Jamshedpur News : दो पुलिसकर्मियों पर आदिवासी जमीन हथियाने का आरोप, ग्राम सभा ने डीसी को सौंपा ज्ञापन

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Jamshedpur News : पूर्वी सिंहभूम के जसकंडीह गांव में भूमि विवाद ने पकड़ा तूल, ग्राम सभा ने पुलिसकर्मियों पर भूमि माफियाओं से मिलीभगत, धमकी और सीएनटी अधिनियम के उल्लंघन की जांच की उठाई मांग

Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम के जसकंडीह गांव में ग्राम सभा ने दो पुलिसकर्मियों पर आदिवासी जमीन पर कब्जा कराने की कोशिश का आरोप लगाया है। उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और सीएनटी अधिनियम व पेसा कानून के प्रभावी पालन की मांग की गई है।

जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के परसुडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत जसकंडीह गांव में आदिवासी भूमि विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। गांव की ग्राम सभा ने इस मामले को लेकर उपायुक्त (डीसी) और संबंधित अंचल अधिकारी को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए परसुडीह थाना के दो पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्राम सभा का कहना है कि दोनों पुलिसकर्मी कथित रूप से भूमि माफियाओं के साथ मिलकर विवादित आदिवासी जमीन पर कब्जा कराने का प्रयास कर रहे हैं और ग्रामीणों को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं।

ग्राम सभा के अनुसार यह मामला केवल एक जमीन विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों, ग्राम सभा की संवैधानिक भूमिका और भूमि संरक्षण कानूनों से भी जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

ग्राम सभा ने लगाए गंभीर आरोप

डीसी को सौंपे गए ज्ञापन में ग्राम सभा ने आरोप लगाया है कि परसुडीह थाना के दो पुलिसकर्मी भूमि माफियाओं के साथ मिलकर विवादित भूमि पर कब्जा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। ग्राम सभा का कहना है कि इस दौरान गांव के पारंपरिक नेतृत्व और ग्राम सभा के अधिकारों की अनदेखी की गई।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पुलिसकर्मियों ने ग्राम सभा के प्रतिनिधियों पर दबाव बनाने की कोशिश की और गांव के हातु मुंडा जगन्नाथ देवगम को कथित रूप से धमकाते हुए झूठे मुकदमे में फंसाने की चेतावनी दी। ग्रामीणों का आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई से गांव में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है।

पुराने सर्वे रिकॉर्ड का दिया गया हवाला

ग्राम सभा ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि जिस भूमि को लेकर विवाद चल रहा है, उसका रिकॉर्ड पुराने सर्वे सेटलमेंट में दर्ज है। इस कारण भूमि के स्वामित्व और अधिकार का अंतिम निर्णय संबंधित राजस्व अधिकारियों द्वारा किया जाना है।

ग्राम सभा का कहना है कि जब तक सक्षम प्राधिकारी की ओर से अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक विवादित जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए। इसी उद्देश्य से वहां सूचना बोर्ड लगाया गया था, ताकि सभी पक्षों को यह जानकारी रहे कि मामला विचाराधीन है।

हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त सूचना बोर्ड को हटाने के लिए दबाव बनाया गया, जिससे विवाद और अधिक गहरा गया।

लगातार थाने बुलाने का लगाया आरोप

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि पिछले लगभग एक महीने से संबंधित पुलिसकर्मी लगातार हातु मुंडा को फोन कर थाने बुलाने का प्रयास कर रहे थे। ग्राम सभा का कहना है कि उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि भूमि विवाद का समाधान राजस्व विभाग और ग्राम सभा के स्तर पर होना चाहिए, न कि पुलिस के दबाव के माध्यम से।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल ग्राम सभा की स्वायत्तता प्रभावित होती है, बल्कि आदिवासी समुदाय के पारंपरिक अधिकारों का भी उल्लंघन होता है।

सीएनटी अधिनियम और पेसा कानून का उठाया मुद्दा

ग्राम सभा ने अपने ज्ञापन में छोटानागपुर काश्तकारी (सीएनटी) अधिनियम के कथित उल्लंघन का भी मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि आदिवासी भूमि की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण से जुड़े मामलों में कानून का पूरी तरह पालन किया जाना आवश्यक है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि यह जांच की जाए कि कहीं विवादित भूमि की अवैध खरीद-बिक्री या कब्जे का प्रयास तो नहीं किया गया। यदि ऐसा पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

इसके साथ ही ग्राम सभा ने पेसा कानून-1996 और झारखंड पेसा नियमावली-2026 को प्रभावी ढंग से लागू करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को मिले अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए और भूमि से जुड़े मामलों में उसकी भूमिका को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

आदिवासी भूमि की सुरक्षा की मांग

ज्ञापन में ग्राम सभा ने प्रशासन से मांग की है कि आदिवासी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में ऐसे विवाद और बढ़ सकते हैं।

ग्राम सभा ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार की गतिविधि तब तक रोकी जाए, जब तक राजस्व विभाग द्वारा अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपील

ग्रामीणों ने उपायुक्त से पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।

इसके अलावा कथित भूमि माफियाओं की भूमिका की भी जांच करने और आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

पुलिस प्रशासन का पक्ष आना बाकी

इस पूरे मामले को लेकर खबर लिखे जाने तक पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि प्रशासन इस मामले की जांच कराता है तो जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोप कितने सही हैं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल जसकंडीह गांव का यह भूमि विवाद स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार निर्णय लेगा और आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेगा।

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