Bermo News : फुसरो के लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार ने 7077 मीटर ऊंचे माउंट कुन पर फहराया तिरंगा, भारतीय सेना ने बनाया नया रिकॉर्ड

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Bermo News : बेरमो कोयलांचल के गौरव लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार के नेतृत्व में भारतीय सेना के 27 सदस्यीय दल ने एक ही दिन में माउंट कुन की चोटी फतह कर रचा इतिहास, अगस्त में माउंट सतोपंथ और 2027 में माउंट एवरेस्ट अभियान की तैयारी।

Bermo News : बेरमो के फुसरो निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार ने लद्दाख के 7077 मीटर ऊंचे माउंट कुन पर भारतीय सेना के 27 सदस्यीय दल का नेतृत्व करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया। जानिए उनके पर्वतारोहण सफर, उपलब्धियां और आगामी अभियानों की पूरी कहानी।

झारखंड के बोकारो जिले के बेरमो कोयलांचल स्थित फुसरो के रहने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार ने एक बार फिर अपनी अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और पर्वतारोहण कौशल का परिचय देते हुए देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने जून-जुलाई 2026 के दौरान लद्दाख की जांस्कर पर्वतमाला में स्थित 7077 मीटर ऊंचे माउंट कुन की सफल चढ़ाई पूरी कर नई उपलब्धि अपने नाम दर्ज कराई। इस अभियान के दौरान उनके नेतृत्व में भारतीय सेना के 27 सदस्यीय दल ने एक ही दिन में शिखर तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड भी स्थापित किया।

17 जुलाई को शिखर पर फहराया तिरंगा

लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार और उनकी टीम ने 17 जुलाई की सुबह 08:20 बजे माउंट कुन की चोटी पर पहुंचकर भारत का तिरंगा लहराया। समुद्र तल से 7077 मीटर की ऊंचाई पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का यह क्षण पूरे दल के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक बना। अभियान के दौरान सेना के सभी सदस्यों ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अनुशासन, धैर्य और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

इस सफलता के साथ भारतीय सेना के 27 सदस्यीय दल ने एक ही दिन में माउंट कुन की चोटी पर पहुंचने का नया रिकॉर्ड भी कायम किया, जो पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

विश्व के कठिनतम पर्वतों में शामिल है माउंट कुन

लद्दाख की सुरू घाटी में हिमालय की जांस्कर पर्वतमाला में स्थित माउंट कुन तकनीकी दृष्टि से दुनिया के सबसे कठिन पर्वतों में गिना जाता है। यहां का मौसम पल-पल बदलता है और तेज बर्फबारी, ग्लेशियर, खड़ी चट्टानें तथा ऑक्सीजन की कमी पर्वतारोहियों के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी रहती हैं।

ऐसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक अभियान पूरा करना केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता, रणनीतिक योजना और मजबूत नेतृत्व का भी प्रमाण माना जाता है। यही कारण है कि माउंट कुन की चढ़ाई पर्वतारोहियों के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं मानी जाती।

16 जून से शुरू हुआ था अभियान

लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार के नेतृत्व में भारतीय सेना का यह साहसिक अभियान 16 जून को नई दिल्ली से शुरू हुआ था। अभियान के दौरान दल ने कई चरणों में ऊंचाई के अनुसार खुद को अनुकूल बनाया और कठिन प्रशिक्षण के बाद अंतिम चढ़ाई शुरू की।

लगातार कई दिनों तक प्रतिकूल मौसम और कठिन रास्तों का सामना करने के बाद टीम ने सफलतापूर्वक शिखर तक पहुंचने का लक्ष्य हासिल किया। अभियान की सफलता में टीम के सभी सदस्यों का समर्पण और सामूहिक प्रयास महत्वपूर्ण रहा।

पहले भी माउंट कुन पर फहरा चुके हैं तिरंगा

यह पहली बार नहीं है जब लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार ने माउंट कुन पर सफलता हासिल की हो। इससे पहले जुलाई-अगस्त 2025 में भी उन्होंने इसी पर्वत पर तिरंगा फहराकर अपनी पर्वतारोहण क्षमता का परिचय दिया था।

लगातार दूसरी बार इस कठिन शिखर को फतह करना उनके अनुभव, तैयारी और साहस का प्रमाण माना जा रहा है। उनकी यह उपलब्धि युवा पर्वतारोहियों और सेना के जवानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।

सैनिक स्कूल तिलैया के पूर्व छात्र हैं जयप्रकाश कुमार

लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार सैनिक स्कूल तिलैया के पूर्व छात्र हैं। बचपन से ही अनुशासन, नेतृत्व और देशसेवा की भावना से प्रेरित जयप्रकाश ने भारतीय सेना में शामिल होकर अपने सपनों को नई दिशा दी।

सेना में रहते हुए उन्होंने न केवल सैन्य सेवाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया बल्कि साहसिक अभियानों में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें सेना मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है।

60 से अधिक पर्वतारोहण अभियानों का अनुभव

लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार का पर्वतारोहण करियर बेहद शानदार रहा है। अब तक वे 60 से अधिक सफल पर्वतारोहण अभियानों का हिस्सा रह चुके हैं।

उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं—

  • वर्ष 2019 में विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफल चढ़ाई।
  • वर्ष 2024 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो फतह।
  • वर्ष 2025 में पहली बार माउंट कुन पर सफल आरोहण।
  • वर्ष 2026 में दूसरी बार माउंट कुन पर भारतीय सेना के दल का नेतृत्व करते हुए नया रिकॉर्ड स्थापित करना।

इन उपलब्धियों ने उन्हें देश के प्रमुख पर्वतारोहियों की श्रेणी में शामिल कर दिया है।

तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार से हो चुके हैं सम्मानित

पर्वतारोहण और साहसिक खेलों में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें प्रतिष्ठित तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार से सम्मानित किया था।

यह पुरस्कार देश के उन चुनिंदा लोगों को दिया जाता है जिन्होंने साहसिक गतिविधियों में असाधारण योगदान देकर राष्ट्र का गौरव बढ़ाया हो। यह सम्मान लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार की मेहनत, समर्पण और उत्कृष्ट उपलब्धियों का प्रमाण है।

अब माउंट सतोपंथ और फिर एवरेस्ट की तैयारी

माउंट कुन अभियान की सफलता के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार ने अपने अगले अभियानों की भी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम अगस्त महीने में माउंट सतोपंथ पर चढ़ाई करेगी।

इसके बाद वर्ष 2027 में एक बार फिर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर अभियान चलाने की योजना बनाई गई है। इस अभियान के लिए अभी से रणनीति और तैयारी शुरू कर दी गई है।

बेरमो और झारखंड के लिए गर्व का क्षण

फुसरो निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार की इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे बेरमो कोयलांचल, बोकारो जिला और झारखंड में खुशी का माहौल है। उनकी उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि छोटे शहरों और कस्बों से निकलने वाली प्रतिभाएं भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

उनकी सफलता युवाओं के लिए यह संदेश देती है कि कठिन परिश्रम, अनुशासन, आत्मविश्वास और देशसेवा की भावना के साथ किसी भी ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है। माउंट कुन पर तिरंगा फहराकर उन्होंने न केवल भारतीय सेना बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। आने वाले वर्षों में माउंट सतोपंथ और फिर माउंट एवरेस्ट अभियान को लेकर भी देशवासियों की उम्मीदें उनसे जुड़ी रहेंगी।

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