Jamshedpur News : श्री बाला गणपति विलास कदमा की गणेश विसर्जन शोभायात्रा में सूर्य देव, राम-लक्ष्मण और भगवान बुद्ध की आकर्षक झांकियां बनीं आकर्षण का केंद्र, कलाकारों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर किया गया सम्मानित। ‘
Jamshedpur News : जमशेदपुर में जयालक्ष्मी नाट्य कला मंदिरम के कलाकारों ने श्री बाला गणपति विलास कदमा की गणेश विसर्जन शोभायात्रा में शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। सूर्य देव, राम-लक्ष्मण और भगवान बुद्ध की झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
Jamshedpur News : शहर की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था जयालक्ष्मी नाट्य कला मंदिरम के कलाकारों ने इस वर्ष आयोजित श्री बाला गणपति विलास कदमा की भव्य गणेश विसर्जन शोभायात्रा में अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन कर सभी का मन मोह लिया। धार्मिक आस्था और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से सजी इस शोभायात्रा में संस्था के कलाकारों की प्रस्तुतियां लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं।
30 सितंबर की शाम 6 बजे रंकिनी मंदिर से शुरू हुई यह भव्य शोभायात्रा कदमा फुटबॉल मैदान, बिस्टुपुर थाना, वोल्टास बिल्डिंग होते हुए खरखाई नदी तक पहुंची, जहां भगवान गणेश का विधि-विधान से विसर्जन किया गया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक झांकियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

जयालक्ष्मी नाट्य कला मंदिरम के कुल आठ कलाकारों ने तीन अलग-अलग झांकियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिकता का सुंदर संदेश प्रस्तुत किया। इन झांकियों की विशेषता उनकी जीवंत प्रस्तुति, आकर्षक वेशभूषा और प्रभावशाली अभिनय रहा।
पहली झांकी में सूर्य देव का भव्य स्वरूप प्रस्तुत किया गया। अलौकिक वेशभूषा और प्रभावशाली अभिनय के कारण यह झांकी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी रही। लोगों ने सूर्य देव के दिव्य स्वरूप की जमकर सराहना की।
दूसरी झांकी में भगवान राम और लक्ष्मण को हनुमान जी अपनी पीठ पर बैठाकर लंका की ओर ले जाते हुए दिखाया गया। इस झांकी ने रामायण के एक महत्वपूर्ण प्रसंग को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। दर्शकों ने इस प्रस्तुति की खूब प्रशंसा की और जगह-जगह कलाकारों का तालियों से स्वागत किया।
तीसरी झांकी में नन्हें कलाकारों ने भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों का रूप धारण कर “बुद्धम् शरणम् गच्छामि” का मधुर गायन प्रस्तुत किया। इस आध्यात्मिक प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को शांति, करुणा और मानवता का संदेश दिया।
संस्था के प्रशिक्षु और वरिष्ठ कलाकारों ने पूरे समर्पण और अनुशासन के साथ अपनी भूमिकाओं को निभाया। सूर्य देव की भूमिका निरंजन कुमार सिंह ने निभाई, जबकि भगवान राम और लक्ष्मण की भूमिका क्रमशः राजेश कुमार और नितिन कुमार ने निभाकर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।

भगवान बुद्ध की भूमिका में जय कुमार नजर आए। वहीं उनके शिष्यों के रूप में आरव, आर्यन, कृष्णा और सुशांत ने अपनी मासूम और प्रभावशाली प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया। सभी कलाकारों ने अपने अभिनय और मंचीय प्रस्तुति से यह साबित किया कि कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास से कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
किसी भी सांस्कृतिक प्रस्तुति की सफलता में वेशभूषा और मेकअप की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस शोभायात्रा में कलाकारों की आकर्षक वेशभूषा और सजीव रूप-सज्जा ने झांकियों की सुंदरता को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।
इस कार्य की जिम्मेदारी पवन कुमार, दिशा कुमारी और नेहा दत्ता ने निभाई। इनकी मेहनत और कलात्मक सोच का परिणाम था कि प्रत्येक पात्र अपने वास्तविक स्वरूप के बेहद करीब दिखाई दिया। दर्शकों ने कलाकारों के साथ-साथ उनकी वेशभूषा और मेकअप की भी सराहना की।
गणेश महोत्सव की सफल प्रस्तुति के बाद संस्था द्वारा सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कलाकारों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
सम्मान समारोह में संस्था के संरक्षक आनंद राव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने सभी कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि कला समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावशाली माध्यम है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है और इससे भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद मिलती है।
उन्होंने संस्था के प्रशिक्षकों, अभिभावकों और आयोजन समिति की भी सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं।
जयालक्ष्मी नाट्य कला मंदिरम लंबे समय से बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, अभिनय और मंच कला का प्रशिक्षण देने का कार्य कर रही है। संस्था समय-समय पर धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाती रही है।
संस्था के कलाकारों की प्रस्तुतियां न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि समाज को धार्मिक आस्था, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी कार्य करती हैं। यही कारण है कि संस्था की प्रस्तुतियों को हर वर्ष लोगों का भरपूर प्रेम और समर्थन मिलता है।
इस वर्ष की गणेश विसर्जन शोभायात्रा में भी संस्था ने यह साबित कर दिया कि कला केवल प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने का प्रभावी साधन भी है। कलाकारों के शानदार अभिनय, अनुशासन और समर्पण ने उपस्थित श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया और शोभायात्रा को यादगार बना दिया।















