Dhanbad News : बराकर में पहली बार निकली 301 नन्हे कांवरियों की भव्य यात्रा, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा शहर

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Dhanbad News : सावन में बराकर बना शिवमय, 2 से 8 वर्ष के 301 बच्चों ने कांवर लेकर सीधेश्वरी मंदिर तक पैदल यात्रा कर किया जलाभिषेक

Dhanbad News : पश्चिम बंगाल के बराकर में सावन के पावन अवसर पर पहली बार 301 नन्हे कांवरियों की भव्य बाल कांवरिया यात्रा निकाली गई। डायमंड मैदान घाट से पवित्र जल भरकर बच्चों ने “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष के साथ सीधेश्वरी मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मंत्री डॉ. अजय पोद्दार सहित सैकड़ों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने।

सावन माह की पवित्र बेला में पश्चिम बंगाल के बराकर शहर ने रविवार को एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का साक्षी बनकर नई मिसाल कायम की। पहली बार 301 नन्हे कांवरियों ने हाथों में सजी-धजी कांवर उठाकर सामूहिक बाल कांवरिया यात्रा निकाली। दो से आठ वर्ष तक की उम्र के मासूम बच्चों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष करते हुए पैदल यात्रा पूरी की।

यह आयोजन केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और आध्यात्मिक संस्कारों से जोड़ने का एक प्रेरणादायी प्रयास बन गया। पूरे शहर में भगवा परिधान पहने बच्चों की कतारें और महादेव के जयकारों से वातावरण पूरी तरह शिवमय दिखाई दिया।

डायमंड मैदान घाट से शुरू हुई आस्था की यात्रा

बाल कांवरिया यात्रा की शुरुआत बराकर ओल्ड जीटी रोड स्थित डायमंड मैदान घाट से हुई। यहां सभी बच्चों ने अपने अभिभावकों और आयोजकों की मौजूदगी में बराकर नदी से पवित्र जल भरा। घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार और शिव भजनों के बीच बच्चों ने अपनी छोटी-छोटी कांवरों में जल भरकर यात्रा प्रारंभ की।

यात्रा का मार्ग डायमंड मैदान घाट से बैगुनिया होते हुए सीधेश्वरी मंदिर तक निर्धारित किया गया था। पूरे रास्ते स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर नन्हे कांवरियों का स्वागत किया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने बच्चों के लिए शरबत, फल और पेयजल की व्यवस्था भी की।

सीधेश्वरी मंदिर में किया भगवान शिव का जलाभिषेक

करीब दो किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी करने के बाद सभी नन्हे कांवरिये सीधेश्वरी मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में बच्चों ने विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और परिवार, समाज तथा देश की सुख-समृद्धि की कामना की।

मंदिर परिसर में “ॐ नमः शिवाय” और “बोल बम” के जयघोष लगातार गूंजते रहे। मासूम बच्चों के चेहरे पर भक्ति की चमक और हाथों में कांवर का दृश्य उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया।

मंत्री डॉ. अजय पोद्दार ने बढ़ाया बच्चों का उत्साह

यात्रा का सबसे विशेष क्षण तब देखने को मिला जब राज्य के मंत्री डॉ. अजय पोद्दार स्वयं बराकर नदी घाट पहुंचे। उन्होंने नन्हे कांवरियों का उत्साहवर्धन किया और बच्चों के साथ पैदल यात्रा में भी शामिल हुए। सीधेश्वरी मंदिर पहुंचकर उन्होंने भगवान शिव को जल अर्पित किया।

इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति में बच्चों को बचपन से ही भगवान राम, कृष्ण, महादेव और देवी-देवताओं की कथाओं एवं आदर्शों से परिचित कराया जाता है। उनके अनुसार, बाल कांवरिया यात्रा जैसी पहल बच्चों के भीतर धार्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

उन्होंने आयोजकों और बराकर के युवाओं की इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक एकता का संदेश देते हैं।

नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने की पहल

इस भव्य आयोजन के मुख्य आयोजक केशव पोद्दार और उनकी धर्मपत्नी निकिता पोद्दार ने बताया कि आधुनिक दौर में बच्चे मोबाइल, वीडियो गेम, फुटबॉल और क्रिकेट जैसी गतिविधियों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे समय में उन्हें अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना बेहद आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल जलाभिषेक कराना नहीं, बल्कि बचपन से ही बच्चों के मन में महादेव, महाकाल और सनातन संस्कृति के प्रति श्रद्धा का बीजारोपण करना है। उनका सपना है कि आज के ये नन्हे कांवरिये बड़े होकर भविष्य में सुल्तानगंज से देवघर तक की प्रसिद्ध कांवर यात्रा भी पूरी करें और सनातन परंपराओं को आगे बढ़ाएं।

युवाओं के सामूहिक प्रयास से बना आयोजन सफल

आयोजकों के अनुसार इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसका आयोजन किसी राजनीतिक मंच या संस्था के सहारे नहीं, बल्कि बराकर के युवा वर्ग की सामूहिक पहल से किया गया। स्थानीय युवाओं ने महीनों की तैयारी के बाद 301 बच्चों को एक साथ जोड़कर इस ऐतिहासिक यात्रा को सफल बनाया।

यात्रा के दौरान सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, पेयजल, बच्चों की देखभाल और यातायात व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। स्वयंसेवकों की टीम पूरे मार्ग में बच्चों के साथ मौजूद रही ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

कार्यक्रम को सफल बनाने में आदित्य वर्मा, बिट्टू विश्वकर्मा, विनय यादव, प्रेम देव दास, सोनू चौरसिया, राजू यादव और मनमोहन राय सहित अनेक युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अगले वर्ष 1100 बच्चों को जोड़ने का लक्ष्य

पहली ही बाल कांवरिया यात्रा को मिली अभूतपूर्व सफलता से आयोजक उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष इस यात्रा में लगभग 1100 बच्चों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि उसके अगले वर्ष यह संख्या 2100 तक पहुंचाने की योजना है।

आयोजकों का कहना है कि भविष्य में इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहल का विस्तार पश्चिम बंगाल के अन्य शहरों और क्षेत्रों में भी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को सनातन संस्कृति से जोड़ा जा सके।

पूरे शहर में दिखी भक्ति और उत्साह की अनोखी तस्वीर

बराकर की गलियों में जब छोटे-छोटे कदम कांवर लेकर आगे बढ़ रहे थे, तब हर ओर केवल शिवभक्ति का वातावरण दिखाई दे रहा था। स्थानीय महिलाओं ने घरों के बाहर रंगोली बनाकर बच्चों का स्वागत किया, जबकि बुजुर्गों ने उन्हें आशीर्वाद दिया। अभिभावकों के लिए भी यह क्षण भावुक और गर्व से भर देने वाला रहा।

यह आयोजन यह संदेश देने में सफल रहा कि आस्था की कोई उम्र नहीं होती। जब बचपन से ही संस्कारों की नींव मजबूत की जाती है, तब समाज की सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचती है।

बराकर की पहली 301 नन्हे कांवरियों की बाल कांवरिया यात्रा न केवल एक धार्मिक आयोजन रही, बल्कि यह सामाजिक सहभागिता, युवा नेतृत्व और सांस्कृतिक संरक्षण का भी प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरी है।

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