Jharkhand News : चतरा में नक्सलियों के मददगार कुलदीप गंझू गिरफ्तार, मनोहर गंझू से जुड़े थे तार

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Jharkhand News : लावालौंग थाना पुलिस की कार्रवाई, नक्सलियों तक खाने-पीने की सामग्री पहुंचाने और लेवी वसूली में मध्यस्थता करने का आरोप; आरोपी का पहले भी रहा है आपराधिक इतिहास

Jharkhand News : झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र में पुलिस ने नक्सलियों के सहयोगी के रूप में आरोपित कुलदीप गंझू को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, कुलदीप गंझू के तार लंबे समय से फरार चल रहे नक्सली मनोहर गंझू से जुड़े थे। उस पर नक्सलियों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने और विकास कार्यों में लगे ठेकेदारों से लेवी वसूली में मध्यस्थता करने का आरोप है।

झारखंड के चतरा जिले में नक्सलियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान लावालौंग थाना पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे नक्सली मनोहर गंझू के कथित सहयोगी कुलदीप गंझू को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी को मंगलवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस के मुताबिक, कुलदीप गंझू लावालौंग थाना क्षेत्र के सिल्दाग गांव का रहने वाला है। जांच के दौरान उसके संबंध नक्सली गतिविधियों से जुड़े होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। पुलिस का दावा है कि वह जंगल में सक्रिय नक्सलियों को जरूरी सामान उपलब्ध कराने और उनके लिए अन्य प्रकार की मदद पहुंचाने में भूमिका निभाता था।

पुलिस की इस कार्रवाई को क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क और उसके स्थानीय सहयोगियों पर दबाव बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार कुलदीप गंझू का संबंध वर्ष 2023 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात नक्सली अमर सिंह भोक्ता से भी रहा था। पुलिस का कहना है कि कुलदीप, अमर सिंह भोक्ता का करीबी था और उसके साथ नक्सली गतिविधियों में सहयोग करता था।

अमर सिंह भोक्ता के मारे जाने के बाद कुलदीप गंझू का संपर्क कथित तौर पर नक्सली मनोहर गंझू से हो गया। इसके बाद वह मनोहर गंझू के नेटवर्क के संपर्क में रहकर नक्सलियों की मदद करने लगा।

हालांकि, पुलिस द्वारा लगाए गए इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगी। फिलहाल आरोपी को पुलिस ने संबंधित मामले में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

पुलिस जांच के अनुसार, कुलदीप गंझू पर जंगल में सक्रिय नक्सलियों तक खाने-पीने की सामग्री और अन्य आवश्यक चीजें पहुंचाने का आरोप है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए नक्सली संगठनों के स्थानीय सहयोगियों की भूमिका लंबे समय से चुनौती बनी हुई है, क्योंकि ऐसे लोग कथित तौर पर जंगल में छिपे नक्सलियों तक भोजन, दैनिक उपयोग की वस्तुएं और दूसरी जरूरी सामग्री पहुंचाने में मदद कर सकते हैं।

पुलिस का कहना है कि नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने के लिए केवल हथियारबंद सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके सहयोगियों और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर भी प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। इसी क्रम में कुलदीप गंझू की गिरफ्तारी को देखा जा रहा है।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी पर विकास कार्यों में लगे ठेकेदारों और नक्सली मनोहर गंझू के बीच लेवी वसूली को लेकर मध्यस्थता करने का भी आरोप लगाया है। पुलिस के मुताबिक, क्षेत्र में विकास कार्यों से जुड़े लोगों पर नक्सली संगठन कथित तौर पर लेवी देने का दबाव बनाते रहे हैं।

आरोप है कि कुलदीप गंझू इसी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाता था। वह ठेकेदारों और नक्सली नेटवर्क के बीच संपर्क स्थापित करने में मदद करता था। यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह स्थानीय स्तर पर नक्सली नेटवर्क के काम करने के तरीके को समझने में पुलिस के लिए महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।

नक्सली संगठनों द्वारा लेवी की वसूली को सुरक्षा एजेंसियां गंभीर चुनौती मानती हैं, क्योंकि इससे न केवल आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ता है, बल्कि विकास परियोजनाओं को भी प्रभावित करने का खतरा रहता है।

लावालौंग पुलिस के अनुसार, कुलदीप गंझू पर क्षेत्र के ग्रामीणों के बीच भय का माहौल बनाने का भी आरोप रहा है। पुलिस का कहना है कि नक्सली गतिविधियों से जुड़े सहयोगियों की मौजूदगी से ग्रामीणों पर दबाव की स्थिति बनती है और लोग कई बार पुलिस या प्रशासन को जानकारी देने से भी बचते हैं।

ऐसे में पुलिस द्वारा स्थानीय स्तर पर सक्रिय संदिग्ध सहयोगियों की पहचान कर कार्रवाई करने को नक्सल विरोधी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा का माहौल मजबूत करने और आम लोगों का विश्वास बढ़ाने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।

लावालौंग थाना प्रभारी चंदन कुमार के अनुसार, गिरफ्तार कुलदीप गंझू का पहले से भी आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस के मुताबिक, वह एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में जेल जा चुका है।

पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी लावालौंग थाना कांड संख्या 63/2022 में सीएलए एक्ट के तहत की है। संबंधित मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी। पुलिस आरोपी से जुड़े अन्य संपर्कों और संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल कर सकती है।

आपराधिक इतिहास और मौजूदा मामले में लगाए गए आरोपों को देखते हुए पुलिस की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

चतरा पुलिस का कहना है कि जिले में नक्सलियों, उनके सहयोगियों और उन्हें कथित तौर पर पनाह या सहायता देने वाले लोगों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। सुरक्षा बलों और पुलिस की कोशिश है कि नक्सली संगठनों के स्थानीय नेटवर्क को कमजोर किया जाए और ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार किया जा सके।

लावालौंग और आसपास के वन क्षेत्रों में लंबे समय से नक्सली गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती रही हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर नक्सली नेटवर्क से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी पुलिस की रणनीति का अहम हिस्सा है।

थाना प्रभारी चंदन कुमार ने स्पष्ट किया कि नक्सलियों और उन्हें सहयोग या पनाह देने वाले तत्वों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में ऐसे तत्वों के लिए अब कोई जगह नहीं है

कुलदीप गंझू की गिरफ्तारी से पुलिस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि नक्सली गतिविधियों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल लोगों के साथ-साथ उनके कथित मददगारों पर भी नजर रखी जा रही है। नक्सली नेटवर्क को संचालित करने में स्थानीय स्तर पर मिलने वाली मदद को रोकना सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकताओं में शामिल है।

इस कार्रवाई के बाद अब पुलिस की जांच इस बात पर भी केंद्रित हो सकती है कि कुलदीप गंझू के संपर्क में और कौन-कौन लोग थे तथा नक्सली मनोहर गंझू के नेटवर्क को किस स्तर तक स्थानीय सहयोग मिल रहा था।

फिलहाल पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मामले से जुड़े अन्य तथ्यों के सामने आने की संभावना है। चतरा पुलिस का कहना है कि नक्सल विरोधी अभियान को लगातार तेज किया जाएगा और जिले में कानून-व्यवस्था तथा आम लोगों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

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