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रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई दिनों से जारी विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। एक ओर झारखंड सरकार ने आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत का रास्ता अपनाते हुए चार मंत्रियों की समिति का गठन किया है, वहीं दूसरी ओर अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने जांच तेज करते हुए पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों घटनाक्रमों के बाद JPSC परीक्षा विवाद एक बार फिर राज्यभर में चर्चा का विषय बन गया है।

12 दिनों से जारी है छात्रों का आंदोलन
रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में पिछले 12 दिनों से छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन में शामिल छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। चार छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं, जबकि हर दिन आंदोलन में नए छात्र और अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित रूप से प्रभावित परीक्षाओं को रद्द करना, भर्ती प्रक्रिया में सुधार लागू करना, परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाना तथा अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शामिल है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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सरकार ने बनाई चार मंत्रियों की समिति
बढ़ते आंदोलन को देखते हुए झारखंड सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए चार सदस्यीय मंत्रिस्तरीय समिति का गठन किया है। सरकार का उद्देश्य छात्रों की मांगों को सुनकर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालना है।
हालांकि आंदोलनकारी छात्रों ने साफ कहा है कि बातचीत सार्वजनिक रूप से और मीडिया की मौजूदगी में होनी चाहिए ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे। छात्रों ने यह भी संकेत दिया है कि जल्द ही वे अपने प्रतिनिधियों का एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल घोषित करेंगे, जो सरकार की समिति के साथ वार्ता करेगा।
यदि यह बातचीत सफल रहती है, तो लंबे समय से चल रहा आंदोलन समाप्त होने की संभावना भी जताई जा रही है।
CID ने पांच और आरोपियों को किया गिरफ्तार
इसी बीच CID ने JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रांची और लखनऊ में संयुक्त छापेमारी कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार, धमेन्द्र कुमार और रक्षक सिंह शामिल हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन सभी पर 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित रूप से धोखाधड़ी और अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर सफलता प्राप्त करने का आरोप है।
CID का दावा है कि उमाकांत उरांव कथित एजेंट के रूप में उम्मीदवार उपलब्ध कराने की भूमिका निभा रहा था, जबकि रक्षक सिंह, जो TDPL कंपनी में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत है, परीक्षा में कथित गड़बड़ी से लाभ लेने के आरोपों का सामना कर रहा है।
छापेमारी में मिले डिजिटल साक्ष्य
CID की छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए हैं। इन सभी सामग्री को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
जांच एजेंसी का कहना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं और मामले में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है।
अब तक 19 आरोपी गिरफ्तार
CID के मुताबिक, JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में अब तक कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी सहित कुल 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
गिरफ्तार लोगों में कथित एजेंटों के अलावा परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसी लगातार दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो अन्य लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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समाधान की ओर बढ़ सकता है मामला
फिलहाल पूरे राज्य की नजर दो महत्वपूर्ण घटनाओं पर टिकी है—पहली, सरकार और छात्रों के बीच प्रस्तावित वार्ता, और दूसरी, CID की जांच। यदि वार्ता सकारात्मक रहती है और जांच में पारदर्शिता बनी रहती है, तो लंबे समय से जारी JPSC विवाद के समाधान की दिशा तय हो सकती है।
राज्य के हजारों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी अब सरकार और जांच एजेंसी के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत और CID की आगे की कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा और भविष्य तय करेगी।















