NEET UG Counseling Fraud : बेटी को डॉक्टर बनाने के सपने के साथ महिला ने दिए थे 3.50 लाख रुपये, दाखिला नहीं मिलने पर पैसे वापस मांगने पर धमकी देने का आरोप। वहीं, जमशेदपुर में मतदाता सूची से नाम कटने का डर दिखाकर साइबर ठगी की कोशिश, कदमा-सोनारी में 20 शिकायतें सामने आईं।
NEET UG Counseling Fraud : जमशेदपुर में नीट यूजी काउंसलिंग के नाम पर 3.50 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। धतकीडीह निवासी महिला ने रांची के कोचिंग संचालक पर धोखाधड़ी और धमकी देने का आरोप लगाते हुए साकची थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। दूसरी ओर, फर्जी निर्वाचन आयोग नोटिस के जरिए मतदाताओं को निशाना बनाने वाले साइबर अपराधियों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
NEET UG Counseling Fraud : झारखंड में शिक्षा और करियर के नाम पर होने वाली कथित धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है। जमशेदपुर की एक महिला ने अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने के उद्देश्य से नीट यूजी काउंसलिंग में मदद लेने के लिए रांची के एक कोचिंग संचालक पर भरोसा किया। महिला का आरोप है कि दाखिला दिलाने का आश्वासन देकर उससे 3.50 लाख रुपये लिए गए, लेकिन जब बेटी को काउंसलिंग के माध्यम से दाखिला नहीं मिला तो पैसे वापस मांगने पर कथित तौर पर धमकी दी गई।
इस मामले में महिला की शिकायत के आधार पर साकची थाना में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। शिकायत में रांची स्थित एमआइ एजुकेशन सर्विसेज के संचालक शशिभूषण कुमार का नाम सामने आया है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
मामले की शिकायतकर्ता निगार अख्तर जमशेदपुर के धतकीडीह बी ब्लॉक, लाइन नंबर वन की निवासी हैं। वह डॉ. केएस निजामी की पत्नी बताई गई हैं। महिला ने पुलिस को बताया कि उनकी इच्छा अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने की थी। इसी उद्देश्य से उन्होंने नीट यूजी काउंसलिंग में सहायता लेने के लिए रांची के कोचिंग संचालक शशिभूषण कुमार से संपर्क किया था।
शिकायत के अनुसार, कोचिंग संचालक ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि वह उनकी बेटी की नीट यूजी काउंसलिंग में मदद करेंगे और दाखिला दिलाने में सहयोग करेंगे। बेटी के भविष्य और मेडिकल शिक्षा की उम्मीद को देखते हुए महिला ने उनके आश्वासन पर विश्वास किया।
आरोप है कि इसी भरोसे के आधार पर 27 जुलाई 2025 को निगार अख्तर ने शशिभूषण कुमार को 3.50 लाख रुपये दे दिए। महिला का कहना है कि यह रकम बेटी के मेडिकल कॉलेज में दाखिले की उम्मीद के साथ दी गई थी।
महिला की शिकायत के अनुसार, रुपये देने के बाद उनकी बेटी को नीट यूजी काउंसलिंग में सफलता नहीं मिली। इसके बाद निगार अख्तर ने कोचिंग संचालक से अपनी रकम वापस करने की मांग की।
आरोप है कि शुरुआत में संचालक लगातार पैसे लौटाने को लेकर टालमटोल करता रहा। महिला के अनुसार, कई बार संपर्क करने और रुपये वापस मांगने के बावजूद उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि बाद में कोचिंग संचालक ने रुपये लौटाने से इनकार कर दिया। महिला का कहना है कि जब उन्होंने पैसे वापस करने के लिए दबाव बनाया तो उन्हें कथित तौर पर कहा गया कि जो करना है कर लो।
निगार अख्तर ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस में शिकायत करने की बात कहने पर उन्हें अंजाम भुगतने की धमकी दी गई।
महिला का कहना है कि बेटी के भविष्य को लेकर उन्होंने कोचिंग संचालक पर भरोसा किया था, लेकिन दाखिला नहीं मिलने के बाद रकम वापस मांगने पर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसके बाद उन्होंने साकची थाना पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई। थाना प्रभारी के अनुसार, प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने मेडिकल शिक्षा में दाखिले की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है कि काउंसलिंग और दाखिले में सहायता के नाम पर किसी व्यक्ति या संस्थान को बड़ी रकम देने से पहले किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए।
नीट यूजी में दाखिले की प्रक्रिया विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है। मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की उम्मीद में कई परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से काफी दबाव का सामना करते हैं। ऐसे में किसी भी व्यक्ति द्वारा निश्चित दाखिले का आश्वासन दिए जाने पर उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।
अभिभावकों को चाहिए कि वे काउंसलिंग से संबंधित जानकारी आधिकारिक माध्यमों से प्राप्त करें। किसी भी निजी एजेंसी या व्यक्ति को बड़ी रकम देने से पहले उसकी पहचान, संस्थान की विश्वसनीयता और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की जांच करें।
यह भी जरूरी है कि किसी भी भुगतान की रसीद और लिखित समझौता सुरक्षित रखा जाए। यदि कोई व्यक्ति दाखिले की गारंटी देकर पैसे मांगता है, तो उसके दावों की पुष्टि किए बिना भुगतान करने से बचना चाहिए।
जमशेदपुर में साइबर अपराधियों ने अब मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों को ठगी का माध्यम बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक नोटिस जैसे दिखने वाले फर्जी ई-मेल के जरिए लोगों को मतदाता सूची से नाम कटने का डर दिखाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जमशेदपुर पश्चिम के कदमा और सोनारी क्षेत्रों में इस तरह की लगभग 20 शिकायतें सामने आई हैं। इन शिकायतों में टाटा स्टील के कर्मचारियों और नामचीन डॉक्टरों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है।
उप जिला निर्वाचन पदाधिकारी प्रियंका सिंह ने बताया कि इस तरह की अधिकांश शिकायतें कदमा और सोनारी क्षेत्रों से मिली हैं। शनिवार के बाद कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग ई-मेल के माध्यम से किसी मतदाता से दस्तावेज, पासवर्ड या ओटीपी नहीं मांगता। इस मामले की जांच के लिए एसएसपी और साइबर सुरक्षा सेल को पत्र लिखा गया है।
साइबर अपराधी मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान विसंगति होने का दावा करते हुए लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद नाम बहाल कराने के नाम पर फर्जी वेरिफिकेशन लिंक भेजे जाते हैं।









