांच की गई। सत्यापन के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें लाभुकों के परिवार की आय, सरकारी नौकरी, कर भुगतान और आयु जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां योजना की पात्रता से मेल नहीं खा रही थीं।

जिले में सबसे अधिक 204 महिलाओं के नाम केतार प्रखंड से हटाए गए हैं। इसके अलावा कांडी प्रखंड से 70, रंका से 45, मझिआंव और धुरकी से 37-37, बरडीहा से 35, मेराल से 33, श्री बंशीधर नगर से 30 तथा भंडरिया से 29 महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से हटाए गए हैं। अन्य प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में भी जांच के दौरान अपात्र पाए गए लाभुकों के नाम सूची से हटाए गए हैं।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई महिलाओं के पति सरकारी शिक्षक, पुलिसकर्मी और पारा शिक्षक जैसे सरकारी या अर्द्धसरकारी पदों पर कार्यरत हैं। योजना के नियमों के अनुसार ऐसे परिवार आर्थिक रूप से पात्र श्रेणी में नहीं आते। इसके बावजूद इन परिवारों को योजना का लाभ मिल रहा था। प्रशासन ने ऐसे सभी मामलों की पहचान कर उन्हें लाभार्थी सूची से बाहर कर दिया।

इसके अलावा कुछ लाभुकों के परिवार आयकर (Income Tax) और वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में पाए गए। जांच अधिकारियों का कहना है कि जिन परिवारों की आय योजना की निर्धारित सीमा से अधिक है या जो करदाता हैं, वे योजना के पात्र नहीं माने जाते। ऐसे मामलों में भी संबंधित महिलाओं के नाम सूची से हटाने की कार्रवाई की गई।

भौतिक सत्यापन में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि कई महिलाओं की आयु निर्धारित सीमा से अधिक थी। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित आयु सीमा के भीतर आने वाली महिलाओं को ही लाभ दिया जाना है। लेकिन जांच में कई महिलाएं 50 वर्ष से अधिक आयु की पाई गईं, जिसके कारण उन्हें भी अपात्र घोषित किया गया।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि योजना का उद्देश्य केवल वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यदि किसी भी स्तर पर पात्रता से संबंधित गलत जानकारी देकर योजना का लाभ लिया गया है तो ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में भी समय-समय पर लाभार्थियों का सत्यापन जारी रहेगा ताकि योजना का लाभ केवल योग्य महिलाओं तक ही सीमित रहे।

प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के सत्यापन अभियान से सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी लाभुकों की पहचान कर सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। साथ ही इससे उन महिलाओं को भी लाभ मिलेगा जो वास्तव में योजना की पात्र हैं लेकिन किसी कारणवश अब तक योजना से वंचित रही हैं।

गढ़वा जिले में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत वर्तमान में 2 लाख 22 हजार 765 लाभार्थी पंजीकृत हैं, जिनके बैंक खातों में योजना की राशि भेजी जा चुकी है। जिला प्रशासन के अनुसार सत्यापन के बाद यह संख्या और अधिक पारदर्शी होगी तथा भविष्य में केवल पात्र लाभुकों को ही योजना का लाभ मिलता रहेगा।

जिले के विभिन्न प्रखंडों में लाभार्थियों की संख्या इस प्रकार है— बरडीहा में 7,502, बरगढ़ में 3,478, भंडरिया में 6,055, भवनाथपुर में 9,398, विशुनपुरा में 6,140, चिनियां में 5,976, डंडा में 3,683, डंडई में 12,838, धुरकी में 9,153, गढ़वा प्रखंड में 24,919, गढ़वा नगर परिषद में 5,073, कांडी में 17,315, केतार में 8,432, खरौंधी में 8,023, मझिआंव नगर पंचायत में 2,824, मझिआंव में 8,470, मेराल में 25,706, श्री बंशीधर नगर में 14,920, श्री बंशीधर नगर पंचायत में 1,615, रमकंडा में 7,435, रमना में 13,377, रंका में 15,248 तथा सगमा में 5,185 लाभार्थी शामिल हैं।

जिला प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी अपात्र व्यक्ति द्वारा सरकारी योजनाओं का लाभ लिए जाने की जानकारी हो तो इसकी सूचना संबंधित प्रखंड कार्यालय या जिला प्रशासन को दें। प्रशासन का कहना है कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना है और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रशासन का यह कदम इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार अब सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी बढ़ा रही है। आने वाले समय में अन्य जिलों में भी इसी तरह के सत्यापन अभियान चलाए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचे।

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