Jamshedpur News : पहली बार बोर्ड बैठक में शामिल हुए सांसद और विधायक, विकास योजनाओं में पारदर्शिता व समान विकास को लेकर गरमाई बहस
Jamshedpur News : जमशेदपुर के मानगो नगर निगम की बोर्ड बैठक मंगलवार को भारी हंगामे के बीच संपन्न हुई। मेयर सुधा गुप्ता के खिलाफ पार्षदों ने नारेबाजी करते हुए विकास योजनाओं में कमीशनखोरी और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए। विवाद बढ़ने पर सांसद और विधायक सरयू राय बैठक से बाहर निकल गए, जबकि बाद में मेयर भी बैठक छोड़कर चली गईं।
जमशेदपुर: मानगो नगर निगम की मंगलवार को आयोजित बोर्ड बैठक हंगामे, तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप के बीच संपन्न हुई। नगर निगम के इतिहास में यह पहला अवसर था जब बोर्ड बैठक में क्षेत्र के सांसद और विधायक भी शामिल हुए। हालांकि विकास कार्यों की समीक्षा के उद्देश्य से बुलाई गई बैठक जल्द ही राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का केंद्र बन गई।
बैठक के दौरान कई पार्षदों ने मेयर सुधा गुप्ता के खिलाफ खुलकर विरोध जताया। कुछ पार्षदों ने “मेयर मुर्दाबाद” के नारे लगाए, जिससे सभागार का माहौल तनावपूर्ण हो गया। बढ़ते हंगामे के कारण बैठक की कार्यवाही कई बार प्रभावित हुई और अंततः सांसद तथा विधायक सरयू राय बीच बैठक से बाहर निकल गए। कुछ देर बाद मेयर भी बैठक छोड़कर चली गईं।
मानगो नगर निगम की बोर्ड बैठक का मुख्य एजेंडा शहर में चल रही विकास योजनाओं की प्रगति, विभिन्न वार्डों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और लंबित परियोजनाओं की समीक्षा था। बैठक में सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं पर चर्चा होनी थी।
शुरुआती कार्यवाही सामान्य रही, लेकिन जैसे ही वार्डवार विकास कार्यों और योजनाओं के आवंटन का मुद्दा उठा, कई पार्षदों ने मेयर पर गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए। पार्षदों का आरोप था कि विकास कार्यों के चयन और स्वीकृति में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है तथा कुछ योजनाओं में कमीशनखोरी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
पार्षदों ने यह भी कहा कि नगर निगम की योजनाओं का लाभ सभी वार्डों को समान रूप से नहीं मिल रहा है और कई क्षेत्रों की उपेक्षा की जा रही है।
बैठक में विरोध कर रहे पार्षदों का कहना था कि नगर निगम की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी विकास योजनाओं की स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया और कार्यों की प्रगति सार्वजनिक की जाए ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका समाप्त हो सके।
पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ वार्डों में लगातार विकास कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं, जबकि अन्य वार्डों की मूलभूत समस्याएं वर्षों से लंबित हैं। उनका कहना था कि नगर निगम का दायित्व पूरे मानगो क्षेत्र का समान विकास करना है, न कि चुनिंदा इलाकों को प्राथमिकता देना।
बैठक में मौजूद सांसद ने विकास कार्यों की नियमित निगरानी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नगर निगम की योजनाओं की समीक्षा केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि हर महीने बोर्ड बैठक आयोजित कर प्रत्येक परियोजना की प्रगति की समीक्षा की जानी चाहिए।
सांसद ने कहा कि यदि मासिक समीक्षा होगी तो सड़क, जलापूर्ति, सफाई और अन्य नागरिक समस्याओं का समाधान समय पर किया जा सकेगा। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शहर के विकास के लिए मिलकर काम करने की अपील भी की।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी वार्ड के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और विकास योजनाओं का लाभ समान रूप से सभी नागरिकों तक पहुंचना चाहिए।
मानगो क्षेत्र के विधायक सरयू राय भी बोर्ड बैठक में मौजूद थे। विकास संबंधी मुद्दों पर चर्चा के दौरान पार्षदों के बीच बहस लगातार तेज होती गई। आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी के कारण बैठक का वातावरण इतना तनावपूर्ण हो गया कि विधायक और सांसद दोनों ही बैठक से बाहर निकल गए।
उनके बाहर जाने के बाद भी पार्षदों के बीच विवाद जारी रहा। कई पार्षद एक-दूसरे पर टिप्पणी करते रहे, जिससे बैठक की कार्यवाही प्रभावित होती रही।
बैठक का सबसे विवादित मुद्दा मेयर पर लगाए गए कथित कमीशनखोरी के आरोप रहे। विरोध कर रहे पार्षदों ने दावा किया कि विकास योजनाओं में पारदर्शिता की कमी है और कार्यों के आवंटन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालांकि बैठक के दौरान लगाए गए ये आरोप राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का हिस्सा रहे। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही बैठक के दौरान किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट को प्रस्तुत किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में आरोपों की निष्पक्ष जांच और दस्तावेजी समीक्षा आवश्यक होती है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
बढ़ते विरोध और लगातार हो रही नारेबाजी के बीच मेयर सुधा गुप्ता भी बैठक को बीच में छोड़कर चली गईं। उनके बाहर जाने के बाद भी कुछ समय तक पार्षदों के बीच बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
नगर निगम के अधिकारियों ने बाद में बैठक की शेष कार्यवाही पूरी करने का प्रयास किया, लेकिन हंगामे की वजह से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।
मंगलवार की बोर्ड बैठक ने एक बार फिर यह संकेत दिया कि मानगो नगर निगम के भीतर जनप्रतिनिधियों के बीच मतभेद गहरे हैं। विकास कार्यों की प्राथमिकता, योजनाओं के वितरण और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर लंबे समय से असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बोर्ड बैठकों में संवाद और पारदर्शिता को मजबूत नहीं किया गया तो विकास परियोजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है। वहीं नागरिकों की अपेक्षा है कि जनप्रतिनिधि आपसी विवादों से ऊपर उठकर शहर की मूलभूत समस्याओं के समाधान पर ध्यान दें।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पार्षदों द्वारा लगाए गए आरोपों और पारदर्शिता की मांग पर नगर निगम प्रशासन क्या कदम उठाता है। यदि मासिक समीक्षा बैठकों का प्रस्ताव लागू होता है तो विकास योजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी हो सकती है।
इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि मेयर और पार्षदों के बीच उत्पन्न विवाद को सुलझाने के लिए कोई संस्थागत पहल होती है या नहीं। मानगो के नागरिकों की नजर अब नगर निगम की अगली बोर्ड बैठक और विकास कार्यों की वास्तविक प्रगति पर टिकी हुई है।














