Ranchi News : रांची सदर अस्पताल बनेगा झारखंड का सबसे बड़ा डिजिटल हेल्थ हब, PET-CT, कैथ लैब और बोन मैरो ट्रांसप्लांट की मिलेगी सुविधा

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Ranchi News : अगले 3 से 6 माह में शुरू होंगी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं, कैंसर, हृदय और रक्त रोगियों को राज्य से बाहर जाने की जरूरत होगी कम

Ranchi News : रांची सदर अस्पताल में जल्द कैथ लैब, PET-CT स्कैन, बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, टेली-SNCU और ई-संजीवनी हब जैसी आधुनिक सुविधाएं शुरू होंगी। जानिए झारखंड सरकार की पूरी स्वास्थ्य योजना और मरीजों को होने वाले फायदे।

Ranchi News : झारखंड की राजधानी रांची स्थित सदर अस्पताल आने वाले महीनों में राज्य की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे आधुनिक केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में कैथ लैब, PET-CT स्कैन, बोन मैरो स्टेम सेल प्रत्यारोपण इकाई, टेली-SNCU और ई-संजीवनी हब जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है।

सरकार का लक्ष्य केवल अस्पताल में नई मशीनें लगाना नहीं है, बल्कि इसे पूरे झारखंड के लिए डिजिटल हेल्थ नेटवर्क के केंद्रीय केंद्र के रूप में विकसित करना है। इससे ग्रामीण और जिला अस्पतालों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा।

जिला स्वास्थ्य समिति के अनुसार, सदर अस्पताल में अगले तीन माह के भीतर कैथ लैब और PET-CT स्कैन की सुविधा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने बताया कि PET-CT स्कैन की स्थापना के लिए जनवरी में सरकारी ई-निविदा जारी की जा चुकी है। यह सुविधा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत निजी एजेंसी द्वारा संचालित की जाएगी।

इन दोनों सुविधाओं के शुरू होने से सबसे अधिक लाभ दो प्रकार के मरीजों को मिलेगा:

  • गंभीर हृदय रोगियों की एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाएं रांची में ही संभव होंगी।
  • कैंसर मरीजों की सटीक जांच और रोग के फैलाव का आकलन PET-CT स्कैन से किया जा सकेगा।

अब तक ऐसे कई मरीजों को बेहतर जांच और इलाज के लिए दिल्ली, कोलकाता, वेल्लोर या अन्य राज्यों के अस्पतालों में रेफर किया जाता था।

रांची सदर अस्पताल में बोन मैरो स्टेम सेल प्रत्यारोपण इकाई की स्थापना के लिए राज्य सरकार ने 13.45 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना वित्तीय वर्ष 2026–27 में स्वीकृत हुई है और इसे अगले छह माह में शुरू करने की योजना है।

यह सुविधा विशेष रूप से इन बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए महत्वपूर्ण होगी:

  • थैलेसीमिया
  • ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर)
  • एप्लास्टिक एनीमिया
  • अन्य गंभीर रक्त विकार

वर्तमान में झारखंड के अधिकांश मरीजों को बोन मैरो प्रत्यारोपण के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ता है, जिससे लाखों रुपये का अतिरिक्त खर्च और लंबा इंतजार करना पड़ता है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल भवन और मशीनें पर्याप्त नहीं होंगी। सफल संचालन के लिए प्रशिक्षित प्रत्यारोपण विशेषज्ञ, हेमेटोलॉजिस्ट, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था, आधुनिक लैब और विशेष नर्सिंग टीम की भी आवश्यकता होगी।

स्वास्थ्य विभाग सदर अस्पताल को झारखंड के सबसे बड़े डिजिटल हेल्थ हब के रूप में विकसित कर रहा है। इसके तहत दो प्रमुख डिजिटल सेवाएं शुरू की जाएंगी:

1. टेली-SNCU हब

टेली-SNCU (Special Newborn Care Unit) के माध्यम से राज्य के जिला अस्पतालों और ग्रामीण नवजात देखभाल इकाइयों को रांची सदर अस्पताल से जोड़ा जाएगा।

यदि किसी ग्रामीण अस्पताल में गंभीर नवजात भर्ती होता है, तो वहां के डॉक्टर डिजिटल माध्यम से रांची के विशेषज्ञ शिशु रोग विशेषज्ञों से तत्काल परामर्श ले सकेंगे। इससे उपचार का निर्णय तेजी से लिया जा सकेगा और अनावश्यक रेफरल भी कम होंगे।

2. ई-संजीवनी हब

ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म के माध्यम से दूरदराज के मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑनलाइन सलाह उपलब्ध कराई जाएगी।

इस व्यवस्था से मरीजों को हर छोटी या मध्यम जटिलता वाली बीमारी के लिए रांची आने की आवश्यकता नहीं होगी। जिला अस्पतालों के चिकित्सक विशेषज्ञ राय लेकर स्थानीय स्तर पर ही इलाज जारी रख सकेंगे।

पहले से मौजूद हैं कई आधुनिक सुविधाएं

रांची सदर अस्पताल में पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण तकनीकी सुविधाएं विकसित की जा चुकी हैं। प्रस्तावित नई सेवाएं इन्हीं का विस्तार होंगी।

मौजूदा सुविधाउपलब्धता
128-स्लाइस CT स्कैनउपलब्ध
MRIउपलब्ध
डिजिटल एक्स-रेउपलब्ध
24×7 अल्ट्रासाउंडउपलब्ध
कलर डॉप्लरउपलब्ध
डायलिसिसउपलब्ध
ECG एवं TMTउपलब्ध
टेली-रेडियोलॉजीउपलब्ध
टेली-ICUउपलब्ध

इन सुविधाओं के कारण सदर अस्पताल पहले ही राजधानी के प्रमुख सरकारी चिकित्सा केंद्रों में शामिल हो चुका है।

डिजिटल स्वास्थ्य परियोजना के तहत सदर अस्पताल में टेली-रेडियोलॉजी केंद्र स्थापित किया गया है। इसके लिए लगभग 1.21 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

इस प्रणाली के माध्यम से सरकारी अस्पतालों से भेजी गई डिजिटल मेडिकल इमेज का विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट दूर बैठकर विश्लेषण करेंगे। इनमें शामिल हैं:

  • एक्स-रे
  • CT स्कैन
  • MRI
  • मैमोग्राफी

पहले चरण में राज्य के छह जिलों को इस नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

इससे रिपोर्ट मिलने में लगने वाला समय कम होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट की कमी की भरपाई भी हो सकेगी।

कैंसर उपचार के लिए 200 करोड़ का बजटीय प्रावधान

झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के बजट में कैंसर उपचार को मजबूत बनाने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

सरकार ने घोषणा की है कि:

  • पांच चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पतालों में PET-CT मशीनें लगाई जाएंगी।
  • राज्य के प्रमुख अस्पतालों में कैथ लैब स्थापित किए जाएंगे।
  • कैंसर एवं हृदय रोग उपचार की सरकारी क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा।

रांची सदर अस्पताल इस योजना का प्रमुख केंद्र माना जा रहा है।

मरीजों को क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?

नई सुविधाओं के शुरू होने के बाद झारखंड के लाखों मरीजों को कई स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है।

राज्य से बाहर रेफरल में कमी

कैंसर, हृदय और रक्त रोगियों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी।

समय पर विशेषज्ञ परामर्श

डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से ग्रामीण अस्पतालों को तत्काल विशेषज्ञ सलाह मिल सकेगी।

आर्थिक बोझ घटेगा

बाहर इलाज पर होने वाले यात्रा और आवास के खर्च में कमी आएगी।

गंभीर मरीजों की बेहतर निगरानी

टेली-SNCU और टेली-ICU जैसी सेवाएं आपात स्थितियों में जीवनरक्षक साबित हो सकती हैं।

सबसे बड़ी चुनौती होगी नियमित संचालन

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी आधुनिक अस्पताल की सफलता केवल मशीनें खरीदने से नहीं, बल्कि उनके निरंतर संचालन से तय होती है।

PET-CT, कैथ लैब और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी सेवाओं के लिए आवश्यक होगा:

  • सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की नियुक्ति
  • प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता
  • विशेष नर्सिंग स्टाफ
  • संक्रमण नियंत्रण प्रणाली
  • 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं
  • मजबूत इंटरनेट और डिजिटल कनेक्टिविटी

यदि इन सभी पहलुओं पर समान रूप से काम किया जाता है, तो रांची सदर अस्पताल न केवल राजधानी बल्कि पूरे झारखंड की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण रेफरल एवं डिजिटल विशेषज्ञ केंद्र बन सकता है।

रांची सदर अस्पताल का यह विस्तार झारखंड की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अत्याधुनिक जांच, सुपर स्पेशियलिटी उपचार और डिजिटल हेल्थ नेटवर्क का संयोजन राज्य के मरीजों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उनके अपने प्रदेश में उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है। अब नजर इस बात पर होगी कि घोषित समयसीमा के भीतर सभी सुविधाएं शुरू होती हैं और उनके लिए पर्याप्त मानव संसाधन भी उपलब्ध कराया जाता है।

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