जनआंदोलन के दबाव में बुल्गारिया के प्रधानमंत्री ने दिया इस्तीफा

जनआंदोलन के दबाव में बुल्गारिया के प्रधानमंत्री और पूरी सरकार ने दिया इस्तीफा
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जनआंदोलन प्रदर्शनों के बाद सरकार गिरी

Bulgaria faces turmoil after protests topple government on eve of euro  entry | Reuters

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बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रोसेन झेल्याज़कोव की सरकार ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दे दिया है। बुधवार रात राजधानी सोफिया के मध्य हिस्से सहित देश के कई शहरों में हजारों प्रदर्शनकारियों के सड़कों पर उतरने से राजनीतिक दबाव चरम पर पहुंच गया, जिसके बाद सरकार को यह कदम उठाना पड़ा।

झेल्याज़कोव का यह नाटकीय फैसला संसद में प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव से ठीक पहले और बुल्गारिया के यूरो मुद्रा अपनाने से महज 20 दिन पहले सामने आया है। जनवरी से सत्ता में रही उनकी अल्पमत केंद्र-दक्षिणपंथी सरकार पर प्रदर्शनकारियों ने व्यापक भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे।

जनाक्रोश को देखते हुए सरकार पहले ही अगले वर्ष के लिए प्रस्तावित एक विवादास्पद बजट योजना को वापस ले चुकी थी, लेकिन इससे भी जनता का आक्रोश शांत नहीं हुआ। टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री झेल्याज़कोव ने कहा, “हम सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे नागरिकों की आवाज़ सुन रहे हैं।”

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यूरोज़ोन में शामिल होने से ठीक पहले सरकार का गिरना बुल्गारिया को एक नए राजनीतिक संकट की ओर धकेल सकता है, जिसका असर देश की स्थिरता और आर्थिक भविष्य पर भी पड़ने की आशंका है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “युवा हों या बुज़ुर्ग, सभी ने [हमारे इस्तीफे] के लिए अपनी आवाज़ बुलंद की है। इस नागरिक ऊर्जा को समर्थन और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।”
सरकारी वेबसाइट पर जारी बयान में बताया गया है कि नया मंत्रिमंडल गठित होने तक सभी मंत्री अपने-अपने पदों पर कार्यवाहक रूप में बने रहेंगे।

बुधवार शाम राजधानी सोफिया के ‘ट्राएंगल ऑफ पावर’ और इंडिपेंडेंस स्क्वायर में करीब 50 हजार से लेकर एक लाख तक लोग जुटे और सरकार से इस्तीफे की मांग की। संसद भवन पर “Resignation” और “Mafia Out” जैसे नारे प्रोजेक्ट किए गए, जो जनता के गुस्से और अविश्वास को साफ तौर पर दर्शा रहे थे।

इन प्रदर्शनों को पिछले सप्ताह राष्ट्रपति रूमेन रादेव का भी समर्थन मिला था। राष्ट्रपति रादेव ने भी सरकार से पद छोड़ने की अपील की थी, जिससे राजनीतिक दबाव और तेज हो गया और अंततः सरकार को इस्तीफे का फैसला लेना पड़ा।
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प्रधानमंत्री रोसेन झेल्याज़कोव की सरकार इससे पहले अविश्वास प्रस्तावों की पांच परीक्षाएं पार कर चुकी थी और गुरुवार को होने वाले छठे अविश्वास प्रस्ताव में भी उसके बच जाने की संभावना जताई जा रही थी। इसके बावजूद बढ़ते जनआक्रोश और राजनीतिक दबाव ने सरकार को इस्तीफे के लिए मजबूर कर दिया।

प्रदर्शनकारियों के गुस्से की बड़ी वजह दो प्रभावशाली हस्तियां रहीं—ओलिगार्क डेल्यान पीवस्की और पूर्व प्रधानमंत्री बॉयको बोरीसोव। बुल्गारिया की समाचार एजेंसी बीटीए के मुताबिक, बुधवार का विशाल प्रदर्शन “इस्तीफा दो! पीवस्की और बोरीसोव सत्ता से बाहर” जैसे नारे के साथ आयोजित किया गया था।

डेल्यान पीवस्की पर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते अमेरिका और ब्रिटेन दोनों ने प्रतिबंध लगाए हैं। उनकी पार्टी सरकार को समर्थन दे रही थी, जिससे जनता में नाराज़गी और बढ़ गई। वहीं, बॉयको बोरीसोव झेल्याज़कोव की जीईआरबी (GERB) पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, जिसने अक्टूबर 2024 के चुनावों में पहला स्थान हासिल किया था। बताया गया कि बोरीसोव ने बुधवार को कहा था कि गठबंधन दल 1 जनवरी को बुल्गारिया के यूरोज़ोन में शामिल होने तक सत्ता में बने रहने पर सहमत थे।

गौरतलब है कि बोरीसोव वर्ष 2020 में भी प्रधानमंत्री थे, जब भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के चलते उनकी सरकार गिर गई थी। उसके बाद से अब तक देश में सात बार चुनाव हो चुके हैं, जो बुल्गारिया की लगातार जारी राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाता है।

हालांकि सोफिया में चल रहे इस राजनीतिक घटनाक्रम के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि बुल्गारिया का यूरो मुद्रा अपनाने का फैसला फिलहाल खतरे में नहीं है।

इस्तीफे के अपने बयान में निवर्तमान प्रधानमंत्री झेल्याज़कोव ने कहा कि देश एक बड़ी चुनौती के दौर से गुजर रहा है और नागरिकों को यह तय करने के लिए “ठोस और प्रामाणिक सुझाव” देने होंगे कि अगली सरकार कैसी होनी चाहिए।

गौर करने वाली बात यह भी है कि ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के अनुसार, सरकारी भ्रष्टाचार को लेकर जनता की धारणा के मामले में बुल्गारिया यूरोप के शीर्ष देशों में शामिल है, जो मौजूदा असंतोष और आंदोलनों की पृष्ठभूमि को और स्पष्ट करता है।

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