Jamshedpur News : जमशेदपुर के पोटका प्रखंड स्थित हल्दीपोखर रेलवे स्टेशन के पास संचालित फैक्ट्री से उड़ रही सफेद पत्थर और क्वार्ट्जाइट की धूल ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लोगों ने आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और जल स्रोतों के प्रदूषित होने की शिकायत की है। जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
Jamshedpur News : जमशेदपुर के हल्दीपोखर रेलवे स्टेशन के पास स्थित फैक्ट्री से फैल रहे प्रदूषण से स्थानीय लोग परेशान हैं। क्वार्ट्जाइट और सफेद पत्थर की पिसाई से निकलने वाली धूल घरों, सड़कों और रेलवे प्लेटफॉर्म तक पहुंच रही है। जानिए पूरा मामला।
Jamshedpur News : पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड स्थित हल्दीपोखर रेलवे स्टेशन के समीप संचालित एक फैक्ट्री से फैल रहे प्रदूषण को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। आरोप है कि फैक्ट्री में सफेद पत्थर (व्हाइट स्टोन) और क्वार्ट्जाइट पत्थर की पिसाई की जाती है, जिससे निकलने वाली महीन धूल पूरे इलाके में फैल रही है। इससे आसपास रहने वाले लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो गया है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्ट्री से उड़ने वाली सफेद धूल अब केवल फैक्ट्री परिसर तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि आसपास की सड़कें, घर, दुकानें, खेत और यहां तक कि हल्दीपोखर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक इसकी चपेट में आ गए हैं। धूल के कारण लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है, जबकि आंखों में जलन और एलर्जी जैसी शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।

ग्रामीणों के अनुसार फैक्ट्री में पत्थरों की पिसाई के दौरान पर्याप्त प्रदूषण नियंत्रण के उपाय नहीं किए जा रहे हैं। परिणामस्वरूप हवा में उड़ने वाले महीन धूल कण पूरे क्षेत्र में फैल जाते हैं। सड़क से गुजरने वाले बाइक सवारों, साइकिल चालकों और पैदल यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि धूल के कारण कई बार सड़क पर दृश्यता भी प्रभावित होती है। वाहन चालकों को सावधानी से चलना पड़ता है और लंबे समय तक इस वातावरण में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि फैक्ट्री से उड़ने वाली धूल अब हल्दीपोखर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक पहुंच रही है। स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करने वाले यात्रियों को भी इस प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है।
यात्रियों के अनुसार प्लेटफॉर्म पर बैठने के दौरान धूल लगातार कपड़ों और सामान पर जम जाती है। कई लोगों ने आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होने की भी शिकायत की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि फैक्ट्री से निकलने वाली धूल और अन्य प्रदूषक आसपास के जल स्रोतों तक पहुंच रहे हैं। क्षेत्र के कुछ तालाबों का पानी प्रभावित हो गया है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि तालाबों का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि पशु भी उसे पीने से बच रहे हैं। इससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल स्रोत लगातार प्रदूषित होते रहे तो इसका असर खेती और पशुपालन पर भी पड़ सकता है।

मामले को लेकर जिला परिषद सदस्य सूरज मंडल और भाजपा नेता मनोज सरदार ने भी चिंता जताई है। दोनों नेताओं का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाला प्रदूषण लगातार पूरे इलाके को प्रभावित कर रहा है।
सूरज मंडल का कहना है कि धूल के कारण लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
वहीं भाजपा नेता मनोज सरदार ने कहा कि प्रदूषण की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि सड़क पर चलना तक मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि धूल रेलवे प्लेटफॉर्म तक पहुंच रही है, जिससे यात्रियों को भी भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि यदि फैक्ट्री प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन नहीं कर रही है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि फैक्ट्री की तत्काल जांच कराई जाए। यदि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित फैक्ट्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि उद्योगों का संचालन विकास के लिए आवश्यक है, लेकिन यह विकास स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि फैक्ट्री में आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली लगाई जाए, नियमित जल छिड़काव कराया जाए तथा धूल को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं।

विशेषज्ञों के अनुसार पत्थरों की पिसाई से निकलने वाले अत्यंत महीन धूल कण लंबे समय तक वातावरण में बने रहते हैं। लगातार इनके संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियां, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए ऐसे उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण के सभी मानकों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
हल्दीपोखर के लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से इस समस्या का सामना कर रहे हैं और अब प्रशासन से शीघ्र समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।













