Jamshedpur News : जमशेदपुर में नवनियुक्त जिला शिक्षा पदाधिकारी निशु कुमारी से आदिवासी समाज की महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर उनका स्वागत किया। बैठक में ओल चिकि लिपि, मातृभाषा में शिक्षा और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
Jamshedpur News : पूर्वी सिंहभूम की नवनियुक्त जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) निशु कुमारी से आदिवासी समाज की महिलाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार मुलाकात कर उनका औपचारिक स्वागत किया। प्रतिनिधिमंडल ने बुके और अंगवस्त्र भेंट कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें विशेष रूप से ओल चिकि (Ol Chiki) लिपि, मातृभाषा में शिक्षा तथा आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया गया।
यह मुलाकात केवल औपचारिक स्वागत तक सीमित नहीं रही, बल्कि आदिवासी समाज की शिक्षा संबंधी अपेक्षाओं और भविष्य की योजनाओं को लेकर भी गंभीर संवाद का माध्यम बनी। प्रतिनिधिमंडल ने जिला शिक्षा पदाधिकारी के समक्ष विभिन्न मुद्दों को रखते हुए उम्मीद जताई कि नई शिक्षा व्यवस्था में आदिवासी बच्चों की भाषा और सांस्कृतिक पहचान को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल की महिलाओं ने कहा कि शिक्षा की शुरुआत यदि बच्चों की मातृभाषा से होती है तो उनकी सीखने की क्षमता अधिक विकसित होती है। उन्होंने विद्यालयों में स्थानीय आदिवासी भाषाओं के साथ-साथ ओल चिकि लिपि में शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
महिलाओं का कहना था कि आदिवासी समुदाय के कई बच्चे प्रारंभिक शिक्षा के दौरान भाषा संबंधी कठिनाइयों का सामना करते हैं। यदि उन्हें अपनी मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराई जाए तो उनकी पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी और ड्रॉपआउट दर में भी कमी आएगी। उन्होंने शिक्षा विभाग से इस दिशा में ठोस पहल करने का आग्रह किया।
बैठक के दौरान ओल चिकि लिपि के संरक्षण और उसके व्यापक प्रचार-प्रसार को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह केवल एक लिपि नहीं बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
महिलाओं ने सुझाव दिया कि सरकारी विद्यालयों में ओल चिकि भाषा और लिपि के अध्ययन-अध्यापन को प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही इस विषय से संबंधित शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने तथा विद्यार्थियों को अपनी भाषा से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
प्रतिनिधिमंडल ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को बताया कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को अपनी परंपरा, भाषा, लोक संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना भी आवश्यक है। यदि विद्यालयों में स्थानीय संस्कृति और भाषाई विरासत को स्थान मिलेगा तो बच्चों में अपनी पहचान के प्रति सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
महिलाओं ने यह भी सुझाव दिया कि स्कूलों में समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषा प्रतियोगिता, लोकगीत, लोकनृत्य और आदिवासी साहित्य से जुड़े आयोजन किए जाएं, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे।
नवनियुक्त जिला शिक्षा पदाधिकारी निशु कुमारी ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग का उद्देश्य सभी वर्गों के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि मातृभाषा आधारित शिक्षा, ओल चिकि लिपि के संरक्षण तथा आदिवासी विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों से जुड़े विषयों पर विभाग नियमानुसार हर संभव सहयोग देने का प्रयास करेगा। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने की भी बात कही।
गौरतलब है कि निशु कुमारी का हाल ही में पूर्वी सिंहभूम जिले के जिला शिक्षा पदाधिकारी के रूप में पदस्थापन हुआ है। पदभार ग्रहण करने के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों द्वारा उनसे लगातार शिष्टाचार मुलाकात की जा रही है।
आदिवासी महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई यह बैठक इस बात का संकेत है कि जिले में शिक्षा व्यवस्था को स्थानीय जरूरतों और सामाजिक अपेक्षाओं के अनुरूप मजबूत बनाने की दिशा में सकारात्मक संवाद की शुरुआत हो चुकी है। शिक्षा विभाग और समाज के बीच बेहतर समन्वय से आने वाले समय में आदिवासी विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाएं विकसित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) भी प्रारंभिक शिक्षा में मातृभाषा को महत्व देने की बात करती है। ऐसे में यदि स्थानीय स्तर पर मातृभाषा आधारित शिक्षा और ओल चिकि जैसी पारंपरिक लिपियों के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयास किए जाते हैं, तो इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रहेगी।
जमशेदपुर में हुई यह मुलाकात इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है। आदिवासी समाज की महिलाओं द्वारा अपनी भाषा, संस्कृति और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना तथा जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा उन्हें गंभीरता से सुनना भविष्य में बेहतर सहयोग और समन्वय की उम्मीद को मजबूत करता है।















